Featured Posts

बहुत जल्द कुछ लोगो को जेल भेजने की तैयारी: धर्मपाल सिंहबहुत जल्द कुछ लोगो को जेल भेजने की तैयारी: धर्मपाल सिंह फर्रुखाबाद: जिले में आये प्रदेश सरकार के सिचाई मंत्री ने योगी सरकार की मंशा को साफ़ किया और कहा कि योगी सरकार जल्द से जल्द माफिया मुक्त शासन देगी| जो लोग जादा अराजकता फैला रहे है उनकी जगह बहुत जल्द जेल में होगी| उन्होंने इस सम्बन्ध में जिलाधिकारी व एसपी को निर्देश भी दे दिये...

Read more

सांसद मुकेश पर लगा महिला को बहला-फुसलाकर शादी करने का आरोपसांसद मुकेश पर लगा महिला को बहला-फुसलाकर शादी करने का आरोप फर्रुखाबाद: शहर कोतवाली क्षेत्र के मोहल्ला लिंजीगंज निवासी एक युवक ने सांसद मुकेश राजपूत पर बीते दस वर्ष पूर्व उसकी पत्नी को बहला-फुसला कर विवाह कर लेने का आरोप लगाया और अफसरों से लिखित में शिकायत की| पीड़ित ने डीएनए टेस्ट कराये जाने की मांग भी की है| वही सांसद ने पूरे मामले...

Read more

राजकुमारी के विरोध में ज्ञानदेवी ने किया नामांकनराजकुमारी के विरोध में ज्ञानदेवी ने किया नामांकन फर्रुखाबाद: बीजेपी सांसद मुकेश राजपूत के चालक कल्लू कठेरिया की पत्नी राजकुमारी से पहले सपा समर्थित ज्ञानदेवी कठेरिया ने अपना नामांकन दाखिल कर दिया| जिससे अब दोनों में कांटे की टक्कर होने की सम्भावना बन गयी है| जिलाधिकारी न्यायालय में सपा प्रत्याशी ज्ञानदेवी के साथ...

Read more

दिल्ली के कारीगरों ने शिव को दिया बाबा बर्फानी का रूपदिल्ली के कारीगरों ने शिव को दिया बाबा बर्फानी का रूप फर्रुखाबाद:(कंपिल) देश-विदेश में अपने पौराणिक इतिहास के लिये जाना जाने वाला कंपिल नगर भगबान कृष्ण के जन्मोत्सव पर दुल्हन के रूप में नजर आया| जंहा मन्दिरो की विभिन्य मूर्तियों का विशेश श्रंगार किया गया| जिसको देखने के लिये दूर-दराज से भीड़ उमड़ी| बीते मंगलवार को श्रीकृष्ण...

Read more

प्रभागीय निदेशक सामाजिक वानिकी ने किया पौधारोपणप्रभागीय निदेशक सामाजिक वानिकी ने किया पौधारोपण फ़र्रुख़ाबाद:(कम्पिल) जिलाधिकारी रविंद्र कुमार की पत्नी प्रभागीय निदेशक सामाजिक वानिकी दीक्षा भण्डारी ने स्वतंत्रता दिवस पर पौधारोपण कर लोगो को पौधा रोपण के लिये जागरूक किया| कस्बा के रुदायन मार्ग पर वन विभाग के अफसरों ने पौधारोपण की तैयारी की| इसके साथ ही साथ मौके पर...

Read more

जरा याद करो कुर्बानी: अंग्रेज पुलिस अधीक्षक फतेहगढ़ व दरोगा सहित पिपरगांव में गिरी थी चार लाशेंजरा याद करो कुर्बानी: अंग्रेज पुलिस अधीक्षक फतेहगढ़ व दरोगा... फर्रुखाबाद:(दीपक शुक्ला) 81 साल बाद आज भी गांव के लोग जब उस खून से लाल जमीन को याद करते है तो उनके रोगटे खड़े हो जाते है| गांव में जब भी ब्रिटिश हुकूमत की बात शुरू होती है तो लोग 1936 में गांव में हुए पुलिस अधीक्षक फतेहगढ़ की हत्या की घटना को याद कर बैठते है| आखिर क्या हुआ था उस दिन मोहम्दाबाद...

Read more

अविश्वास प्रस्ताव में चली गयी सगुना की कुर्सीअविश्वास प्रस्ताव में चली गयी सगुना की कुर्सी फर्रुखाबाद: जिला पंचायत अध्यक्ष सगुना देवी के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव आने के बाद गुरुवार को एक बजे तक 21 जिला पंचायत सदस्यों ने अपना अविश्वास सगुना देवी में दिखा दिया| सगुना के पक्ष वाले 8 जिला पंचायत सदस्य उनके पक्ष में हाथ उठाने नही पंहुचे| अविश्वास लाने वाले जिला पंचायत...

Read more

राजेपुर ब्लाक प्रमुख सुबोध यादव सहित उनके 26 साथियों पर मुकदमा दर्जराजेपुर ब्लाक प्रमुख सुबोध यादव सहित उनके 26 साथियों पर मुकदमा... फर्रुखाबाद: ब्लाक प्रमुखी में अविश्वास प्रस्ताव लाने के प्रयास में लगे बीजेपी नेता को धमकाने के मामले में पुलिस ने राजेपुर ब्लाक प्रमुख सुबोध यादव व उनके 26 साथियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। वहीं बीजेपी नेता को पुलिस सुरक्षा दी गयी है। थाना क्षेत्र के...

