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अविश्वास प्रस्ताव- बिना दूल्हे की बारात में दहेज़ पर मसक्कत, सगुना ही रहेगी अध्यक्षा!अविश्वास प्रस्ताव- बिना दूल्हे की बारात में दहेज़ पर मसक्कत,... फर्रुखाबाद: जिला पंचायत में अध्यक्षा के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव बड़े ही ढोल पीट कर दे दिया गया है| मगर अगर अविश्वास प्रस्ताव आ गया तो अगला अध्यक्ष कौन बनेगा? अनुसूचित जाति की महिला के लिए आरक्षित सीट है और दावेदार केवल पांच| एक वर्तमान में अध्यक्षा है और बाकी के चार के लिए...

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आप संडे की छुट्टी मना रहे हैं, वहां योगी ने ले लिया बेहद सनसनीखेज फैसला, पूरे यूपी में मचा तहलकाआप संडे की छुट्टी मना रहे हैं, वहां योगी ने ले लिया बेहद सनसनीखेज... लखनऊ : उत्तर प्रदेश को अब उत्तम प्रदेश बनने से कोई नहीं रोक सकता, ऐसा हम नहीं कह रहे हैं बल्कि ऐसा तो आप खुद कहेंगे इस बेहद सनसनीखेज खबर को पढ़ने के बाद. सीएम योगी प्रदेश में कानूनों का सही तरीके से पालन हो इसके लिए कोई कोर-कसर नहीं छोड़ रहे हैं और अब इसी सिलसिले में योगी सरकार...

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बंदियों ने जेल अधीक्षक का सिर फोड़ा, प्रभारी डीएम घायल, डाक्टर पर कार्यवाहीबंदियों ने जेल अधीक्षक का सिर फोड़ा, प्रभारी डीएम घायल, डाक्टर... फर्रुखाबादः जिला जेल फतेहगढ़ में रविवार सुबह से चल रहे बबाल में आक्रोषित बंदियों ने जेल अधीक्षक का सिर पत्थर मारकर फोड़ दिया। बंदियों की मांग पर जेल के चिकित्सक डा0 नीरज को उनके पद से हटा दिया गया। प्रभारी डीएम सीडीओ एनपी पाण्डेय को भी पत्थर मारकर बंदियों ने घायल कर दिया।...

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ब्रेकिंग - जिला जेल में बंदीयों ने की तोड़फोड़ व पथरावब्रेकिंग - जिला जेल में बंदीयों ने की तोड़फोड़ व पथराव फर्रुखाबादः रविवार को सुबह किसी बात को लेकर जिले जेल के बंदी अचानक भड़क गये। जिसके चलते उन्होंने पथराव शुरू कर दिया। इसके साथ ही बंदियों ने काफी तोड़फोड़ कर दी। आगजनी का मामला भी सामने आया है। सूचना मिलने पर जेल में अलार्म व शायरन भी बजाया गया। लेकिन फिलहाल कोई असर दिखायी...

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योगी मंत्रिमंडल की पूरी अधिकृत सूची- किसको मिला कौन सा विभागयोगी मंत्रिमंडल की पूरी अधिकृत सूची- किसको मिला कौन सा विभाग लखनऊ: उत्तर प्रदेश के राज्यपाल श्री राम नाईक ने मुख्यमंत्री श्री आदित्य नाथ योगी के प्रस्ताव दोनों उप मुख्यमंत्रियों सहित सभी 22 मंत्री, 9 राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) तथा 13 राज्यमंत्रियों को विभाग आवंटित करने पर अपना अनुमोदन प्रदान कर दिया है। मुख्यमंत्री ने गृह, आवास...

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रिश्वत वसूली ऊपर वाले के लिए करनी पड़ती है...रिश्वत वसूली ऊपर वाले के लिए करनी पड़ती है... भाई साहब फाइल पर साहब का अप्र्रोवल लेना है खर्चा दो| दफ्तर के बाबू ने बड़ी शालीनता से ठेकेदार से रिश्वत की मांग अपने साहब के लिए कर दी| साथ ही ठेकेदार पर एहसान भी लाद दिया, आप तो घर के आदमी है मुझे कुछ नहीं चाहिए| रिश्वत कोई अपने लिए नहीं वसूलता है यहाँ सब ऊपर वाले के लिए रिश्वत...

