फर्रुखाबाद परिक्रमा: मूलचंद से सलमान तक संसदीय इतिहास, कड़क कलेक्टर और नेताओ के डोलते सिंघासन

EDITORIALS FARRUKHABAD NEWS

साठ वर्ष की हो गई हमारी संसद!

आज 13 मई है। आज विश्व के सर्वोच्च लोकतंत्र का सर्वोच्च मंदिर (संसद) अपने जीवन के साठ साल पूरा कर रहा है। इसकी गरिमा मर्यादा सर्वोच्चता पर गुण दोष के आधार पर पूरे देश में जमकर बहस और चर्चायें हो रहीं हैं। होनी भी चाहिए। लंबी गुलामी के बाद आजादी हासिल होने पर हमने लोकतंत्र को अपनाया। इसमें संसदीय परंपराओं को अभूतपूर्व नजारा हम साठ सालों से देखते आ रहे हैं। आज इस सब पर मनन चिंतन और मंथन होना ही चाहिए।

लोकसभा के पहिले तीन चुनावों में फर्रुखाबाद ससंदीय क्षेत्र से पंण्डित मूलचन्द्र दुबे कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में निर्वाचित हुए। वरिष्ठ विधिवेत्ता और समाज सेवी के रूप में उनकी अलग प्रतिष्ठा थी। उस समय तक लोकसभा और विधानसभा के चुनाव साथ-साथ होते थे। विधानसभा के लिए फर्रुखाबाद सदर सीट से ब्रजनंदनलाल वैरिस्टर साहब (इंग्लेंड में प्रथम प्रधानमंत्री पण्डित जवाहरलाल नेहरू के सहपाठी रहे) कांग्रेस प्रत्याशी थे। दो बैलों की जोड़ी तब कांग्रेस का चुनाव निशान था। तत्कालीन जनसंघ ने उस चुनाव में नारा दिया था- दुबे और वैरिस्टर, कांग्रेस के दो बूढ़े बैल। जो भी हो वैरिस्टर हार गए। पंडित मूलचन्द्र लगातार तीसरी बार चुनाव जीतकर सांसद बने। परन्तु एक वर्ष बाद ही उनका देहावसान हो गया।

मई 1963 के लोकसभा उपचुनाव ने फर्रुखाबाद को राष्ट्रीय ही नहीं अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध दिलाई। उपचुनाव में डा0 बालकृष्ण राव केशकर (पूर्व केन्द्रीय मंत्री) कांग्रेस प्रत्याशी थे। समाजवादी आंदोलन के पुरोधा डा0 राममनोहर लोहिया समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी थे। यह ऐतिहासिक चुनाव था। पंडित जवाहरलाल नेहरू को छोड़कर श्रीमती इन्दिरागांधी सहित कांग्रेस के लगभग सभी दिग्गज नेता कांग्रेस प्रत्याशी डा0 केशकर के चुनाव में प्रचार हेतु आए। वहीं लोकसभा के पूर्व चुनावों में फूलपुर संसदीय क्षेत्र (इलाहाबाद) में प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू को कड़ी टक्कर देकर चुनाव हारने वाले डा0 राममनोहर लोहिया के समर्थन में देश के हर कोने से समाजवादी आंदोलन से जुड़े विभिन्न दलों और संगठनों के नेता और कार्यकर्ता गली गांव मोहल्लों में पैदल, साइकिल और बैलगाड़ी से चुनाव प्रचार में लगे थे। एक तरफ साधनों की भरमार और सत्ता का सीमातीत अहंकार था। दूसरी ओर सत्ता प्रतिष्ठानों से टकराने, उन्हें ध्वस्त करने और जीतने का जुनून। उत्साह और सैद्धान्तिक प्रतिबद्धता के प्रति बेमिशाल समर्पण। इन्दौर के पूर्व सांसद कल्यान जैन शादी के दूसरे वर्ष में ही अपने तीन माह के पुत्र और पत्नी के साथ चुनाव प्रचार हेतु आए थे। उस चुनाव में क्षेत्र के लोगों से उनके जो रिश्ते बने। वह आज भी कायम हैं। इस चुनाव से सम्बन्धित ऐसे अनगिनत उदाहरण हैं। जनता ने सत्ता, धमकी, धौंस, दबाव, साधन, अहंकार सबको ठुकरा दिया। कांग्रेसी प्रत्याशी को बुरी तरह हरा कर डा0 लोहिया फर्रुखाबाद के सांसद बने। यह देश के पुष्पित पल्लवित जनतंत्र का स्मरणीय सोपान था।