Read more

अविश्वास प्रस्ताव- बिना दूल्हे की बारात में दहेज़ पर मसक्कत, सगुना ही रहेगी अध्यक्षा!अविश्वास प्रस्ताव- बिना दूल्हे की बारात में दहेज़ पर मसक्कत,... फर्रुखाबाद: जिला पंचायत में अध्यक्षा के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव बड़े ही ढोल पीट कर दे दिया गया है| मगर अगर अविश्वास प्रस्ताव आ गया तो अगला अध्यक्ष कौन बनेगा? अनुसूचित जाति की महिला के लिए आरक्षित सीट है और दावेदार केवल पांच| एक वर्तमान में अध्यक्षा है और बाकी के चार के लिए...

Read more

आप संडे की छुट्टी मना रहे हैं, वहां योगी ने ले लिया बेहद सनसनीखेज फैसला, पूरे यूपी में मचा तहलकाआप संडे की छुट्टी मना रहे हैं, वहां योगी ने ले लिया बेहद सनसनीखेज... लखनऊ : उत्तर प्रदेश को अब उत्तम प्रदेश बनने से कोई नहीं रोक सकता, ऐसा हम नहीं कह रहे हैं बल्कि ऐसा तो आप खुद कहेंगे इस बेहद सनसनीखेज खबर को पढ़ने के बाद. सीएम योगी प्रदेश में कानूनों का सही तरीके से पालन हो इसके लिए कोई कोर-कसर नहीं छोड़ रहे हैं और अब इसी सिलसिले में योगी सरकार...

Read more

उस स्याह रात का मंजर जब हत्यारो ने मौत के घाट उतार दिया ब्रह्मदत्त द्विवेदी को

Comments Off on उस स्याह रात का मंजर जब हत्यारो ने मौत के घाट उतार दिया ब्रह्मदत्त द्विवेदी को

Posted on : 26-05-2017 | By : JNI-Desk | In : CRIME, EDITORIALS, FARRUKHABAD NEWS, Politics, Politics-BJP

फर्रुखाबाद: प्रदेश में राष्ट्रपति शासन था| रोमेश भंडारी राज्यपाल थे| बसपा और भाजपा में 6-6 महीने मुख्यमंत्री बनाकर सरकार बनाने के फार्मूले पर लखनऊ में बैठको का दौर चल रहा था| फार्मूले की अगुआई स्व ब्रह्मदत्त द्विवेदी कर रहे थे| वही समझौते का फार्मूला लेकर मायावती के पास आ-जा रहे थे| बताते है कि मायावती सिर्फ एक शर्त पर इस फार्मूले पर राजी थी कि भाजपा की पारी में सिर्फ ब्रह्मदत्त द्विवेदी मुख्यमंत्री बने| कल्याण सिंह के नाम पर मायावती नाक भौ सिकोड़ रही थी| इसी बीच प्रदेश के कद्दावर भाजपा नेता की हत्या कर दी गयी| पक्ष हो या विपक्ष जनता भी मानती है कि अगर ब्रह्मदत्त द्विवेदी आज जिन्दा होते तो फर्रुखाबाद की विकास के रास्ते पर चलते हुए तस्वीर ही बदल जाती| मगर समय और नियति के आगे किसी की नहीं चलती| 17 साल बीत जाने के बाद भी याद करने पर उस काली रात का मंजर दिलो में सिहरन पैदा कर देता है|

लोहाई रोड के जिस मकान के बाहर ब्रह्मदत्त द्विवेदी की हत्या हुई थी वहाँ हर साल 10 फरवरी को उनकी याद में पुष्पांजलि और मशाल जलती है| अपने दोस्त रामजी अग्रवाल के भतीजे के तिलक में शामिल होने के लिए द्विवेदी पहुचे थे| एक गनर ब्रजकिशोर मिश्र और ड्राइवर के साथ| लगभग 11.30 से 12 बजे के बीच का समय था| सर्दी की रात में कार्यक्रम समापन की और हो चला था| द्विवेदी जी वापस घर जाने के लिए निकले ऊँचे मकान की सीड़ियो से उतरने के बाद अपनी कार तक पहुचे| खिड़की खोल कर बैठ गए| कार के शीशे खुले हुए थे| रामजी अग्रवाल उनका भतीजा और परिवार के अन्य सदस्य अपने मकान के गेट तक उन्हें छोड़ने के लिए आये थे और उनकी गाड़ी के रवाना होने का इन्तजार कर रहे थे| गनर गाड़ी के बाहर खड़ा था| तभी उनकी कार के चारो और से घेर कर फायरिंग होने लगी| लाबड़तोड़ गोलियां चली| ब्रह्मदत्त द्विवेदी और गनर बृजकिशोर सहित ड्राईवर और रामजी अग्रवाल के भतीजे के भी गोली लगी| बताते है कि दरवाजे पर खड़े लोग अपनी जान बचाने को घर में छुप गए| सड़क पर सन्नाटा हो गया| ऊपरी मंजिल की बालकनी या छत पर खड़े मनोज अग्रवाल ने अपनी पिस्तौल निकाल गोली चलाई| ऊंचाई और दूरी के कारण शायद पिस्तौल स्वचालित हथियारो के आगे नाकाम साबित हो रही थी| मगर फिर भी हिम्मत की गयी| मगर सब बेकार गया| दुर्दांत हत्यारे अपने मकसद में कामयाब हो गए| लगभग 20 से 25 मिनट तक पूरे लोहाई रोड सन्नाटा|