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ब्रेकिंग-आरोपी के घर बंद कमरे में मिली डिस संचालक की लाशब्रेकिंग-आरोपी के घर बंद कमरे में मिली डिस संचालक की लाश फर्रुखाबाद: शहर कोतवाली क्षेत्र के पक्कापुल निवासी मुकेश पुत्र ओमप्रकाश के अपहरण का मुकदमा तकरीबन 10 दिन पूर्व परिजनों ने कोतवाली में दर्ज कराया था। गुरुवार की शाम आरोपी के घर के अंदर ही मुकेश की लाश मिलने से पुलिस पर सवालिया निशान लगने लगे हैं। गुरुवार की शाम परिजनों...

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रेप के आरोपी गायत्री प्रजापति अरेस्ट, 17 दिन से खोज रही थी पुलिसरेप के आरोपी गायत्री प्रजापति अरेस्ट, 17 दिन से खोज रही थी पुलिस लखनऊ: .रेप के आरोपी गायत्री प्रजापति को लखनऊ पुलिस और एसटीएफ ने यहां बुधवार को अरेस्ट कर लिया है। वह करीब 17 दिन से फरार चल रहे थे। ऐसा कहा जा रहा कि लखनऊ के आलमबाग थाने में पुलिस उनसे पूछताछ कर रही है। मंगलवार को उनके दोनों बेटों अनुराग प्रजापति और अनि‍ल प्रजापति को पूछताछ...

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हम गायत्री मंत्र बोलते हैं, सपा वाले गायत्री प्रजापति मंत्र बोलते हैंहम गायत्री मंत्र बोलते हैं, सपा वाले गायत्री प्रजापति मंत्र... जौनपुर. काशी में शनिवार को रोड शो करने के बाद नरेंद्र मोदी ने जौनपुर में रैली की। उन्होंने कहा- "हम सबका साथ-सबका विकास का नारा देते हैं। सपा- कांग्रेस वाले कुछ का साथ-कुछ का विकास की ही बात कहते हैं। मैं आपको गारंटी देता हूं कि बीजेपी सरकार की पहली मीटिंग में किसानों का कर्जा...

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बुधइआ न्यूनतम के लिए तरस रहा? सरकार ने मेट्रो और हाईवे दे दिए

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Posted on : 09-02-2017 | By : पंकज दीक्षित | In : EDITORIALS, Election-2017, FARRUKHABAD NEWS

पांच साल तक सत्ता का लुफ्त उठाने वालो को जनता को हिसाब देना ही होगा| हालात कुछ ऐसे ही बन रहे है| मुफ्त लैपटॉप देने या रोजगार के स्थान पर 1 साल बेरोजगारी भत्ता देने भर से बात नहीं बनने वाली| अखिलेश यादव का ‘काम बोलता है” का नारा केवल सुविधा सम्पन्न लोगो को ही बहला सकता जिनके पास हाईवे पर चलने लायक महगी गाड़िया है| आम आदमी आज भी न्यूनतम की जरुरत पूरी करने में असफल ही हो रहा है| शिक्षा और स्वास्थ्य के नाम पर निजी शिक्षण संस्थानों और प्राइवेट हॉस्पिटल के खुलने से गरीब की जरुरत पूरी नहीं हो जाती|

जनपद फर्रुखाबाद की ही बात करे तो पिछले पाँच साल में जिले का सबसे बड़ा सरकारी अस्पताल जिसकी ईमारत किसी बड़े पञ्च सितारा अस्पताल से कम नहीं लगती, मात्र रेफर केंद्र ही बना रहा| गंभीर बीमारी के इलाज के लिए डॉक्टर तो दूर की कौड़ी है न्यूनतम जरुरत के लिए डॉक्टर की कमी हमेशा बनी रही| सर्जन है तो फिजिशियन नहीं, और फिजिशियन है तो ओर्थपेडीक नहीं| अस्पताल में दबा होने के सरकारी दावे खूब किये गए मगर लोहिया अस्पताल के चारो तरफ बने मेडिकल स्टोर पर ग्राहक सरकारी अस्पताल से ही निकला| इतना ही नहीं स्वास्थ्या सेवा उपलब्ध कराने वाले सबसे बड़े अस्पताल से 200 गज दूरी पर ही सत्ताधारी दल का पार्टी कार्यालय भी है, इसके बाबजूद अस्पताल के अन्दर और बाहर सरकारी डॉक्टर प्राइवेट प्रैक्टिस करते रहे| जिले प्राथमिक स्वस्थ्य केन्द्रों पर अधिकतर ताले ही लटके और टीकाकरण के आंकड़े खूब अच्छे दिखते रहे| जिले में मानको को ताक पर रखते हुए 50 से ज्यादा निजी अस्पताल जरुर खुल गए| जिनमे सरकारी अस्पताल से आया मरीज एक्सपोर्ट होता है|

