Featured Posts

निकाय चुनाव: भाजपा में एक अनार, सौ बीमारनिकाय चुनाव: भाजपा में एक अनार, सौ बीमार फर्रुखाबाद : चुनावी दंगलों में विपक्षियों को चारों खाने चित करने वाली भारतीय जनता पार्टी की बम-बम है। यह बम-बम यूपी विधानसभा चुनाव में भगवा के सहारे चुनावी वैतरणी पार कर सूबे की सत्ता पर बैठने के बाद कई गुना बढ़ गयी| अब निकाय चुनाव होने है| जिसको लेकर पार्टी के पास एक लम्बी...

Read more

दीये बिक्री हो तभी तो मने अंशिका की दीवालीदीये बिक्री हो तभी तो मने अंशिका की दीवाली फर्रुखाबाद :(दीपक-शुक्ला)अब से ढाई दशक पहले दीपावली के त्योहार पर लोग मिट्टी के दीये से घर को रोशन करते थे लेकिन धीरे-धीरे इनका स्थान अब बिजली की झालरों और रंगबिरंगी मोमबत्तियों ने ले लिया है। जिसके चलते मिट्टी के दीये सगुन बनकर रह गये हैं। लोग पूजा पाठ में ही इनका प्रयोग...

Read more

दिग्गजों के वार्ड में 10 वर्षो से चुनाव हार रही बीजेपीदिग्गजों के वार्ड में 10 वर्षो से चुनाव हार रही बीजेपी फर्रुखाबाद:वर्षो से प्रदेश में बीजेपी की सरकार नही बनी| तो निकाय चुनाव में भी किसी ने कोई दमखम नही दिखाया| लेकिन अब केंद्र से लेकर प्रदेश की कुर्सी का भगवा करण होने के बाद बीजेपी के छोटे-बड़े सुरमा अपना दांव अजमाने में लगे है| जगह-जगह बैठके आयोजित हो रही है| बीजेपी वार्डो का...

Read more

प्रेम प्रसंग के शक में ग्रामीण की गोली मारकर हत्याप्रेम प्रसंग के शक में ग्रामीण की गोली मारकर हत्या फर्रुखाबाद: बीते कई वर्षो से विवाहिता से प्रेम प्रसंग के शक में विवाहिता के परिजनों ने ग्रामीण की गोली मारकर हत्या कर दी गयी| पुलिस ने घटना के बाद शव का पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम के लिये भेजा दिया| मृतक के भाई ने घटना के सम्बन्ध में तहरीर दी| थाना मऊदरवाजा क्षेत्र के ग्राम...

Read more

1,989 परीक्षार्थीयों ने किया टीईटी परीक्षा से किनारा1,989 परीक्षार्थीयों ने किया टीईटी परीक्षा से किनारा फर्रुखाबाद: रविवार को हुई टीईटी परीक्षा के लिये प्रशासन ने पूरी सख्ती दिखाई| जिससे परीक्षा शांतिपूर्ण तरीके से निकट गयी| लेकिन वही दोनों पालियों में 14 केंद्रों पर 11590 परीक्षार्थी परीक्षा मे से 1,989 परीक्षार्थीयों ने किनारा कर लिया| शिक्षक पात्रता परीक्षा(टीईटी) पहली पाली...

Read more

सोशल मिडिया को चुनावी हथियार बनायेगी बीजेपीसोशल मिडिया को चुनावी हथियार बनायेगी बीजेपी फर्रुखाबाद: आगामी निकाय चुनाव में बीजेपी ने सोशल मिडिया को हथियार बनाने का खका तैयार कर लिया है| इसके लिये बैठक कर दिशा निर्देश भी जारी किये गये है| नगर के सिकत्तरबाग में डॉ० महिपाल सिंह के विधालय में आयोजित आईटी विभाग की बैठक में जिलाध्यक्ष सत्यपाल सिंह ने कहा कि नगर निकाय...

Read more

आजीवन सदस्यता वाले ही कर सकेंगे सपा से दावेदारीआजीवन सदस्यता वाले ही कर सकेंगे सपा से दावेदारी फर्रुखाबाद: नगर पालिका अध्यक्ष की टिकट सामान्य होने के बाद से अब दावेदारों की एक लम्बी लिस्ट हर पार्टी के सामने आ गयी है| कुछ प्रत्यक्ष रूप से तो कुछ पर्दे के पीछे से अपनी राजनितिक शतरंज में गोट फिट करने में लग गये है| फ़िलहाल सपा ने आवेदन लेने भी शुरू कर दिये है| समाजवादी...

