कुत्ता-बंदर काटने पर 24 घंटे के भीतर एंटी रेबीज इंजेक्शन जरूरी

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फर्रुखाबाद:(जेएनआई ब्यूरो) आजकल घरों में कुत्ते या बिल्ली पालने का ट्रेंड तेजी से बढ़ रहा है| हालांकि इन्हें पालना ही काफी नहीं, बल्कि समय-समय पर एंटी रेबीज इंजेक्शन लगवाना भी जरूरी है| डॉक्टरों के अनुसार यदि ऐसे जानवरों के काटने के 24 घंटे के भीतर एंटी रेबीज इंजेक्शन न लगवाया जाए, तो यह जानलेवा साबित हो सकता है| सभी सरकारी अस्पतालों में एंटी रेबीज इंजेक्शन मुफ्त में लगाए जाते हैं|इस तरह होती है रेबीज की पहचान: कुत्ते, बिल्ली, बंदर, नेवला, लोमड़ी, सियार व अन्य जानवरों के
काटने से रेबीज होता है| लिंजीगंज अस्पताल के डॉ. नवनीत गुप्ता ने बताया कि रेबीज होने पर व्यक्ति को हाइड्रोफोबिया हो जाता है| इसका मतलब है कि व्यक्ति को पानी से डर लगने लगता है और वह पानी से दूर भागता है| इतना ही नहीं, वह दूसरे व्यक्ति को काट भी सकता है| ऐसे व्यक्ति के संपर्क में आने पर व्यक्ति को भी इंजेक्शन लगवाना पड़ता है| इसलिए सलाह दी जाती है कि रेबीज से पीड़ित व्यक्ति को कमरे में बंद कर के रखें|
24 घंटे के भीतर लगवाएं इंजेक्शन: डॉ. नवनीत गुप्ता नें बताया की कुत्ते, बिल्ली एवं बंदर आदि
जानवर के काटने पर 24 घंटे के भीतर ही टिटनेस और एंटी रेबीज इंजेक्शन लगवाना चाहिए| कुत्ता, बिल्ली व बंदर के काटने पर घाव पर मिर्च, तेल व अन्य ज्वलनशील पदार्थ लगाने से बचना चाहिए। ऐसे अंधविश्वास से दूरी बनना चाहिए।
रेबीज का संक्रमण है लाइलाज

डा. नवनीत गुप्ता ने बताया कि कुत्ता, बंदर, सियार, बिल्ली व अन्य स्तनधारी जंतुओं के काटने से व्यक्ति को अधिक घबराने की जरूरत नहीं है। इसके लिए जागरूकता जरूरी है। समय से टीकाकरण होने से पीड़ित पर रेबीज का असर नहीं होता। यदि भूलवश यदि व्यक्ति में रेबीज का संक्रमण हो गया तो फिर यह लाइलाज ही है। उन्होंने बताया कि रेबीज संक्रमित जानवर के काटने से यह खतरनाक वायरस पेरीब्रल नर्व के माध्यम से व्यक्ति के तंत्रिकातंत्र (सीएनएस) पर हमला करते हुए ब्रेन तक पहुंच बना लेता है। इससे पीड़ित व्यक्ति के मस्तिष्क की मांसपेशियों में सूजन आने के साथ स्पाइनल कार्ड भी प्रभावित हो जाती है। व्यक्ति में इंसेफ्लाइटिस जैसी स्थिति हो जाती है और वह कोमा में चला जाता है। इससे उसकी मौत हो जाती है।
कुत्ता काटने पर क्या करें

– घाव को 15 मिनट तक साबुन और साफ पानी से अच्छी तरह धोएं एवं स्प्रिट, एल्कोहल या घरेलू एंटीसेप्टिक का करें इस्तेमाल
– एंटी रेबीज टीकाकरण का पूर्ण कोर्स लें
– अंधविश्वास से रहें दूर
क्या न करें
– हाथ से घाव छूना
– घाव पर मिट्टी, मिर्च, तेल, जड़ी-बूटियां चाक, पान की पत्तियों जैसे उत्तेजक पदार्थ लगाना
– घाव को ढकना या टांके लगवाना
– बच्चों को जानवरों के संपर्क में आने या उनके साथ खेलना
नगर संवाददाता- प्रमोद द्विवेदी की रिपोर्ट

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