क्यूँ लटका है मिड डे मील बनाने के लिए एनजीओ का चयन ?

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फर्रुखाबाद: १० फरवरी| मिड डे मील प्राधिकरण की इस रिपोर्ट के बाद कि एनजीओ जो वर्तमान में खाना बना रही है न केवल अनिमियतता से परिपूर्ण चयनित है बल्कि गैर नियम के तहत भुगतान भी पाती है| गुणवत्ता पूर्ण खाना बनाने और उसे नहिहालो को खिलने में भी फिस्सडी निकले थे| ये रिपोर्ट गत वर्ष सितम्बर में ही आ गयी थी| जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी और जिलाधिकारी दोनों को पत्र भेजा गया था| मगर मामले में उस जाँच के बाद कोई कारवाही नहीं हुई आखिर क्यूँ ये बड़ा सवाल मुह बाए खड़ा है कोई अधिकारी इसका जबाब नहीं दे सकता|

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जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी खुद जाँच के समय थे उनकी तो बोलती ही बंद हो गयी थी मगर उस वक़्त जिलाधिकारी के कार्यालय में जो चिठ्ठी आई वो क्यूँ दबी रही| क्या नौनिहालों के खाने के साथ फरेब कोई मामूली मामला था| वो चिठ्ठी नयी जिलाधिकारी के आने के बाद दौड़ी| मगर दिसंबर माह में विज्ञापन के बाद जनवरी २०११ से नयी चयनित एन जी ओ को खाना बनाने के लिए लगाया जाना था उसकी फाइल विकास भवन के गलियारों में क्यूँ धुल फाक रही है| वही चोर एनजीओ खाना बना रहे है और चर्चा है कि उसके गोलमाल का एक बड़ा हिस्सा विकास भवन के कर्णधारो के पास चडावे में जा रहा है| पंडितजी गूढ़ खा रहे है मगर गुलगुले से परहेज बता रहे है|

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