Read more

मासूम की मौत पर डॉ० भल्ला के खिलाफ मुकदमामासूम की मौत पर डॉ० भल्ला के खिलाफ मुकदमा फर्रुखाबाद: पैसे ना होने से बच्चे का उपचार ना करने से मासूम की मौत पर जिलाधिकारी मोनिका रानी ने सख्त कार्यवाही कर दी| उन्होंने जाँच के आदेश के साथ ही चिकित्सक भल्ला के खिलाफ मुकदमा भी दर्ज करा दिया| कोतवाली मोहम्मदाबाद क्षेत्र के ग्राम खिमसेपुर निवासी नन्हे लाल के 6 माह...

Read more

दो वर्षो में तीसरी बार बम से घटना को अंजाम देने की साजिशदो वर्षो में तीसरी बार बम से घटना को अंजाम देने की साजिश फर्रुखाबाद: जिले की सुरक्षा एजेंसी किस तरह से कार्य कर रही है| एलआईयू व स्वाट टीम किस पर शिकंजा कर रही है| जब दो वर्षो में तीसरी बार घटना को अंजाम देने की नाकाम शाजिश रची गयी| मजे की बात तो यह है कि पुलिस से लेकर एटीएस तक बम बरामद के मामले में जाँच पड़ताल कर चुकी है| लेकिन अभी तक...

Read more

सेंट लारेंस स्कूल के पीछे मिला संदिग्ध बमसेंट लारेंस स्कूल के पीछे मिला संदिग्ध बम फर्रुखाबाद: शहर में दीपावली के त्योहार को देखते हुये पुलिस जितनी अलर्ट है अपराधी उनसे एक कदम आगे नजर आ रहे है| जिसके चलते एक साजिश के तहत विधालय के पीछे बम मिलने से सनसनी फ़ैल गयी| मौके पर पुलिस ने पंहुचकर जाँच पड़ताल की| शहर कोतवाली क्षेत्र के श्याम नगर में सेंट् लारेन्स स्कूल...

Read more

फ़्लैश बैक- संतोष यादव की मदद न करना भारी पड़ा है सांसद मुकेश राजपूत को

Comments Off on फ़्लैश बैक- संतोष यादव की मदद न करना भारी पड़ा है सांसद मुकेश राजपूत को

Posted on : 22-08-2017 | By : पंकज दीक्षित | In : EDITORIALS, FARRUKHABAD NEWS

फर्रुखाबाद: जरा फ़्लैश बैक में चलिए| तारीख 2 नवम्बर 2015 | जिला पंचायत सदस्य का चुनाव| स्थान राजेपुर मतगणना केंद्र| और राजेपुर चतुर्थ क्षेत्र का काउंटिंग हाल| यहाँ सीधा मुकाबला सांसद मुकेश राजपूत के समर्थक संतोष यादव और सुबोध यादव की पत्नी रश्मि यादव के बीच था| राजेपुर में जब कुछ मतपेटिया ही खुलनी बाकी रह गयी थी, लगभग आखिरी राउंड तक की गिनती तक संतोष यादव लम्बे अंतराल से बढ़त बनाये हुए थे फिर भी हारे घोषित किये गए और अपनी आवाज भी बुलंद नहीं कर पाए| तमाम प्रयासों के बाबजूद सांसद मदद को नहीं आये| और सुबोध यादव की पत्नी रश्मि यादव विजयी घोषित हुई और सुबोध यादव को फर्रुखाबाद की राजनीति मे पहला कदम रखने का मौका मिल गया| स्वयं तो वे कायमगंज क्षेत्र से हार ही गए थे| जिला पंचायत अध्यक्षी के दूसरे दौर में सांसद समर्थक प्रत्याशी की हार सांकेतिक रूप से सांसद की ही हार है जिसका बीज 2 नवम्बर 2015 में बोया गया था| आज पौधा बनकर लहराने लगा है| कल किसने देखा, वृक्ष बन कर अपने नीचे की हरियाली को भी सुखा दे|