शिक्षा के नाम पर पुराने रिटायर हुए शिक्षको के स्थान पर नए शिक्षक भारती हो गए| पहले के मास्टर रिटायर हो गए नए सर आ गए है| कोई एमबीए है तो कोई पीएचडी| ज्यादातर पढ़ाना नहीं चाहते| साल के आधे समय तो आदमी और जानवर की गिनती लगाते है| सरकारी काम है उसका मानदेय सरकार अलग से देती है| नेता जी ने कभी अपने इलाके के प्राथमिक स्कूल में जाकर नहीं देखा कि उनके वोटरों के बच्चो को पढ़ाई और उससे जरुरत की न्यूनतम मिल रही है या नहीं| जरुरत ही नहीं समझी| इन स्कूलों में उनके बच्चे तो पढ़ते नहीं| आज जिस वोटर की नेता चिरौरी कर रहा है उसी वोटर का बच्चा पांच साल से स्कूल में झाड़ू लगा रहा है| जमीन पर बैठता है, और घटिया मिड डे मील खाकर स्कूल जाने का नाटक कर रहा है| और नेता जी गरीब बच्चो के स्कूल में बैंच खरीदने के लिए विधायक निधि नहीं दी जिस पर उसके वोटर का बच्चा बैठ कर पढ़ सके| निधि निजी स्कूलों को  40 से 50 फीसद कमीशन लेकर बेच दी| पहली बार गरीबी से उठे विधायक ने बेचीं तो बेचीं खरबों की मिलकियत वाले भी इसी लाइन में रहे| न ईमान न धरम| लानत है ऐसे लोकतंत्र पर जिसमे जनता का चुना हुआ प्रतिनिधि अपनी ही प्रजा के हिस्से को खा जाता हो| फिर भी लोकतंत्र है, चल रहा है|

केंद्र सरकार  द्वारा में खाद्य सुरक्षा अधिनियम लागू करने के बाद अब तक 50000 से ज्यादा फर्जी राशन कार्ड निरस्त किये जा चुके है,  जिन पर  पिछले कई सालो से खुली लूट कोटेदारो और प्रशासनिक अफसरों ने की| और राशन कार्ड निरस्त होने का  काम आज भी चल रहा है| आज भी जिले तमाम कोटेदारो को उनके पास तय राशन कार्ड धारको से ज्यादा का राशन भेजा जा रहा है और कोटे बढ़ाने के एवज में सरकारी अफसरों ने कोई चूक भी नहीं की होगी| आंकड़े गवाह है| जबाब सरकार को देना है चुनाव सर पर है| 19 फरवरी को जनता बटन दबा कर हिसाब देगी| कब तक नेता जनता को हिन्दू मुस्लमान का आपसी खौफ दिखाकर अपना मतलब पूरा करते रहेंगे| नेता के लिए भी जनता के मन में कोई इज्जत का भाव कहीं नहीं दिखता|