इस उप चुनाव के परिणाम ने कांग्रेस और प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू को बुरी तरह हिला दिया। अजेय समझी जाने वाली कांग्रेस की केन्द्रीय सरकार के विरुद्व पहला अविश्वास प्रस्ताव डा0 लोहिया के संसद में पहुंचने पर ही प्रस्तुत किया जा सका। संसद में “तीन आने वनाम तेरह आने” की ऐतिहासिक लड़ाई ने डा0 लोहिया के चातुर्य अनुभव और जानकारी का लोहा पंडित जवाहरलाल नेहरू को स्वीकार करना पड़ा। ग्राम कंझाना मतदान केन्द्र पर कांग्रेस प्रत्याशी को एक भी वोट न मिलना तब जबर्दस्त चर्चा का विषय रहा। बीबीसी लंदन ने तो इस तथ्य को पूरी दुनिया में उजागर कर दिया। बी.बी.सी. संवाददाता चुनाव दौरान हिन्दुस्तान के वास्तविक लोकतंत्र का यह नजारा घूमघूम कर क्षेत्र भर में देखते रहे।

1967 के संसदीय चुनाव तक फर्रुखाबाद और कन्नौज दो अलग-अलग संसदीय क्षेत्र बन गए। फर्रुखाबाद से अबधेश चन्द्र सिंह और कन्नौज से डा0 राममनोहर लोहिया चुनाव जीते। चुनाव याचिका के चलते डा0 लोहिया की मृत्यु के बाद वरिष्ठ अधिवक्ता एस0एन0 मिश्रा कन्नौज के सांसद बने। 1977 में आपातकाल के बाद हुए चुनाव में अबधेशचन्द्र सिंह चुनाव हारे। भाजपा के दयाराम शाक्य लगातार 2 बार फर्रुखाबाद से सांसद बने। श्रीमती इंदिरागांधी की निर्मम हत्या के बाद हुए लोकसभा चुनाव में फर्रुखाबाद से वर्तमान सांसद और विधि मंत्री के पिता खुर्शीद आलम खां तथा कन्नौज से दिल्ली की वर्तमान मुख्यमंत्री श्रीमती शीला दीक्षित सांसद निर्वाचित हुईं। 1980 के लोकसभा चुनाव में छोटे सिंह यादव कन्नौज से चुनाव जीते। बाद में उन्हें शीला दीक्षित ने हराया और अगले चुनाव में श्री यादव ने शीला दीक्षित को हरा दिया।

1989 वोफोर्स तोप घोटाले और वी.पी. सिंह द्वारा छोड़े गए सत्ता व्यवस्था परिवर्तन के आंदोलन के चलते 1989 में हुए लोकसभा चुनाव में पत्रकार संतोष भारतीय सलमान खुर्शीद को हराकर फर्रुखाबाद के सांसद बने। 1991 में हुए चुनाव में संतोष भारतीय बुरी तरह हार गए और सलमान खुर्शीद सांसद बने और विदेश राज्यमंत्री बने। राम मंदिर बाबरी मस्जिद आंदोलन से सुर्खियों में आए डा0 सच्चिदानंद हरि साक्षी फर्रुखाबाद से लगातार दो बार भाजपा के प्रत्याशी के रूप में सांसद बने। बाद में सपा से राज्यसभा सदस्य बनकर घूमफिर कर पुनः भाजपा में आ गये हैं।

1996 में सलमान खुर्शीद को पराजित कर चन्द्रभूषण सिंह मुन्नूबाबू भाजपा छोड़कर समाजवादी पार्टी से सांसद बने। वह लगातार तीन चुनाव लड़े फर्रुखाबाद संसदीय क्षेत्र से दो बार जीते। परन्तु तीसरी बार अनुकूल परिस्थितियों के बाद भी वह केवल चुनाव हारे ही नहीं तीसरे स्थान पर पहुंच गए। इससे पूर्व वह कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में कन्नौज से 1989 में अपनी जमानत जप्त कराने के बाद में भाजपा प्रत्याशी के रूप में चुनाव जीते।

कन्नौज से छोटे सिंह यादव पुनः चुनाव जीते उसके बाद कन्नौज ने मुड़कर पीछे नहीं देखा। वहां से प्रदीप यादव, मुलायम सिंह यादव और वर्तमान में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव लगातार तीन बार चुनाव जीते। इसी माह मुख्यमंत्री बनने पर उन्होंने कन्नौज ससंदीय क्षेत्र से त्यागपत्र दिया है। उपचुनाव में युवा मुख्यमंत्री की पत्नी श्रीमती डिंपल यादव के सपा प्रत्याशी बनाए जाने की जोरदार चर्चायें हैं।