जरा अतीत में लौटते है| उस समय जब जिला पंचायत सदस्य के चुनाव कई मतगणना चल रही थी| देर रात तक जिला मुख्यालय के एक दर्जन पत्रकार राजेपुर में ही डेरा डाले हुए थे| सांसद ने जिस सदस्य को चुनाव लड़ाया था वो पुकार रहा था| उसे जीत का प्रमाण पत्र न मिलने का अन्देशा हो चला था| तत्कालीन सरकार के अफसर सपा नेताओ की मदद आँख मीच कर रहे थे| लखनऊ से राजनेताओ और सचिवों के फोन जिले अधिकारियो को बार बार निर्देशित कर रहे थे| राजेपुर चतुर्थ क्षेत्र से चुनाव लड़ रहे संतोष यादव मतगणना के आखिरी दौर तक आगे थे और अचानक मतगणना रुकी और फिर कई घंटे के बाद परिणाम आया कि संतोष यादव चुनाव हार गए| मीडिया और पुलिस कप्तान जो निरंतर मतगणना पर निगाह लगाये थे, वे भी बाजीगरी के आगे हार चुके थे| भाजपा समर्थित प्रत्याशी जिसे मुकेश राजपूत ने ही खड़ा किया था वो संतोष यादव तब विरोध की आवाज बुलंद न कर सका| उसकी मदद के लिये सांसद मुकेश राजपूत को भी कई फोन किये गए मगर वो भी मदद के लिये राजेपुर नहीं पहुचे| और फर्रुखाबाद में वो राजनैतिक बीज अंकुरित हो गया जो आज पौधा बन गया और उसी की मामूली हवा में ही मुकेश की चौसर के सारे पत्ते हवा में बिखर गए| न विधायक काम आये और न समर्थक| राजनीति मे गिरती विश्वसनीयता और धनबल का बढ़ता प्रभाव इसी का नाम है|

जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी पर बैठने वाला निरक्षर है| उसकी कमान निश्चित रूप से वही चलाएगा जिसने उन्हें जीतने के लिये आवश्यक व्यवस्था की है| ऐसा पहली बार नहीं हुआ है| मुकेश राजपूत को इसका बेहतर तजुर्बा है| अपनी पत्नी की अध्यक्षता वही चलाते रहे| इसलिए उन्हें टोकने का नैतिक अधिकार ही नहीं है| फिर दो साल के कार्यकाल के लिये बची जिला पंचायत की कुर्सी मुकेश राजपूत के लिये केवल आर्थिक सौदा था वहीँ सुबोध के लिये राजनैतिक स्थापत्य का पहला खम्भा| कौन नहीं जनता कि जिला पंचायत में पैसा कमाने के लिये ही पैसा लगाते रहे है राजनैतिक लोग| खेल धनबल का था| एक का पहले से ही फसा हुआ था दूसरे को लगाना था| नए खरीददार के लिये ज्यादा पैसा देकर सदस्य खरीदना घाटे का सौदा था लिहाजा सदस्य कम रह गए| इतिहास फिर दोहरा रहा है| सबक लेने की जरुरत है| एक पत्रकार गुरु की सलाह थी कभी कि घर की किसी दीवार पर पंछियों के परांगन के द्वारा पीपल का पौधा अगर उग आये तो उसे वृक्ष बनने से पहले ही उखाड़ देना चाहिए| वर्ना किसी दिन बड़ा होकर वो दीवार ही उखाड़ देगा| देश में मोदी की राजनीति से ये बेहतर समझा जा सकता है| विपक्ष शून्य की ओर भाजपा निरंतर प्रयास करती दिखाई पड़ रही है| मोदी और शाह की जोड़ी कांग्रेस मुक्त भारत की ओर चल पड़ी है| नया उदहारण तमिलनाडु का है| अब शीर्ष से भी भाजपाई सबक न ले सके तो फिर भगवान् ही मालिक………
इसे भी पढ़िए- राजेपुर में जनता के चुने हुए प्रतिनिधि की सदस्यता की फिर चढ़ी बलि

उस स्याह रात का मंजर जब हत्यारो ने मौत के घाट उतार दिया ब्रह्मदत्त द्विवेदी को

Comments Off on उस स्याह रात का मंजर जब हत्यारो ने मौत के घाट उतार दिया ब्रह्मदत्त द्विवेदी को

Posted on : 26-05-2017 | By : JNI-Desk | In : CRIME, EDITORIALS, FARRUKHABAD NEWS, Politics, Politics-BJP