घटना के कुछ समय बीत जाने के बाद आखिर फिर हिम्मत जुटाकर वापस लोग जुटे और रामजी अग्रवाल के भतीजे की टाटा सूमो में द्विवेदी जी को लिटाकर पहले डॉ जितेन्द्र कटियार के नर्सिंग होम जो चंद कदमो कि दूरी पर था वहाँ लाया गया| मगर डॉ जितेन्द्र कटियार का दरवाजा नहीं खुला तो आनन् फानन में बढ़पुर स्थित डॉ एन सी जैन के नर्सिंग होम में लाया गया| जहाँ उन्हें डॉ जैन ने मृत घोषित कर दिया| एक विकास का दिया बुझ चुका था| प्रभुदत्त, सुधांशु, डॉ हरिदत्त कोई कुछ भी बोलने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा था| यकीन नहीं कर पा रहा था कि उनका कोई करीबी इस तरह दुनिया से विदा हो जायेगा| गनेश दुबे, सदानंद शुक्ल, स्व बागीश अग्निहोत्री, राम चन्द्र कुशवाहा, मोती लाल गुप्ता, अजय पाराशर, अयोध्या प्रकाश सिंह जैसे तमाम चेहरे जैन अस्पताल के बाहर मौजूद थे| मोबाइल का जमाना नहीं था| बेसिक फोन से जहाँ तक सूचना पहुचती दो चार को लोग बताते और अस्पताल की ओर दौड़ पड़ते| मंजुल दुनिया से विदा हो चुका था| खामोश चेहरा, बंद आँखे और शांत शरीर जीवन के अंतिम पड़ाव की तस्वीर साफ़ थी मगर यकीन फिर भी नहीं हो रहा था| लोग शव देखने के बाद भी इशारो इशारो में एक दूसरे से पूछ कर पुष्टि कर लेना चाहते थे कि क्या उनका नेता क्या बाकई चला गया!

प्रशासन से लेकर पुलिस तक खामोश थी| जिलाधिकारी अरविन्द कुमार, पुलिस अधीक्षक अखिलेश मल्होत्रा, अपर पुलिस अधीक्षक एस एन सिंह, कोतवाल ओपी शर्मा सब डॉ जैन के अस्पताल पहुचे| पुलिस अधीक्षक ने डीजीपी और डीआईजी को सूचना दी| जिलाधिकारी ने फोन पर कमिश्नर कानपुर को द्विवेदी जी की हत्या की सूचना दी| लोग पीसीओ खोजने में लगे थे| सूचना देने के लिए बेसिक फोन तलाश किये जा रहे थे| खबरनवीसों में अखबारो के पत्रकार सक्रिय हो चुके थे| तब टीवी का जमाना नहीं था| रेडियो पर समाचार प्रमोद कुदेसिया ने प्रसारित करवाया| सत्यमोहन पाण्डेय अपने कार्यालय में समाचार भेजने में लगे थे| मगर शहर ख़ामोशी से सो रहा था|
घटना स्थल पर स्वर्गीय द्विवेदी की कार खड़ी थी| पुलिस जांच पड़ताल में लगी थी| रात सुबह की और बढ़ रही थी और भाजपा कार्यकर्ता जैन अस्पताल पहुँच रहे थे| द्विवेदी परिवार के सभी सदस्य यहाँ मौजूद थे| ब्रह्मदत्त द्विवेदी की पत्नी स्व प्रभा द्विवेदी और उनके पुत्र मेजर सुनील द्विवेदी सुबह 4/5 बजे के आसपास लखनऊ से फर्रुखाबाद पहुच चुके थे| दोनों लोग उस दिन लखनऊ में ही थे| हर चेहरा उदास और शांत| कोई कुछ बोलने की स्थिति में नहीं था| यह पहली बार देखा था जब हर कार्यकर्त्ता दिल से दुखी दिखा|

