गरीबी से त्रस्त मजदूर फांसी पर झूला, चंदा कर हुआ अंतिम संस्कार

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फर्रुखाबाद: कभी-कभी ऊपर वाला किसी को छप्पर फाड़ कर दे देता है और कहीं ऐसे वाकया भी देखने में आये कि गरीबी से परेशान व्यक्ति परिवार का भरण पोषण तक न कर पाने की बजह से मौत को गले लगाने का फैसला कर लेता है। ऐसी ही एक घटना नबावगंज क्षेत्र में घटी जहां तीन दिन से लापता मजदूर ने पेड़ से लटक कर आत्महत्या कर ली।

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जानकारी के मुताबिक थाना नबावगंज क्षेत्र के गांव अचरिया निवासी 32 वर्षीय कन्हैयालाल जोकि कुछ समय पूर्व अचार इत्यादि बेचकर अपने परिवार की जीविका चलाता था। कन्हैयालाल का विवाह संतोष नाम की युवती से हो गया था। कन्हैयालाल के इस समय पांच बच्चे 18 वर्षीय पुत्र किशन, 13 वर्षीय पुत्र रामजीत, पुत्री रोशनी, पुत्र चंदन व मनोज हैं। परिवार बढ़ने के साथ-साथ कन्हैयालाल के खर्चे भी बढ़ गये। जिसको लेकर वह चिंतित रहने लगा। 22 अगस्त की शाम को कन्हैयालाल घर से शाल इत्यादि लेकर निकल गया। काफी समय जब कन्हैयालाल लौटकर नहीं आया तो परिजनों ने उसकी खोजवीन शुरू की। कहीं पता न लगने पर थाना नबावगंज में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करायी। पुलिस ने मामले की जांच पड़ताल शुरू कर दी थी।

जानवर चरा रहे उखरा गांव के पास कुछ लोगों ने झाड़ियों के पास पेड़ पर एक व्यक्ति का शव लटका देखा। जिसकी जानकारी उखरा गांव के प्रधान राजबहादुर को दी गयी। प्रधान ने मामले की जानकारी थाना नबावगंज को दी। सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची और ग्रामीणों की मदद से मृतक के शव को नीचे उतरवाया। परिजनों ने शव की पहचान कर ली। देर रात शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। मृतक के साढ़ू के लड़के राजीव ने बताया कि कन्हैयालाल आर्थिक तंगी से परेशान था। साल में तकरीबन दो बार वह इसी बजह से मानसिक रूप से विक्षिप्त भी हो जाता था। 22 अगस्त को वह बगैर बताये निकल गये थे। इसके बाद उनका शव लटका मिला। गरीबी की बजह से गांव के अन्य लोगों से चंदा करके उनके शव का अंतिम संस्कार किया गया। वहीं परिजनों ने घटना के पीछे हत्या किये जाने की बात भी की है।

थानाध्यक्ष नबावगंज ने बताया कि युवक मानसिक रूप से विक्षिप्त था। इस बजह से उसने हत्या कर ली। सूत्रों से मिली पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार तकरीबन तीन दिन पूर्व कन्हैयालाल की मौत हुई है। मौत की बजह फांसी लगाना ही है।

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