फर्रुखाबाद: प्रदेश में राष्ट्रपति शासन था| रोमेश भंडारी राज्यपाल थे| बसपा और भाजपा में 6-6 महीने मुख्यमंत्री बनाकर सरकार बनाने के फार्मूले पर लखनऊ में बैठको का दौर चल रहा था| फार्मूले की अगुआई स्व ब्रह्मदत्त द्विवेदी कर रहे थे| वही समझौते का फार्मूला लेकर मायावती के पास आ-जा रहे थे| बताते है कि मायावती सिर्फ एक शर्त पर इस फार्मूले पर राजी थी कि भाजपा की पारी में सिर्फ ब्रह्मदत्त द्विवेदी मुख्यमंत्री बने| कल्याण सिंह के नाम पर मायावती नाक भौ सिकोड़ रही थी| इसी बीच प्रदेश के कद्दावर भाजपा नेता की हत्या कर दी गयी| पक्ष हो या विपक्ष जनता भी मानती है कि अगर ब्रह्मदत्त द्विवेदी आज जिन्दा होते तो फर्रुखाबाद की विकास के रास्ते पर चलते हुए तस्वीर ही बदल जाती| मगर समय और नियति के आगे किसी की नहीं चलती| 17 साल बीत जाने के बाद भी याद करने पर उस काली रात का मंजर दिलो में सिहरन पैदा कर देता है|

लोहाई रोड के जिस मकान के बाहर ब्रह्मदत्त द्विवेदी की हत्या हुई थी वहाँ हर साल 10 फरवरी को उनकी याद में पुष्पांजलि और मशाल जलती है| अपने दोस्त रामजी अग्रवाल के भतीजे के तिलक में शामिल होने के लिए द्विवेदी पहुचे थे| एक गनर ब्रजकिशोर मिश्र और ड्राइवर के साथ| लगभग 11.30 से 12 बजे के बीच का समय था| सर्दी की रात में कार्यक्रम समापन की और हो चला था| द्विवेदी जी वापस घर जाने के लिए निकले ऊँचे मकान की सीड़ियो से उतरने के बाद अपनी कार तक पहुचे| खिड़की खोल कर बैठ गए| कार के शीशे खुले हुए थे| रामजी अग्रवाल उनका भतीजा और परिवार के अन्य सदस्य अपने मकान के गेट तक उन्हें छोड़ने के लिए आये थे और उनकी गाड़ी के रवाना होने का इन्तजार कर रहे थे| गनर गाड़ी के बाहर खड़ा था| तभी उनकी कार के चारो और से घेर कर फायरिंग होने लगी| लाबड़तोड़ गोलियां चली| ब्रह्मदत्त द्विवेदी और गनर बृजकिशोर सहित ड्राईवर और रामजी अग्रवाल के भतीजे के भी गोली लगी| बताते है कि दरवाजे पर खड़े लोग अपनी जान बचाने को घर में छुप गए| सड़क पर सन्नाटा हो गया| ऊपरी मंजिल की बालकनी या छत पर खड़े मनोज अग्रवाल ने अपनी पिस्तौल निकाल गोली चलाई| ऊंचाई और दूरी के कारण शायद पिस्तौल स्वचालित हथियारो के आगे नाकाम साबित हो रही थी| मगर फिर भी हिम्मत की गयी| मगर सब बेकार गया| दुर्दांत हत्यारे अपने मकसद में कामयाब हो गए| लगभग 20 से 25 मिनट तक पूरे लोहाई रोड सन्नाटा|

घटना के कुछ समय बीत जाने के बाद आखिर फिर हिम्मत जुटाकर वापस लोग जुटे और रामजी अग्रवाल के भतीजे की टाटा सूमो में द्विवेदी जी को लिटाकर पहले डॉ जितेन्द्र कटियार के नर्सिंग होम जो चंद कदमो कि दूरी पर था वहाँ लाया गया| मगर डॉ जितेन्द्र कटियार का दरवाजा नहीं खुला तो आनन् फानन में बढ़पुर स्थित डॉ एन सी जैन के नर्सिंग होम में लाया गया| जहाँ उन्हें डॉ जैन ने मृत घोषित कर दिया| एक विकास का दिया बुझ चुका था| प्रभुदत्त, सुधांशु, डॉ हरिदत्त कोई कुछ भी बोलने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा था| यकीन नहीं कर पा रहा था कि उनका कोई करीबी इस तरह दुनिया से विदा हो जायेगा| गनेश दुबे, सदानंद शुक्ल, स्व बागीश अग्निहोत्री, राम चन्द्र कुशवाहा, मोती लाल गुप्ता, अजय पाराशर, अयोध्या प्रकाश सिंह जैसे तमाम चेहरे जैन अस्पताल के बाहर मौजूद थे| मोबाइल का जमाना नहीं था| बेसिक फोन से जहाँ तक सूचना पहुचती दो चार को लोग बताते और अस्पताल की ओर दौड़ पड़ते| मंजुल दुनिया से विदा हो चुका था| खामोश चेहरा, बंद आँखे और शांत शरीर जीवन के अंतिम पड़ाव की तस्वीर साफ़ थी मगर यकीन फिर भी नहीं हो रहा था| लोग शव देखने के बाद भी इशारो इशारो में एक दूसरे से पूछ कर पुष्टि कर लेना चाहते थे कि क्या उनका नेता क्या बाकई चला गया!