साक्षी महाराज उस दिन अनन्त होटल में थे| साक्षी महाराज ने राम नगरिया के बड़े क्षेत्र में अपना पंडाल लगाकर उसी दिन भागवत कथा शुरू की थी जिस रात यह घटना हुई| साक्षी जी भी जैन अस्पताल पहुंचे थे| हर शख्स की पूरी रात जागते ही कट गयी और शव पोस्टमार्टम के लिए फतेहगढ़ ले जाया गया| अब रिटायर हो चुके कन्हैया ने ही पोस्ट मार्टम किया था| पोस्टमार्टम हाउस का वह मंजर पहली बार दिखा था| जहाँ धर्म, जाति और दलीय सीमाएं टूट गई थीं| ऐसी भीड़ पहली बार देखी गयी थी| पूरे पोस्टमार्टम के दौरान भीड़ बढ़ती रही| जो आ जाता वो रुक जाता था| साक्षी, उर्मिला भी पहुंचे थे| पोस्टमार्टम के बाद शव को पहले ब्रह्मदत्त द्विवेदी के घर पर लाया गया| उसके बाद दिन में लोगों के अंतिम दर्शनार्थ भारतीय पाठशाला ले जाया गया| ऍफ़आईआर हो चुकी थी| एक नामजद और 3-4 अज्ञात में मुकदमा कोतवाली में लिखा जा चुका था| सुबह दोपहर की और बढ़ रही थी| पूरी भारतीय जनता पार्टी फर्रुखाबाद में पहुच रही थी| पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपयी, लालकृष्ण अडवाणी, विनय कटियार, प्रेमलता कटियार, लालजी टंडन, कलराज मिश्र से लेकर हर नामी भाजपाई चेहरा फर्रुखाबाद पहुच रहा था| मगर मायावती और कल्याण सिंह नयी आये| आम जनता में सुबह जब लोग घर से निकलते तो खबर मिलती और जिसे जैसा साधन मिलता वो सेनापत स्ट्रीट पहुच रहा था| नेहरू रोड उस जमाने में जाम की स्थिति में पहुच चुका था|

आकंठ तक भ्रष्टाचार में डूबे जेल प्रशासन में ये तो होना ही है…….

Comments Off on आकंठ तक भ्रष्टाचार में डूबे जेल प्रशासन में ये तो होना ही है…….

Posted on : 26-03-2017 | By : पंकज दीक्षित | In : EDITORIALS, FARRUKHABAD NEWS

पोशम्पा भाई पोशम्पा, डाकिये ने घडी चुराई, अब तो जेल में जाना पड़ेगा, जेल की रोटी खाना पड़ेगा, जेल का पानी पीना पड़ेगा…. बचपन के खेल में कहीं न कहीं सत्य का आभास कराया जाता रहा है| मगर शायद प्रशासनिक अफसरों की आँख का पानी मर गया है इसलिए उन्हें इस बात की भी चिंता नहीं कि उनके खुद के बच्चे भी सवाल पूछ सकते है कि “क्या पापा जेल की रोटी और पानी ख़राब होता है?” और ख़राब होता है तो क्यों? और आप तो जिले के बड़े अफसर हो| जेल में निरीक्षण करते रहते हो| क्या आपको भी उसके खराब होने का हिस्सा मिलता है?

बड़ा प्रासंगिक सवाल है| रिश्वतखोर होना आज के जमाने में एक एडवांस कल्चर का भाग है या फिर बेशर्मी की हद| जेल में खाना ख़राब क्यों? जबकि बजट शारीरिक जरूरतों और सेहत के पैमाने के हिसाब से टैक्सपेयर के पैसे से बनाया जाता है| अस्पताल में इलाज का अभाव क्यों? दवा का बजट तो ठीक ठाक है| 31 मार्च को जिले के अफसर एक ही दिन में लाखो करोडो क्यों और कैसे ऊपर का कमा लेते है इस बात में ही जेल की खराब दाल रोटी और दवा के अभाव का राज छिपा होता है| जानते सब है| जो जेल में कर रहे है वे भी और जिन्हें जेल की निगरानी का जिम्मा दिया गया है वे भी, मगर काल्पनिक संतुष्टि के चलते मानने को तैयार नहीं|

वैसे जेल में जो सक्षम परिवार के लोग बन्द है वे तो जेल की रोटी दाल भी नहीं खाते| उनके लिए तो जेल से बाहर रोज का खाना आता है| उनके हिस्से का राशन तो अफसरों को खाने को मिल ही रहा है| जो गरीब जेल में बन्द होता है उसके हिस्से का भी राशन खा जाना “डोम’ (डोम- मृत्यु के समय मुर्दे से उसके जलने का टैक्स वसूलने वाला) होने से कम नहीं| गरीब होना ही सबसे बड़ा अभिशाप है| पुलिस भी सबसे पहले उसे ही पकड़ कर अंदर कर महीनों से गैर खुलासे हुए केस खोल कर उस पर लाद कर अपनी नौकरी बचा लेती है|

तो फर्रुखाबाद की जेल में कोई पहली बार आक्रोशित उपद्रव नहीं हुआ है| कभी केंद्रीय कारागार में तो कभी जिला जेल में| जहाँ मुलाकात से लेकर मोबाइल से बात करने की वसूली का खेल चलता हो| जहाँ प्रति माह चूना डाल कर औचक निरीक्षण कर अफसर अपनी नौकरी पूरी करते रहे हो| वहां जेल में आंदोलन हो जाना, दो चार के सर फूट जाना कोई खास खबर नहीं है| खास खबर तो तब होगी जब ऐसा होना बन्द हो जायेगा| सरकार बदली है….. सरकारी अफसर और तंत्र वही है…… अगली घटना होने पर जारी….

