कार्तिक पूर्णिमा पर हजारों भक्तों ने लगाई गंगा में डुबकी, सालों बाद बना ऐसा योग

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FARRUKHABAD : घटियाघाट गंगा तट पर कार्तिक पूर्णिमा पर सुबह तड़के से ही हजारों भक्तों ने आकर गंगा में डुबकी लगायी। वहीं जाम की समस्या से बचने के लिए पुलिस प्रशासन को भारी मसक्कत करनी पड़ी। लेकिन फिर भी पल पल पर जाम की स्थिति बनती नजर आयी। कार्तिक पूर्णिमा पर वर्षों बाद ऐसा संयोग बनने से इस बार कुछ विशेष महत्व माना जा रहा है। 17 नवंबर कार्तिक पूर्णिमा पर 27 साल बाद बेहद शुभ संजोग बन रहा है। इस बन रहे पद्मक योग को पुष्कर स्नान से भी अधिक फलदाई माना जा रहा है।

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ज्योतिषियों की मानें तो पुण्य कमाने का दुर्लभ अवसर है। 17 नवंबर को है कार्तिक पूर्णिमा का पर्व। इससे पहले 16 नवंबर 1986 को भी यही योग बना था। इस बार कार्तिक पूर्णिमा पर रविवार, कृतिका नक्षत्र, सूर्य के विशाखा नक्षत्र होने से पद्मक योग बन रहा है। 17 नवंबर सुबह 8:05 बजे तक भद्रा रहेगी।gange snan

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मध्याह्न 3:38 बजे तक वरीयान योग एवं शाम 5:55 बजे तक मेष राशि पर चंद्रमा रहेगा। इसी दिन भीष्म पंचकों की समाप्ति होगी और श्री गुरु नानक जयंती का पर्व होगा। आचार्य भरत राम तिवारी ने बताया कि कार्तिक पूर्णिमा पर पुष्कर स्नान को कई गुना फलदाई माना जाता है लेकिन इस योग में पूजा-अर्चना, व्रत करना पुष्कर स्नान से भी अधिक पुण्यदाई होगा।

कार्तिक पूर्णिमा की सुबह रविवार को भरणी नक्षत्र में हो रही है. शास्त्रों में कहा गया है कि भरणी नक्षत्र में गंगा स्नान व पूजन करने से हर तरह के ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है. इसके साथ ही इस दिन 7 तरह के अतिशुभ योग का निर्माण हो रहा है ये योग हैं कालदंड योग, मकरध्वज, जलज, वृतस्य योग, मुनि योग, हरिद्रा, और महामृत्युजंय योग.GANGA SNAN

इन योगों के बनने के कारण जो जातक कालसर्प दोष, पितृदोष मंगलदोष से पीड़ित हैं इनके लिए सुनहरा मौका लेकर आई है ये पूर्णिमा.  यूं तो साल में लगभग 16 अमावस्या पड़ती है लेकिन वर्ष की सबसे काली और लंबी अमावस्या की रात्रि कार्तिक मास की अमावस्या यानि दीवाली को माना गया है और उसके ठीक 15 दिन बाद कार्तिक मास की पूर्णिमा पड़ती है जो अधंकार का नाश करती है. कहते हैं इसी दिन भगवान शिव ने त्रिपुरासुर नामक असुर का वध किया था और त्रिपुरारी कहलाए थे. ठीक उसी तरह मनुष्य अपने अंदर काम, क्रोध, लोभ रूपी आसुरी प्रवृत्तियों का नाश कर ज्ञान रूपी प्रकाश को प्राप्त करता है.

कार्तिक पूर्णिमा को महाकार्तिकी पूर्णिमा भी कहा जाता है, इसी दिन भगवान विष्णु ने वेदों की रक्षा के लिए मत्स्य अवतार धारण किया था.

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