प्रशासन से लेकर पुलिस तक खामोश थी| जिलाधिकारी अरविन्द कुमार, पुलिस अधीक्षक अखिलेश मल्होत्रा, अपर पुलिस अधीक्षक एस एन सिंह, कोतवाल ओपी शर्मा सब डॉ जैन के अस्पताल पहुचे| पुलिस अधीक्षक ने डीजीपी और डीआईजी को सूचना दी| जिलाधिकारी ने फोन पर कमिश्नर कानपुर को द्विवेदी जी की हत्या की सूचना दी| लोग पीसीओ खोजने में लगे थे| सूचना देने के लिए बेसिक फोन तलाश किये जा रहे थे| खबरनवीसों में अखबारो के पत्रकार सक्रिय हो चुके थे| तब टीवी का जमाना नहीं था| रेडियो पर समाचार प्रमोद कुदेसिया ने प्रसारित करवाया| सत्यमोहन पाण्डेय अपने कार्यालय में समाचार भेजने में लगे थे| मगर शहर ख़ामोशी से सो रहा था|
घटना स्थल पर स्वर्गीय द्विवेदी की कार खड़ी थी| पुलिस जांच पड़ताल में लगी थी| रात सुबह की और बढ़ रही थी और भाजपा कार्यकर्ता जैन अस्पताल पहुँच रहे थे| द्विवेदी परिवार के सभी सदस्य यहाँ मौजूद थे| ब्रह्मदत्त द्विवेदी की पत्नी स्व प्रभा द्विवेदी और उनके पुत्र मेजर सुनील द्विवेदी सुबह 4/5 बजे के आसपास लखनऊ से फर्रुखाबाद पहुच चुके थे| दोनों लोग उस दिन लखनऊ में ही थे| हर चेहरा उदास और शांत| कोई कुछ बोलने की स्थिति में नहीं था| यह पहली बार देखा था जब हर कार्यकर्त्ता दिल से दुखी दिखा|

साक्षी महाराज उस दिन अनन्त होटल में थे| साक्षी महाराज ने राम नगरिया के बड़े क्षेत्र में अपना पंडाल लगाकर उसी दिन भागवत कथा शुरू की थी जिस रात यह घटना हुई| साक्षी जी भी जैन अस्पताल पहुंचे थे| हर शख्स की पूरी रात जागते ही कट गयी और शव पोस्टमार्टम के लिए फतेहगढ़ ले जाया गया| अब रिटायर हो चुके कन्हैया ने ही पोस्ट मार्टम किया था| पोस्टमार्टम हाउस का वह मंजर पहली बार दिखा था| जहाँ धर्म, जाति और दलीय सीमाएं टूट गई थीं| ऐसी भीड़ पहली बार देखी गयी थी| पूरे पोस्टमार्टम के दौरान भीड़ बढ़ती रही| जो आ जाता वो रुक जाता था| साक्षी, उर्मिला भी पहुंचे थे| पोस्टमार्टम के बाद शव को पहले ब्रह्मदत्त द्विवेदी के घर पर लाया गया| उसके बाद दिन में लोगों के अंतिम दर्शनार्थ भारतीय पाठशाला ले जाया गया| ऍफ़आईआर हो चुकी थी| एक नामजद और 3-4 अज्ञात में मुकदमा कोतवाली में लिखा जा चुका था| सुबह दोपहर की और बढ़ रही थी| पूरी भारतीय जनता पार्टी फर्रुखाबाद में पहुच रही थी| पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपयी, लालकृष्ण अडवाणी, विनय कटियार, प्रेमलता कटियार, लालजी टंडन, कलराज मिश्र से लेकर हर नामी भाजपाई चेहरा फर्रुखाबाद पहुच रहा था| मगर मायावती और कल्याण सिंह नयी आये| आम जनता में सुबह जब लोग घर से निकलते तो खबर मिलती और जिसे जैसा साधन मिलता वो सेनापत स्ट्रीट पहुच रहा था| नेहरू रोड उस जमाने में जाम की स्थिति में पहुच चुका था|

आकंठ तक भ्रष्टाचार में डूबे जेल प्रशासन में ये तो होना ही है…….