रिश्वत वसूली ऊपर वाले के लिए करनी पड़ती है…

Comments Off on रिश्वत वसूली ऊपर वाले के लिए करनी पड़ती है…

Posted on : 22-03-2017 | By : पंकज दीक्षित | In : EDITORIALS, FARRUKHABAD NEWS

भाई साहब फाइल पर साहब का अप्र्रोवल लेना है खर्चा दो| दफ्तर के बाबू ने बड़ी शालीनता से ठेकेदार से रिश्वत की मांग अपने साहब के लिए कर दी| साथ ही ठेकेदार पर एहसान भी लाद दिया, आप तो घर के आदमी है मुझे कुछ नहीं चाहिए| रिश्वत कोई अपने लिए नहीं वसूलता है यहाँ सब ऊपर वाले के लिए रिश्वत लेते है| लेखपाल, वीडीओ, दफ्तरों के बाबू, कचहरी से लेकर म्युनिसिपल कारपोरेशन तक में हर कोई ऊपर वाले लिए रिश्वत वसूल रहा है| बाबू ने साहब के लिए, और साहब ने बड़े साहब के लिए, बड़े साहब ने अपने से ऊपर के लिए| यही व्यवस्था कहकर आम जनता से रिश्वत वसूलने का चला है| सिपाही, लेखपाल, वीडीओ, बाबू, ये सब ऊपर वाले के लिए रिश्वत लेते है और मजे हुए सेल्समेन की तरह रिश्वत की बारीकियां समझा कर सकल घरेलु रिश्वत में लगातार महगाई दर बढ़ने के अनुपात में इजाफा करते रहते है| बड़े बाबू ने चश्मा आँखों पर लगाया, ठेकेदार से मिले हुए रुपये गिने और दराज में सरकाए फिर ठेकेदार की ओर देख कर दुख साझा करते हुए कहा- अब तो अंग्रेजो के भारत से जाने के बाद ही कुछ बदल सकता है|

सब कुछ जानते हुए भी बड़े उत्सुकता भाव से ठेकेदार ने पूछा ट्रेजरी में भी देना पड़ता है| हाँ भाई ………(गाली निकलते हुए) बिना लिए फाइल अप्रूव कहा करते है| कोई न कोई कुइरी/नुक्ता लगा देंगे| ठेकेदार ने भी कुटिल भाव से पुछा उसके बाद फाइल कहाँ जाएगी| ट्रेजरी के बाद कलेक्टर साहब के पास जाएगी| मतलब कलेक्टर का भी देना होगा? मगर इस काम में कलेक्टर का तो कोई रोल नहीं है| हाँ भाई साहब यही तो रोना है, घाघ बाबू ने ठेकेदार के साथ सुहानुभूति दिखाते हुए कहा- जिले में कोई भुगतान हो कलेक्टर का तो जाता ही है| तो कुल मिलाकर तुम्हे क्या बचता है| ठेकेदार ने बड़े बाबू के साथ कुटिल सुहानुभूति दिखाते हुए पूछ ही लिया कि ख़ामो खाम ही तुम लोग (निचले स्तर के सरकारी कर्मी) बदनाम होते हो|

बड़े बाबू ने बगल की कुर्सी खीच कर ठेकेदार को अपने पास में बैठाते हुए कान में बताया …………. (गाली देते हुए) इसलिए कभी जिले में नए आये कलेक्टर और कप्तान साहब को कभी यह कहते हुए सुना कि उनके कार्यकाल में कोई रिश्वत नहीं लेगा| कोई नहीं कहता| सिस्टम बन गया है| इमानदार से इमानदार कलेक्टर भी मोटा माल ऊपर के कमा लेता है| अब तो अग्रवाल साहब इन्तजार करो आजादी का… जाने ससुरी कब मिलेगी|

शाम तक दफ्तर में बड़े बाबू ने 10 फाइल निपटाई| दोपहर बाद साहब अपने केबिन में आये तो फाइलों के साथ बड़े बाबू साहब के कमरे में पंहुचा और साहब का हिस्सा गिन दिया| साहब के हिसाब में एक फाइल के पैसे कम थे| तो साहब ने आँखे तरेरी| कितनी फाइल है| साहब 10 है मगर एक की सिफारिश थी| बड़े बाबू को वर्षांत के अंत में आज कुछ ठीक ठाक हिस्सा मिल गया था| पांच बजते ही बड़े बाबू ने छाता झोला उठाया और घर की ओर चल पड़े| सुनसान सड़क पर कुछ देर आगे ही तमंचे के साथ मुह पर कपडा बांधे गुंडों ने घेर लिया| बड़े बाबू का झोला छीनने लगे| बड़े बाबू ने प्रतिशोध किया तो गुंडे ने एक जोरदार घूँसा मुह पर जड़ दिया| बड़े बाबू चिलाये…. बचाओ मार डाला|

रसोईघर से हाथ में चिमटा लिए बबुआइन कमरे की ओर दौड़ी …… अरे किसने मार डाला| देर तक सोयेंगे और नींद में भी बड़बड़ाएगे| बड़े बाबू बिस्तर के नीचे पड़े थे| माल कमाकर लौट रहे थे, गुंडों ने सपना तोड़ दिया था| 6 बज चुके थे, साहब ने जल्दी आने को कहा था| जल्दी जल्दी तैयार हुए और सोच रहे थे कि कहीं आज दफ्तर से लौटते समय बाकई गुंडे मिल गए तो…….

भर दी झोली वोटरों ने, उम्मीद पर खरे होकर दिखाओ….

