लखनऊ: सूचनाएं छिपाने में माहिर एटा के जलेसर के तत्कालीन अधिशासी अधिकारी ललित कुमार निमेष को यह आदत भारी पड़ गई है। राज्य सूचना आयोग ने 10 मामलों में उन पर ढाई लाख रुपये का जुर्माना किया है। यह धनराशि उनके वेतन से वसूल की जाएगी। माना जा रहा है कि उत्तर प्रदेश में यह किसी अधिकारी पर सबसे बड़ा जुर्माना है। आरटीआइ कार्यकर्ता मनीष कुमार परमार एडवोकेट ने पिछले वर्षों में नगर पालिका परिषद जलेसर की आय-व्यय, बैकलॉग भर्ती, पालिका भवन में अग्निकांड मामले सहित 10 मामलों की जानकारियां प्राप्त करने के लिए सूचना का अधिकार के तहत अलग-अलग आवेदन किए थे। उस समय यहां अधिशासी अधिकारी के रूप में ललित कुमार निमेष तैनात थे। उन्होंने एक भी मामले को गंभीरता से न लेकर जानकारी मुहैया नहीं कराई। इस पर मनीष मामले को राज्य सूचना आयोग में ले गए। इस बीच पिछले वर्ष अधिशासी अधिकारी का स्थानांतरण जलेसर से फतेहपुर सीकरी नगर पालिका, आगरा में हो गया। हालांकि आयोग में मुकदमा चलता रहा। इस मामले को निर्णीत करते हुए आयोग ने अधिशासी अधिकारी को सूचना न देने का दोषी ठहराया। उन पर प्रति सूचना 25 हजार रुपये के हिसाब से ढाई लाख रुपये अर्थदंड लगाया है। अर्थदंड की धनराशि को अधिशासी अधिकारी के वेतन से वसूलने के लिए जिलाधिकारी एटा को निर्देशित किया है।
एटा के अधिकारी पर आरटीआइ में प्रदेश का सबसे बड़ा जुर्माना
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