Comments Off on आकंठ तक भ्रष्टाचार में डूबे जेल प्रशासन में ये तो होना ही है…….

Posted on : 26-03-2017 | By : पंकज दीक्षित | In : EDITORIALS, FARRUKHABAD NEWS

पोशम्पा भाई पोशम्पा, डाकिये ने घडी चुराई, अब तो जेल में जाना पड़ेगा, जेल की रोटी खाना पड़ेगा, जेल का पानी पीना पड़ेगा…. बचपन के खेल में कहीं न कहीं सत्य का आभास कराया जाता रहा है| मगर शायद प्रशासनिक अफसरों की आँख का पानी मर गया है इसलिए उन्हें इस बात की भी चिंता नहीं कि उनके खुद के बच्चे भी सवाल पूछ सकते है कि “क्या पापा जेल की रोटी और पानी ख़राब होता है?” और ख़राब होता है तो क्यों? और आप तो जिले के बड़े अफसर हो| जेल में निरीक्षण करते रहते हो| क्या आपको भी उसके खराब होने का हिस्सा मिलता है?

बड़ा प्रासंगिक सवाल है| रिश्वतखोर होना आज के जमाने में एक एडवांस कल्चर का भाग है या फिर बेशर्मी की हद| जेल में खाना ख़राब क्यों? जबकि बजट शारीरिक जरूरतों और सेहत के पैमाने के हिसाब से टैक्सपेयर के पैसे से बनाया जाता है| अस्पताल में इलाज का अभाव क्यों? दवा का बजट तो ठीक ठाक है| 31 मार्च को जिले के अफसर एक ही दिन में लाखो करोडो क्यों और कैसे ऊपर का कमा लेते है इस बात में ही जेल की खराब दाल रोटी और दवा के अभाव का राज छिपा होता है| जानते सब है| जो जेल में कर रहे है वे भी और जिन्हें जेल की निगरानी का जिम्मा दिया गया है वे भी, मगर काल्पनिक संतुष्टि के चलते मानने को तैयार नहीं|

वैसे जेल में जो सक्षम परिवार के लोग बन्द है वे तो जेल की रोटी दाल भी नहीं खाते| उनके लिए तो जेल से बाहर रोज का खाना आता है| उनके हिस्से का राशन तो अफसरों को खाने को मिल ही रहा है| जो गरीब जेल में बन्द होता है उसके हिस्से का भी राशन खा जाना “डोम’ (डोम- मृत्यु के समय मुर्दे से उसके जलने का टैक्स वसूलने वाला) होने से कम नहीं| गरीब होना ही सबसे बड़ा अभिशाप है| पुलिस भी सबसे पहले उसे ही पकड़ कर अंदर कर महीनों से गैर खुलासे हुए केस खोल कर उस पर लाद कर अपनी नौकरी बचा लेती है|

तो फर्रुखाबाद की जेल में कोई पहली बार आक्रोशित उपद्रव नहीं हुआ है| कभी केंद्रीय कारागार में तो कभी जिला जेल में| जहाँ मुलाकात से लेकर मोबाइल से बात करने की वसूली का खेल चलता हो| जहाँ प्रति माह चूना डाल कर औचक निरीक्षण कर अफसर अपनी नौकरी पूरी करते रहे हो| वहां जेल में आंदोलन हो जाना, दो चार के सर फूट जाना कोई खास खबर नहीं है| खास खबर तो तब होगी जब ऐसा होना बन्द हो जायेगा| सरकार बदली है….. सरकारी अफसर और तंत्र वही है…… अगली घटना होने पर जारी….