1

Posted on : 11-03-2017 | By : पंकज दीक्षित | In : EDITORIALS, Election-2017, FARRUKHABAD NEWS

फर्रुखाबाद: 2017 के चुनाव में वोटरों ने भाजपा की झोली उम्मीद से ज्यादा ही भर दी है इस उम्मीद के साथ कि जो कहा है कर के दिखाओ| न भ्रष्टाचार न गुंडाराज के होल्डिंग से शुरू हुआ चुनाव जैसे जैसे परवान चढ़ा नरेंद्र मोदी ने वोटरों की उम्मीदे जगा दी| जनता ने ख्वाव देखा कि भाजपा सरकार आते ही रिश्वतखोरी बंद हो जाएगी| अवैध जमीन कब्जे बन्द हो जायेंगे| गरीब को भी इन्साफ मिल जायेगा| आधी रात को भी माँ बहनो के लिए सड़क परनिर्भय होकर निकलना अब हो जायेगा| कोई सरकारी कर्मचारी और अफसर अब रिश्वत के बिना काम करेगा| सपने तो बहुत से मोदी ने पाल दिए है उन्हें पूरा करने की जिम्मेदारी कौन निभाएगा अब सवाल खड़ा होगा| अगर खरे न उतरे तो फिर वही होगा जो इस बार हुआ है|
फर्रुखाबाद की जनता ने विजय सिंह, नरेंद्र सिंह यादव, जमालुदीन सिद्दीकी के पुत्र अरशद जमाल, मनोज अग्रवाल, उमर खान, सुरभि गंगवार को नकार मेजर सुनील, सुशील शाक्य, नागेन्द्र सिंह और अमर सिंह को सर पर बैठाया है| मगर जिन्हें जिताया है उनके भी रिकॉर्ड में कोई उपलब्धि नहीं है केवल मोदी के कहने पर जिताया है| ये मोदी की लहर का चुनाव था, भ्रष्टाचार और गुंडाराज के खिलाफ चुनाव था| इसमें कोई शक नहीं| उपलब्धि अब इन जीते हुए प्रत्याशियो को बनानी है अपने राजनैतिक भविष्य के लिए वार्ना कितने ही विधायक एक बार चुनाव जीत हाशिये पर जा चुके है| अगर मोदी ने कहा है कि न खाऊंगा और न खाने दूंगा तो जनता ने उन्हें पसंद कर लिए| भरोसा भी कर लिया| क्या यही भरोसा फर्रुखाबाद के चारो जीते हुए भाजपा प्रत्याशी जनता को दिल पायेंगे| ये वो सवाल है जिस पर वोपक्ष की नजर 5 साल रहेगी|

इसमें कोई दो राय नहीं कि यूपी की जनता परिवर्तन चाहती थी| जमीनी हकीकत कुछ और थी और मुख्यमंत्री अखिलेश तक पहुची रिपोर्ट कुछ और| मुख्यमंत्री के साथ फोटो खिंचाने वाले उन्ही फोटो की दम पर पुलिस और प्रशासन पर हनक बनाते और अवैध कब्जे और अवैध खनन में लगे थे| उसी हनक पर विरोधियो पर सरकारी तरीको से अत्याचार कराते रहे| जनता वास्तव में भ्रष्टाचार और गुंडाराज से त्रस्त थी और मोदी ने इसे कैश कर लिया| ये राजनीती है, दाव चलने और बिसात बिछाने में माहिर खिलाड़ी ही इसके विजेता बनते है| जनता तो बस उम्मीद में जीती है| साल दर साल उम्मीद में काटती जाती है| तो उम्मीद कितनी पूरी होती है इसकी बानगी भी कुछ दिनों में दिखने लगेगी| सवाल फिर से खड़े होंगे कि भाजपा की झोली तो भर दी है अब गरीब और मजबूर की बारी है…….

राजनीति का खंजर- “केवल चार बचेंगे”

Comments Off on राजनीति का खंजर- “केवल चार बचेंगे”

Posted on : 18-02-2017 | By : पंकज दीक्षित | In : EDITORIALS, Election-2017, FARRUKHABAD NEWS

पांच साल तक नेताओ के हाथ में रहने वाला राजनैतिक खंजर एक दिन मतदाताओ के हाथ में रहता है| मतदान के दिन ये खंजर किस किस पर कैसे कैसे चलेगा ये वोटिंग मशीन में ही गुप्त रूप से दर्ज हो जायेगा| बात उत्तर प्रदेश के आम विधानसभा चुनाव 2017 के जनपद फर्रुखाबाद की चार विधानसभाओ के परिपेक्ष्य में है| लिहाजा केवल चार बचेंगे और बाकी सब प्रत्याशी राजनीति के खंजर से घायल हो मैदान से बाहर हो जायेंगे| लोकतंत्र के पवित्र मतदान में खंजर शब्द का इस्तेमाल कुछ अजीब लग सकता है| मगर जिस तरह नेताओ ने पिछले सत्तर साल में सत्ता पाने के बाद जनता को भूल अपने लिए ही साधन जुटाने में प्राथमिकता दिखाई है “खंजर” शब्द माकूल लगता है| नेताओ के भ्रम को मतदाता तोड़ेगा और पांच साल में मिले कष्टों का भी आंकलन करने वाला है| चुनावी बुखार से पीड़ित सत्ताधारी “मुफ्त” माल से मतदाता को आकर्षित कर रहा है वहीँ विपक्ष सरकार की नाकामियों को कुरेद कुरेद कर खंजर की धार पैनी करने में जुटा रहा|