2009 के लोकसभा चुनाव में सपा प्रत्याशी मुन्नूबाबू को हराकर मौजूदा विधिमंत्री सलमान खुर्शीद दूसरी बार फर्रुखाबाद सांसद बने। इस प्रकार उनका लगभग 14 वर्ष का राजैनतिक बनवास समाप्त हुआ। अब 2014 या उससे पहले लोकसभा चुनाव की चर्चायें हैं। विधानसभा चुनाव की सफलता से उत्साह भरी समाजवादी पार्टी ने चुनाव हेतु आवेदन मांगने का काम प्रारंभ कर दिया है।

संसद में हमारे जिले (संयुक्त) और बाद में फर्रुखाबाद एवं कन्नौज का योगदान कम नहीं है। हमने कई मुख्यमंत्री केन्द्रीय मंत्री बनाए हैं। कई प्रख्यात दलबदलुओं को हमने सर आंखों पर बिठाया है और उन्हें फिर बुरी तरह दुत्कारा भी है। यहां का मतदाता खुला खेल फर्रुखाबादी की तर्ज पर बहुत ही जागरूक है। उससे गलती तभी होती है जब वह मतदान करने में आलस्य करता है। ससंद की साठ साला उपलब्धि के दिन हम किसी भी वर्तमान या पूर्व सांसद को आइना नहीं दिखाना चाहते। उन्होंने अपने हिसाब से अपनी पारी खेली है और खेल रहे हैं। हम तो संसद के साठ वर्ष पूरे होने पर देश प्रदेश और फर्रुखाबाद कन्नौज जिले के मतदाताओं को आइना दिखाना चाहते हैं। वह भी लोकतंत्र की जड़ों को मजबूत करने के पवित्र उद्देश्य से।

संसद के गठन में देश के हर वयस्क नागरिक का मतदाता के रूप में योगदान है। हमारा यह मानना है कि मतदाता जागरूक होकर यदि मतदान निष्पक्ष और निर्भीक होकर करे। हमारे लोकतंत्र का वट वृक्ष बराबर लोक हितैषी और मजबूत होता जाएगा। आप किसके पक्ष में मतदान करते हैं। यह जानने का अधिकार किसी को भी नहीं है। परन्तु आप निष्पक्ष और निर्भीक होकर मतदान करें। यह अनुरोध प्रत्येक मतदाता से करने का अधिकार प्रत्येक मतदाता को है। यही लोकतंत्र की सफलता का मूलमंत्र है। हर चुनाव में निष्पक्ष और निर्भीक होकर मतदान करने का संकल्प हमको आज करना चाहिए।

मतदाता बंधुओ! आप संसद के रखवालों को चुनकर शांत मत बैठ जाया करो। आप लोकतंत्र के रखवाले हैं। आपका सतत् निरंतर जागरूक रहना लोकतंत्र की मजबूती के लिए सबसे पहली और अनिवार्य शर्त है। मात्र स्मृति के आधार पर लिखे गए इस संदर्भ में हो गई किसी त्रुति के लिए क्षमा मांगते हुए आप से विनम्र अनुरोध है कि आने वाले चुनावों में अनिवार्य रूप से मतदान करने का संकल्प करते हुए कन्नौज और फर्रुखाबाद के आपके अपनी दृष्टि से सर्वश्रेष्ठ सांसद का नाम हमें अवश्य बतायें। जिससे आने वाले दिनों में हम आगामी लोकसभा चुनाव के संदर्भ में आपसे बात कर सकें। हमें निष्पक्ष और निर्भीक होकर बताइए कैसा सांसद चाहते हैं आप।

और आज ही मातृ दिवस भी है

तुम कहां हो मां!
जन्म दात्री मां
कहां जाकर बस गयी मां
कहां जाकर छुप गयी मां!
दे रहे तुमको बधाई आज सब
हर बधाई याद ले आई तुम्हारी
तुम कहां हो मां!
तुम बनी अस्तित्व का कारण हमारे
जन्म से पालने तक
पालने से ढालने तक
तुम रहीं प्रतिक्षण हमारे पास
लेकिन अब कहां हो मां!
बीतता जीवन
माह वर्ष और दिन
हम तुम्हारी याद में
बढ़ते रहे चलते रहे
आज जो कुछ पास है मेरे
तुम्हारी कृपा ममता प्यार का
परिणाम है मां!
कहीं भी हो तुम
कृपा तेरी प्यार तेरा
और अकूत ममत्व तेरा
तेरी धरोहर पास मेरे
यही देती सांत्वना और सहारा।
दया तेरी मान तेरा
प्रेम भरा वितान तेरा
छा गया सब ओर
कौन कहता तुम नहीं हो
पास मेरे मां!
ह्रदय की हर एक धड़कन
सांस की हर एक रुनझुन में बसी तुम
बांसुरी सी बज रही हो तुम,
तेरे ही सहारे चल रहे हैं हम।
दे रही तू भी बधाई
और आशीर्वाद
करती रोज तो संवाद
मां! जहां मैं हूं
यह मुझे सदा रहता है।
देती रहो सतत् प्रेरणा
प्यार और दुलार
है तेरा उपकार
सौ सौ बार
रोम रोम प्रसन्न मेरा
व्यक्त करता है
तुझे आभार
मां मुझे तुम याद रखना
मा मुझे तुम भूलना मत
छोड़ना मत बस यही मनुहार!