रिश्वत वसूली ऊपर वाले के लिए करनी पड़ती है…

Comments Off on रिश्वत वसूली ऊपर वाले के लिए करनी पड़ती है…

Posted on : 22-03-2017 | By : पंकज दीक्षित | In : EDITORIALS, FARRUKHABAD NEWS

भाई साहब फाइल पर साहब का अप्र्रोवल लेना है खर्चा दो| दफ्तर के बाबू ने बड़ी शालीनता से ठेकेदार से रिश्वत की मांग अपने साहब के लिए कर दी| साथ ही ठेकेदार पर एहसान भी लाद दिया, आप तो घर के आदमी है मुझे कुछ नहीं चाहिए| रिश्वत कोई अपने लिए नहीं वसूलता है यहाँ सब ऊपर वाले के लिए रिश्वत लेते है| लेखपाल, वीडीओ, दफ्तरों के बाबू, कचहरी से लेकर म्युनिसिपल कारपोरेशन तक में हर कोई ऊपर वाले लिए रिश्वत वसूल रहा है| बाबू ने साहब के लिए, और साहब ने बड़े साहब के लिए, बड़े साहब ने अपने से ऊपर के लिए| यही व्यवस्था कहकर आम जनता से रिश्वत वसूलने का चला है| सिपाही, लेखपाल, वीडीओ, बाबू, ये सब ऊपर वाले के लिए रिश्वत लेते है और मजे हुए सेल्समेन की तरह रिश्वत की बारीकियां समझा कर सकल घरेलु रिश्वत में लगातार महगाई दर बढ़ने के अनुपात में इजाफा करते रहते है| बड़े बाबू ने चश्मा आँखों पर लगाया, ठेकेदार से मिले हुए रुपये गिने और दराज में सरकाए फिर ठेकेदार की ओर देख कर दुख साझा करते हुए कहा- अब तो अंग्रेजो के भारत से जाने के बाद ही कुछ बदल सकता है|

सब कुछ जानते हुए भी बड़े उत्सुकता भाव से ठेकेदार ने पूछा ट्रेजरी में भी देना पड़ता है| हाँ भाई ………(गाली निकलते हुए) बिना लिए फाइल अप्रूव कहा करते है| कोई न कोई कुइरी/नुक्ता लगा देंगे| ठेकेदार ने भी कुटिल भाव से पुछा उसके बाद फाइल कहाँ जाएगी| ट्रेजरी के बाद कलेक्टर साहब के पास जाएगी| मतलब कलेक्टर का भी देना होगा? मगर इस काम में कलेक्टर का तो कोई रोल नहीं है| हाँ भाई साहब यही तो रोना है, घाघ बाबू ने ठेकेदार के साथ सुहानुभूति दिखाते हुए कहा- जिले में कोई भुगतान हो कलेक्टर का तो जाता ही है| तो कुल मिलाकर तुम्हे क्या बचता है| ठेकेदार ने बड़े बाबू के साथ कुटिल सुहानुभूति दिखाते हुए पूछ ही लिया कि ख़ामो खाम ही तुम लोग (निचले स्तर के सरकारी कर्मी) बदनाम होते हो|

बड़े बाबू ने बगल की कुर्सी खीच कर ठेकेदार को अपने पास में बैठाते हुए कान में बताया …………. (गाली देते हुए) इसलिए कभी जिले में नए आये कलेक्टर और कप्तान साहब को कभी यह कहते हुए सुना कि उनके कार्यकाल में कोई रिश्वत नहीं लेगा| कोई नहीं कहता| सिस्टम बन गया है| इमानदार से इमानदार कलेक्टर भी मोटा माल ऊपर के कमा लेता है| अब तो अग्रवाल साहब इन्तजार करो आजादी का… जाने ससुरी कब मिलेगी|

शाम तक दफ्तर में बड़े बाबू ने 10 फाइल निपटाई| दोपहर बाद साहब अपने केबिन में आये तो फाइलों के साथ बड़े बाबू साहब के कमरे में पंहुचा और साहब का हिस्सा गिन दिया| साहब के हिसाब में एक फाइल के पैसे कम थे| तो साहब ने आँखे तरेरी| कितनी फाइल है| साहब 10 है मगर एक की सिफारिश थी| बड़े बाबू को वर्षांत के अंत में आज कुछ ठीक ठाक हिस्सा मिल गया था| पांच बजते ही बड़े बाबू ने छाता झोला उठाया और घर की ओर चल पड़े| सुनसान सड़क पर कुछ देर आगे ही तमंचे के साथ मुह पर कपडा बांधे गुंडों ने घेर लिया| बड़े बाबू का झोला छीनने लगे| बड़े बाबू ने प्रतिशोध किया तो गुंडे ने एक जोरदार घूँसा मुह पर जड़ दिया| बड़े बाबू चिलाये…. बचाओ मार डाला|

रसोईघर से हाथ में चिमटा लिए बबुआइन कमरे की ओर दौड़ी …… अरे किसने मार डाला| देर तक सोयेंगे और नींद में भी बड़बड़ाएगे| बड़े बाबू बिस्तर के नीचे पड़े थे| माल कमाकर लौट रहे थे, गुंडों ने सपना तोड़ दिया था| 6 बज चुके थे, साहब ने जल्दी आने को कहा था| जल्दी जल्दी तैयार हुए और सोच रहे थे कि कहीं आज दफ्तर से लौटते समय बाकई गुंडे मिल गए तो…….

