कोरिया में 93 व भारत में सिर्फ 11 फीसद छात्र ले रहे उच्च शिक्षा

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LUCKNOW : अन्य देशों की तुलना में भारत में महज 11 फीसद छात्र ही उच्च शिक्षा की तरफ अग्रसर हो रहे हैं, जबकि संयुक्त राज्य अमेरिका में 83 फीसद, दक्षिण कोरिया में 93 फीसद विद्यार्थी उच्च शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। उक्त बातें इलाहाबाद विश्वविद्यालय में राजनीति विज्ञान विभाग में राजीव गांधी पीठ के तत्वावधान में आयोजित परिचर्चा में विभागाध्यक्ष प्रो. कृष्णा गुप्ता ने कहीं।
उच्च शिक्षा की चुनौतियां विषय पर आयोजित परिचर्चा में उन्होंने कहा कि शिक्षा का आशय महज सूचना प्राप्ति से नहीं है, बल्कि उसके अर्थपूर्ण होने से है। मुख्य वक्ता के रूप में हैदराबाद विश्वविद्यालय के अवकाश प्राप्त प्रोफेसर जी हरिगोपाल ने कहा कि हमारे नीति नियंता प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देने की बात तो करते हैं पर हमारे यहां तैयारियां कमजोर हैं। शिक्षा में हम उत्कृष्टता का पैमाना पश्चिमी मानदंडों के आधार पर तय करने लगे हैं। बढ़ते बाजारीकरण ने भी गुरु-शिष्य परंपरा को खत्म करने का काम किया है। प्रो. लाल बहादुर वर्मा ने कहा कि शिक्षा में एक प्रकार का जातिवाद काम कर रहा है। शिक्षक का भी उद्देश्य केवल नौकरी पाना रह गया है, इसलिए भी शिक्षा का स्तर गिर रहा है। प्रो. मानस मुकुल दास ने शिक्षा में सृजनात्मकता की कमी का मुद्दा उठाया। कार्यक्रम के अंत में अधिष्ठाता कला संकाय तथा कार्यवाहक अध्यक्ष राजीव गांधी पीठ प्रो. मृदुला त्रिपाठी ने धन्यवाद ज्ञापन किया। इस अवसर पर रिसर्च एसोसिएट डॉ. कमलेश गुप्ता, डॉ. राजपाल बुधानिया, डॉ. अखिलेश मिश्रा, विश्वदीपक त्रिपाठी, प्रवीन पांडेय, दशरथ लाल यादव आदि मौजूद रहे।
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