माननीयों के हिलते सिंहासन!

तेजी से दौड़ रहे जमाने के साथ बहुत कुछ बदल रहा है। किसी की उपस्थिति सांत्वना साहस और भरोसा बढ़ाती है आगे बढ़ने की राह दिखाती है। किसी को झूठी हंसी दिखाते हुए हताश निराश होकर लोग ढोते हैं। किसी में आसमान में सूराख करने का बुलंद हौसला है। कोई अपनी जड़ों को ही सुखा रहा है। नए जिलाधिकारी जी क्या आए लगा लू के गर्म थपेड़ों के बीच ठन्डी हवा का झोंका आ गया। अभी उन्हें बहुत समय नहीं हुआ है। परन्तु उनकी तेजी तर्रारी भरी पद्धति से तथा जन साधारण से सीधे जुड़ने के प्रयासों के चलते माननीयों के दरबारों में तरह-तरह की चर्चायें शुरू हो गईं हैं। इन्हीं चर्चाओं के चलते डीएम साहब के स्थानांतरण का शिगूफा दो तीन दिन चलकर शांत हो गया। लोगों ने हिम्मत नहीं हारी लगे रहो मुन्ना भाई की तर्ज पर काम जारी है। परन्तु हमारे सिस्टम में कुछ ऐसे मगरमच्छ हैं जिन्हें लहरें गिनने का भी काम मिल जाए। वह माल काटकर रख देंगे। डीएम साहब की कथित सख्ती के नाम पर तहसील से लेकर कलेक्ट्रेट तक और मुख्य विकास अधिकारी कार्यालय से लेकर प्रदेश सरकार के विभिन्न कार्यालयों में पत्रावलियों के चलने रुकने दौड़ने और निस्तारण तक में बढ़ी हुई दरों पर खेल शुरू हो गए हैं। डीएम साहब का एक दिन में दस कार्यालयों, विभागों को औचक छाया हो सकता है, सुधार नहीं। इसके लिए नजर पूरे सिस्टम पर रखनी होगी। परन्तु सुधार का काम एक तरफ से ही करना पड़ेगा।

आपको मार्ग दर्शन का हमारा कोई इरादा नहीं है। हम अपने आपको इसका अधिकारी भी नहीं मानते। परन्तु एक जागरूक नागरिक के नाते अपनी बात निस्वार्थ भाव से आप तक पहुंचाना हमारा अधिकार भी है और कर्तव्य भी है। आपकी कार्यपद्धति से उत्साहित होकर जनसाधारण के माध्यम से आपके पास प्रतिदिन अच्छी खासी संख्या में शिकायतें आती हैं। सबसे पहले उस विभाग की कम्पलीट ओवर हालिंग करिए जिसकी शिकायतों की संख्या सबसे ज्यादा हो। जब इस विभाग की शिकायतों की संख्या में कमी आने लगे समझ लीजिए विभाग की कार्यपद्धति में सुधार हो रहा है। विभिन्न विभागाध्यक्षों को भी यही प्रक्रिया अपनाने के निर्देश दीजिए। सच मानिए जनता के बीच से आपको संदेश मिलने लगेगा कि सुधार हो रहा है। सही निर्णायक भी जनता ही है। माननीयों को आश्वासन बांटने दीजिए। चमचों और अभिनंदन कार्यकर्ताओं को मनमाने टेंडर कोटे और लाइसेंस दिलवाने में लगा रहने दीजिए। वह प्रतिनिधि हैं आप जनसेवक हैं। उन्हें चुनाव लड़ना है उनकी मजबूरियां हो सकती हैं। परन्तु आपका नफा नुकसान यश अपयश आपकी कार्य पद्धति पर निर्भर करता है। लेकिन क्षमा करें एक बात और – आप कर्मठ हैं, निर्भीक हैं, ईमानदार हैं, सुधार की ललक भी आप में है। यह आपके आभूषण हैं। परन्तु इसके चलते यह भ्रम कभी मत पालिये कि बाकी सब लोग गलत हैं, भ्रष्ट हैं, बेईमान हैं। अपनी कार्यपद्धति से जनसाधारण को राहत मिले यही आपकी सफलता की कसौटी है। इस कसौटी पर जितना खरा उतरेंगे सफलता की सीढ़ियों पर उतनी ही तेजी से बढ़ते जायेंगे। जनसेवा में ट्रांसफर पोस्टिंग की परवाह भी नहीं करना चाहिए। आप न्यूनतम पूरे तीन साल यहां रहें और अपने मिशन को पूरा करें।