भर दी झोली वोटरों ने, उम्मीद पर खरे होकर दिखाओ….

1

Posted on : 11-03-2017 | By : पंकज दीक्षित | In : EDITORIALS, Election-2017, FARRUKHABAD NEWS

फर्रुखाबाद: 2017 के चुनाव में वोटरों ने भाजपा की झोली उम्मीद से ज्यादा ही भर दी है इस उम्मीद के साथ कि जो कहा है कर के दिखाओ| न भ्रष्टाचार न गुंडाराज के होल्डिंग से शुरू हुआ चुनाव जैसे जैसे परवान चढ़ा नरेंद्र मोदी ने वोटरों की उम्मीदे जगा दी| जनता ने ख्वाव देखा कि भाजपा सरकार आते ही रिश्वतखोरी बंद हो जाएगी| अवैध जमीन कब्जे बन्द हो जायेंगे| गरीब को भी इन्साफ मिल जायेगा| आधी रात को भी माँ बहनो के लिए सड़क परनिर्भय होकर निकलना अब हो जायेगा| कोई सरकारी कर्मचारी और अफसर अब रिश्वत के बिना काम करेगा| सपने तो बहुत से मोदी ने पाल दिए है उन्हें पूरा करने की जिम्मेदारी कौन निभाएगा अब सवाल खड़ा होगा| अगर खरे न उतरे तो फिर वही होगा जो इस बार हुआ है|
फर्रुखाबाद की जनता ने विजय सिंह, नरेंद्र सिंह यादव, जमालुदीन सिद्दीकी के पुत्र अरशद जमाल, मनोज अग्रवाल, उमर खान, सुरभि गंगवार को नकार मेजर सुनील, सुशील शाक्य, नागेन्द्र सिंह और अमर सिंह को सर पर बैठाया है| मगर जिन्हें जिताया है उनके भी रिकॉर्ड में कोई उपलब्धि नहीं है केवल मोदी के कहने पर जिताया है| ये मोदी की लहर का चुनाव था, भ्रष्टाचार और गुंडाराज के खिलाफ चुनाव था| इसमें कोई शक नहीं| उपलब्धि अब इन जीते हुए प्रत्याशियो को बनानी है अपने राजनैतिक भविष्य के लिए वार्ना कितने ही विधायक एक बार चुनाव जीत हाशिये पर जा चुके है| अगर मोदी ने कहा है कि न खाऊंगा और न खाने दूंगा तो जनता ने उन्हें पसंद कर लिए| भरोसा भी कर लिया| क्या यही भरोसा फर्रुखाबाद के चारो जीते हुए भाजपा प्रत्याशी जनता को दिल पायेंगे| ये वो सवाल है जिस पर वोपक्ष की नजर 5 साल रहेगी|

इसमें कोई दो राय नहीं कि यूपी की जनता परिवर्तन चाहती थी| जमीनी हकीकत कुछ और थी और मुख्यमंत्री अखिलेश तक पहुची रिपोर्ट कुछ और| मुख्यमंत्री के साथ फोटो खिंचाने वाले उन्ही फोटो की दम पर पुलिस और प्रशासन पर हनक बनाते और अवैध कब्जे और अवैध खनन में लगे थे| उसी हनक पर विरोधियो पर सरकारी तरीको से अत्याचार कराते रहे| जनता वास्तव में भ्रष्टाचार और गुंडाराज से त्रस्त थी और मोदी ने इसे कैश कर लिया| ये राजनीती है, दाव चलने और बिसात बिछाने में माहिर खिलाड़ी ही इसके विजेता बनते है| जनता तो बस उम्मीद में जीती है| साल दर साल उम्मीद में काटती जाती है| तो उम्मीद कितनी पूरी होती है इसकी बानगी भी कुछ दिनों में दिखने लगेगी| सवाल फिर से खड़े होंगे कि भाजपा की झोली तो भर दी है अब गरीब और मजबूर की बारी है…….

[bannergarden id="12"]