आक्सीटोसिन की दम पर बाजार में तरबूज का बेमौसम हमला

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FARRUKHABAD : तरबूज की सीजन आने में अभी लगभग एक माह बाकी है लेकिन बाजार में लाल रंग का कटा रखा तरबूज अभी से ही लोगों को लुभा रहा है। लेकिन बेमौसम आये इस तरबूज की यदि हकीकत जानेंगे तो शायद ही इस तरबूज को कोई पसंद करेगा। आक्सीटोसिन इंजेक्शन के दम पर लाल किये गये इस तरबूज को खाने से लोगों के शरीर में भी कई प्रकार की बीमारियों के घर करने का खतरा मड़रा रहा है।

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बाजार में वैसे तो लौकी, तोरई, भिन्डी से लेकर सभी हरी सब्जियां हाइब्रिड आ चुकी हैं। इन सब्जियों के खाने से फायदों से ज्यादा शरीर को नुकसान हो सकता है। लेकिन लोग खाने में हरी सब्जियों को खूब पंसद कर रहे हैं और विभिन्न दवाइयों के दम पर पैदा की गयीं यह हाइब्रिड सब्जियां ऊंचे दामों में खरीद रहे हैं।

वहीं यदि तरबूज की बात करें तो रेती का तरबूज भी सामान्य तौर पर बाजार में आने में अभी लगभग एक माह का समय लग जायेगा। लेकिन बाजार में अभी से ही काफी मात्रा में तरबूज आ चुका है। दो से तीन किलो बजन का तरबूज इतना लाल दिखायी देता है जैसे यह तरबूज सीजनी पका हुआ हो। लेकिन ऐसा नहीं है। जरा इस तरबूज को खाने में सावधानी बरतने की आवश्यकता है। जानकारों की मानें तो इस समय आने वाले बाजार में लाल तरबूज की कहानी विचित्र है। तरबूज की खेती करने वाले किसान तरबूज के पौधों में ही आक्सीटोसिन इंजेक्शन लगा देते हैं और जिस पौधे में आक्सीटोसिन इंजेक्शन लगा दिया जाता है उसमें लगे हुए सारे तरबूज एक दम लाल हो जाते हैं।

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आक्सीटोसिन युक्त यह तरबूज इस समय 2 से 3 किलो का तरबूज बाजार में लगभग 50 से 70 रुपये का मिल रहा है। इंजेक्शन लगा हुआ यह तरबूज एक तरफ तो लोगों की जेब ढीली कर रहा है तो दूसरी तरफ उनके स्वास्थ्य के साथ भी खिलवाड़ कर रहा है। जो कि भविष्य में अनेक गंभीर बीमारियों को जन्म दे सकता है।

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