फर्रुखाबाद :(जेएनआई ब्यूरो)आलू उत्पादन के लिए पहचान रखने वाले फर्रुखाबाद में इन दिनों आलू का बाजार मंदी की मार झेल रहा है। बाहर की मंडियों से मांग कमजोर होने और दूसरे राज्यों के सस्ते आलू से प्रतिस्पर्धा के चलते जिले के किसानों और आलू कारोबारियों की चिंता बढ़ गई है। 22 सितंबर की रिपोर्ट के अनुसार जिले के 121 शीतगृहों में भंडारित 9.72 लाख मीट्रिक टन आलू में से करीब 6.79 लाख मीट्रिक टन अब भी शीतगृहों में पड़ा है। फर्रुखाबाद के आलू की प्रमुख खपत वाले ओडिशा और झारखंड के बाजारों में इस बार पश्चिम बंगाल के आलू की अधिक पहुंच है। बंगाल से ओडिशा तक परिवहन लागत कम होने के कारण वहां फर्रुखाबाद के आलू की मांग प्रभावित हुई है। इससे जिले से इन राज्यों के लिए आलू की निकासी लगभग थम गई है। मंडी भाव भी किसानों के लिए चिंता का विषय बने हुए हैं। उपलब्ध 20 सितंबर के बाजार आंकड़ों में फर्रुखाबाद मंडी में आलू का न्यूनतम भाव 470 और अधिकतम 540 रुपये प्रति क्विंटल दर्ज हुआ, जबकि मॉडल भाव 455 रुपये प्रति क्विंटल रहा। नई फसल की बोआई सिर पर, पुराना आलू बना परेशानी: जिले में नई अगेती आलू की बोआई का समय शुरू हो चुका है। ऐसे में शीतगृहों में रखा पुराना आलू निकालना किसानों, व्यापारियों और शीतगृह संचालकों के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है। उद्यान विभाग के अनुसार सितंबर के अंतिम दिनों में निकासी बढ़ने की उम्मीद है, लेकिन अभी भी बड़ी मात्रा में आलू भंडारित है। मंदी को देखते हुए शासन ने किसानों को राहत देने के लिए भामाशाह भाव स्थिरता योजना के तहत निजी शीतगृहों में भंडारित आलू पर 100 रुपये प्रति क्विंटल अनुदान की व्यवस्था की है। पात्र किसान को अधिकतम 200 क्विंटल तक, यानी 20 हजार रुपये तक लाभ मिल सकता है। आलू के भाव में सुधार नहीं हुआ तो नई फसल की बोआई के साथ किसानों पर पुराना आलू निकालने और नई फसल की लागत जुटाने का दबाव और बढ़ सकता है। ऐसे में किसानों की नजर अब बाहरी मंडियों की मांग और आने वाले दिनों में भाव में संभावित सुधार पर टिकी है। कोल्ड मालिक अजय यादव ने बताया की कोल्ड अभी भी भरे हुए हैं, किसान की लागत नही निकल रही है, लिहाजा वह आलू निकालने नही आ रहा है | समय से कोल्ड खाली नही हुए तो समस्या होंगी | मंदी से किसान परेशान है |
आलू की मंदी से किसान बेहाल, शीतगृहों में अब भी 6.79 लाख टन भंडार
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