बात फर्रुखाबाद की चार विधानसभाओ में 19 को होने वाले मतदान के परिपेक्ष्य में है| वर्ष 2012 में अखिलेश यादव ने सत्ता संभाली| चुनाव में अखिलेश को लगभग हर वर्ग और युवाओ ने जमकर मतदान किया| वादे के अनुसार अखिलेश यादव ने हर 2012 के इंटरमीडिएट पास युवा को खूब ढोल पीट कर लैपटॉप बाट दिए| ढोल पीटने की बात इसलिए क्योंकि लैपटॉप बाटने में प्रचार और तरीके पर ही कुल लैपटॉप कीमत का 15 फ़ीसदी खर्च इस पर आया था जो लगभग 100 करोड़ से ऊपर का था| इसके बाद के वर्षो में पास हुए सभी इंटरमीडिएट छात्र छात्राओं को ये मुफ्त माल नसीब नहीं हुआ| बात समझने की ये है कि मुफ्त लैपटॉप योजना एक चुनावी गिफ्ट था न की सरकार की कोई योजना| योजना होती तो हर साल उतने ही बच्चो को लैपटॉप मिलता जितने की पहली बार मिले थे| खैर चुनावी वादा तो अखिलेश सरकार ने पूरा कर दिया|

बात मुफ्त में मिले माल की वफ़ादारी दिखाने का आया तो यूपी के मतदाता ने लोकसभा के चुनाव में समाजवादी पार्टी को ठेंगा दिखा दिया| पूरे उत्तर प्रदेश में अखिलेश यादव के वादे पर मिले सरकारी लैपटॉप पर मोदी का लाइव टेलीकास्ट देखा और भाजपा को सत्तर सीट से जितवा दिया| ये मतदाताओ का राजनैतिक खंजर ही था जो उसने सपा की पीठ में भोका था| और केवल मुलायम के परिवार को छोड़ कर कोई चुनाव नहीं जीत सका| वर्ष 2014 में सरकारी प्राइमरी स्कूल की लम्बे समय से लटकी नौकरी से लेकर उत्तर प्रदेश में प्रशासनिक अफसरों के चयन आयोग में गड़बड़ी का मुद्दा शबाब पर था| युवा एक अदद नौकरी की तलाश में एक एक नौकरी के लिए लाखो रुपये खर्च कर चुका था| मगर भर्ती प्रक्रिया में इतने पेच होते कि नतीजा अदालतों में लटक जाता था| बात यहाँ तक पहुची की नाराज अभ्यर्थियो ने चयन के आयोग के बोर्ड पर “यादव आयोग” तक लिख दिया| केवल एक जाति विशेष को ही नौकरी में प्राथमिकता के आरोप लगने लगे| कहने का मतलब ये है कि पढ़े लिखे बेरोजगार युवा को मुफ्त का लैपटॉप या मोबाइल नहीं एक अदद नौकरी चाहिए| रोजगार के अवसर न के बराबर रहे|

विकास की बात करे तो जनपद फर्रुखाबाद में मुख्यालय को राज्य मार्ग से जोड़ने के लिए सडको का निर्माण हुआ| मगर मोहम्दाबाद से बेवर रोड की खस्ताहालत सड़क भ्रष्टाचार की चर्चा को गरम कर देती है| छोटे मोटे खडंजे नाली को छोड़ दे तो विधायको ने विधायक निधि का दो तिहाई से ज्यादा हिस्सा निजी स्कूलों के हवाले कर दिया| निजी स्कूलों को विधायक निधि या सांसद निधि बिना सुविधा शुल्क लिए मिल जाती हो ऐसा बहुत कम सुनने को मिला है| नगर की ठंडी सड़क जिस पर जिले का सबसे बड़ा ट्रांसपोर्ट का कारोबार होता है गड्डो के हवाले ही रही| हाँ 35 हजार महिलाओ को समाजवादी पेंशन जरुर मिली| मगर इसमें भी तमाम जरुरतमंदो के आवेदन तभी स्वीकृत हो पाए जब उन्होंने प्रधानो और सूची पास करने वालो को कुछ भेट चढ़ाई| यही हाल कमोवेश हर सरकारी योजना का रहा| समाज कल्याण विभाग जिसके कंधो पर मुफ्त माल बाटने की जिम्मेदारी होती है वहां तक जिसका आवेदन बिना रिश्वत के पास होता हुआ पहुच गया तो उससे ज्यादा किस्मत वाला कोई नहीं था|