और अंत में…………………….

प्रदेश सरकार का एक बहुत ही कमाऊ विभाग है। यह विभाग अरबों रुपयों का राजस्व जुटाता है। इसमें कार्यरत छोटे से लेकर बड़ा अधिकारी तक लाखों से करोड़ों तक की काली कमाई करता है। इस विभाग में एक प्रतिष्ठान के विरुद्व सवा तीन लाख रुपये का कर निर्धारण शत प्रतिशत विधि विरुद्व और नियम विरुद्व ढंग से किया गया है। सब कुछ आइने की तरह साफ है। वसूली के लिए कार्यवाही तहसील में भेज दी गई है। अमीन से लेकर तहसीलदार तक दबाव बनाए हैं। पैसा जमा करिए डीएम साहब बहुत सख्त हैं। प्रतिष्ठान के स्वामी ने आदेश में संशोधन के लिए विधि सम्मत प्रार्थनापत्र दिया है। अधिकारी प्रार्थनापत्र का निस्तारण इसलिए नहीं कर रहे हैं कि ऐसा करने पर वसूली रोकनी पड़ेगी और डीएम साहब बहुत संख्त हैं। यह मामला बिल्कुल सही है और इसमें कोई भी बात गलत साबित होने पर हम बड़ी से बड़ी सजा भुगतने को तैयार हैं। डी.एम. साहब की कथित सख्ती के नाम पर एक निर्दोष व्यक्ति का जबर्दस्त उत्पीड़न हो रहा है। यह एसिड टेस्ट है- इस मामले को देखिए यदि इसमें विधि सम्मत नियमानुसार कार्यवाही हो गई तब फिर पूरी तहसील और सम्बंधित विभाग द्वारा डी.एम. साहब की कथित सख्ती के नाम पर जनसाधारण के आए दिन होने वाले उत्पीड़न पर तत्काल रोक लग जायेगी।

चलते-चलते – क्या फिर सौदा कर लिया नेता जी!

बढ़पुर विकासखण्ड के ब्लाक प्रमुख के विरुद्व अविश्वास प्रस्ताव आ गया। राजेपुर मोहम्मदाबाद, कायमगंज, शमशाबाद, नबावगंज विकासखण्डों में जोड़ तोड़ जारी है। कमालगंज हमेशा कमाल करता है। यहां क्षेत्र पंचायत सदस्यों को गोवा की सैर कराके निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में ब्लाक प्रमुख बने सज्जन पाला बदल चुके हैं। इसलिए फिलहाल ऊपर कोई खतरा नहीं है। वैसे भी उनके परिवार का कोई ठिकाना नहीं कि वह कब सपाई, बसपाई, कांग्रेसी या निर्दलीय हो जाएं। पूरे सूबे में सपा की थू थू कराने वाले बसपाई जिला पंचायत अध्यक्ष इसी परिवार से हैं। सब विकास खण्डों में हलचल है। परन्तु जिला पंचायत अध्यक्ष के विरुद्व अविश्वास प्रस्ताव को लेकर बड़े से बड़े सपाई की बोलती बंद है। बसपाई जिला पंचायत अध्यक्षों को पैदल करने का अभियान पूरे प्रदेश में चल रहा है। परन्तु डा0 राममनोहर लोहिया की कर्मभूमि के सपाई पार्टी के माथे पर लगे कलंक को मिटाने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं। अब तो जनता के बीच के लोग भी बसपा मानसिकता के अधिकारियों को सुधरने की धमकी देने वाले सपा के दिग्गज नेताओं से जिला पंचायत अध्यक्ष के प्रकरण को लेकर पूछने लगे हैं। क्या बात है नेता जी क्या फिर से सौदा हो गया। जय हिन्द………………..

सतीश दीक्षित
एडवोकेट
1/432 शिवसुन्दरी सदन
लोहिया पुरम आवास विकास
कालोनी बढ़पुर- फर्रुखाबाद