तो बात राजनीति के खंजर की है जो अब मतदाता के हाथ में है| विकास का एक और शानदार उदहारण लेते है| नगर क्षेत्र से चुनाव लड़ रहे निर्दलीय प्रत्याशी मनोज अग्रवाल की पत्नी वत्सला अग्रवाल नगरपालिका की चेयरपर्सन है| नगरपालिका के अंतर्गत म्युनिसिपल अन्तर कॉलेज संचालित होता है| जिसके टूटे कक्षों के निर्माण के लिए छात्र संगठनों ने आमरण अनशन तक कर दिया| मगर टूटे कमरे न बन सके, अलबत्ता कथित शिक्षा प्रेमी विधान परिषद् सदस्य रहे मनोज अग्रवाल की विधायक निधि का 80 फ़ीसदी से ज्यादा का हिस्सा निजी स्कूलों को दिया था| अब जनता इसे भूल जाए ये कैसे हो सकता है कि आपने सरकारी स्कूल को चवन्नी देने में उदारता और फूर्ती नहीं दिखाई थी? जनता को याद भी रखना चाहिए| क्या ये विषय के नेता की जनता और समाज के प्रति उसकी ईमानदारी में शंका नहीं पैदा करता| खैर राजनीति का खंजर अब मतदाता के हाथ में है| मनोज अग्रवाल ने नगर में लगभग हर गली और नाली पक्की करा दी| दस साल से नगरपालिका पर उनके परिवार की सत्ता है| शहर पहले के मुकाबले साफ़ सुथरा हुआ| पीने के पानी की उपलब्धता भी बढ़ी| इसी के लिए जनता ने उन्हें चुना था| मगर इसलिए नहीं चुना था कि स्टील के सुन्दर बस अड्डे बाजार भाव से 40 फ़ीसदी महगे लगवाकर जनता के टैक्स का पैसा लुटा दो| जलकल विभाग में मोबाइल आधारित ऑटोमेटिक स्वचालित सिस्टम को बाजार भाव से 10 गुना महगा खरीद कर धन का गोलमाल कर लो| जनता को हिसाब भी चाहिए| हर गद्दीनशी को हिसाब देना ही होगा| राजनीति का खंजर मतदाता के हाथ में है और उसकी ख़ामोशी एक तूफ़ान का इशारा कर रही है|

नोटबंदी में केंद्र की सरकार ने आम आदमी को लाइन में लगवा दिया| आम आदमी बिना किसी आक्रोश के लाइन में लग गया| मात्र इस उम्मीद में कि भ्रष्टाचार रुकेगा, सरकार का टैक्स बढ़ेगा और उस पैसे से आम आदमी की न्यनतम जरूरते सरकार पूरी करेगी| अब विपक्ष उस पर चुटकी ले रहा है| कितना काला धन आया| अलबत्ता भाजपा जबाब दे रही है कि आ रहा है थोडा इन्तजार करिए| आखिर कितना इन्तजार? जबाब परिवर्तन की उम्मीद लगाये बैठी भाजपा को भी आने वाले समय में देना होगा|

समाजवादी पार्टी को सबसे बड़ा इम्तिहान देना है| जनपद की चारो विधानसभाओ पर उसका कब्ज़ा है| पांच साल में अवैध खनन, जमीनों के कब्जे, विरोधियो पर फर्जी मुकदमे और जिसने सरकार के पक्ष में नहीं बोला उसकी सरकारी सुविधाओ से कटौती| ये जमीनी मुद्दे है| चुनाव में कर्ज माफ़ी, मुफ्त माल और चुनावी लालीपॉप से ज्यादा ये मुद्दे काम करते है| पांच साल में समाजवादी पार्टी में जमकर रार भी हुई| बाहर से आये नेताओ ने समाजवादी पार्टी में दो फाड़ करा दिए| जो चुनाव तक आते आते आते तीन हो गए| अखिलेश गुट, शिवपाल गुट और तीसरा गुट| समाजवादी पार्टी इस चुनाव में आंतरिक संकट में है| पूरे चुनाव प्रचार में अखिलेश यादव की जनसभा के अलावा दूसरे किसी नेता ने कोई असर नहीं किया| फर्रुखाबाद की सपा में तीनो गुटों को अपने अपने अस्तित्व की चिंता है| ऊपर से चारो विधायको का रिपोर्ट कार्ड भी कोई खास मुकाम नहीं बना पाया| कायमगंज के विधायक की टिकेट काट कर भाजपा के आयातित प्रत्याशी सुरभि दोहरे गंगवार को दी गयी जिनकी पूरी ताकत अपने सजातीय कुर्मी वोट को अपने लिए लामबंद करने में ही लगी रही| सपा को कायमगंज में विधायक रहे अजीत का भी हिसाब देना है और कई गुटों से मुकाबला भी करना है| कमोवेश सपा के लिए सभी विधानसभा क्षेत्रो में एक जैसी चुनौतिया है|

राजनीति कौशल के खिलाड़ी इतने चतुर निकलते है कि अपनी नाकामियों के किस्सों को अपने बाजू में इस बात से छिपाते है कि दाग उनके विपक्ष से कम है| मायावती की सरकार में भ्रष्टाचार के आसमान छूते भाव से मुखर होकर जनता ने युवा अखिलेश यादव को गद्दी सौपी तो जमीनों के कब्जे, भ्रष्टाचार और कानून व्यवस्था पर सवाल उठे| जनता तो जनता है| अगर नेता प्रयोग करता है तो जनता भी करती ही है| चुनाव को जात पात में धकेल कर असल मुद्दों को पटरी से उतारने की कोशिश भले ही नेता करते हो मगर आखिरी फैसला मतदाता को ही करना है जिसके हाथ में एक दिन के लिए ही सही राजनीति का खंजर रुपी वोटिंग मशीन का बटन तो है….

[bannergarden id="12"]