आम आदमी न्यनतम की जरूरतों को पूरा करने में परेशान है| पिछले पञ्च सालो में कोई बड़ा रोजगार उत्पन्न नहीं हुआ| प्राथमिक शिक्षा में जितने मास्टर भरती हुए उतने ही रिटायर हो गए| नया रोजगार कहाँ उत्पन्न हुआ| एक एक प्राथमिक शिक्षक को नौकरी पाने के लिए 1 लाख रुपये तक आवेदन में खर्च करने पड़े|  शिक्षा का स्तर इतना घटिया और न्यूनतम हो चला है कि डिग्रीधारी सफाई कर्मी के लिए आवेदन कर रहा है| मुफ्त रेवडिया बाटने से न तो राज्य का भला होने वाला और न ही आम आदमी का| जितने रुपये से मुफ्त का प्रसाद बाटा जाने वाला है उससे नए उद्योग भी लगाये जा सकते थे और कोई नया प्रोजेक्ट भी खड़ा किया जा सकता है| मगर लोक लुहावन वादों और नारों से जनता को अपने पाले में कर लेने के लिए युवा मुख्यमंत्री भी जोर लगाये हुए है| जनता को सरकार के आखिरी साल के कार्यकाल में मिली 16 घंटे बिजली से ज्यादा 4 साल तक 16 घंटे कटने वाली बिजली शायद ज्यादा याद रहेगी| चुनाव है, जनता किसे चुने| 11 मार्च तक तो सपा बसपा और भाजपा तीनो की सरकार बन रही है| मुगालते में सब है| मगर मुगालते में अगर कोई नहीं है तो वो है ‘वोटर’ जो न्यूनतम के लिए आज भी आस लगाये बैठा है|

निजी स्कूलों पर विधायक निधि का तड़का- मनोज अग्रवाल ने दिए 3.42 करोड़ तो नरेंद्र ने दिखाया ठेंगा

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Posted on : 08-02-2017 | By : पंकज दीक्षित | In : EDITORIALS, Election-2017, FARRUKHABAD NEWS

फर्रुखाबाद: विधानसभा चुनाव 2017 में नेता गली गली विकास का डंका पीट रहे है मगर ये नहीं बता रहे है कि विधायक निधि जो जनता के टैक्स का पैसा है उसे नेताजी ने कैसे खर्च किया| तमाम बंदिशो और कानूनी अड़चनों के बाबजूद विधायको ने विधायक निधि का पैसा निजी स्कूलों पर दिल खोल कर लुटाया है| ये दरियादिली उन्होंने सरकारी स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए नहीं दिखाई| वहीँ अमृतपुर से सपा विधायक नरेंद्र सिंह यादव ने विधायक निधि निजी स्कूलों को देने से खूब परहेज किया| नेताओ के निजी स्कूलों के प्रेम को देखते हुए ऐसे में अगर जनता ये कहती है कि विधायक निधि बिकती है तो कौन सा गुनाह करती है| निजी स्कूल और शिक्षा माफिया इसी विधायक और सांसद निधि  से ख़रबपति बने और नक़ल कराकर युवाओ को अशिक्षित बेरोजगार बना रहे है| गांव देहात में आज भी नालिया और सड़के टूटी पड़ी है और विकास के लिए तरस रही है|

नगरपालिका के अंतर्गत चलने वाले म्युनिसिपल इंटर कॉलेज में टूटी बिल्डिंग के लिए जहाँ छात्रों के आमरण अनशन के बाद मनोज अग्रवाल के वादे बाबजूद भवन नहीं बना वहीँ विधान परिषद् सदस्य रहे सदर से निर्दलीय प्रत्याशी मनोज अग्रवाल ने अपने कार्यकाल की कुल खर्च की गयी विधायक निधि का 80 फ़ीसदी हिस्सा निजी स्कूलों को दे दिया| इस बात पर अध्ययन करने की जरुरत अब जनता को है कि स्कूलों को कितने प्रतिशत कमीशन पर ये पैसा मिला था|
सदर विधानसभा फर्रुखाबाद से वर्तमान विधायक विजय सिंह ने अपने पिछले पांच साल के कार्यकाल में विधायक निधि से कुल 139 विकास कार्य कराये जिनमे से 31 निजी स्कूलों को विकास का लाभ मिला| विजय सिंह की विधायक निधि से कुल 6 करोड़ 87 लाख रुपया खर्च हुआ जिसमे से 1 करोड़ 65 लाख रुपया निजी स्कूलों को नसीब हुआ|

निजी स्कूलों को जनता का पैसा बाटने में कायमगंज सपा विधायक अजित कठेरिया भी अव्वल रहे| उन्होंने अपनी पहली विधायकी में ही सभी रिकॉर्ड तोड़ डाले| अजीत में विधायक निधि से कुल 103 काम कराये जिनमे 53 काम निजी स्कूल में हुआ| कुल मिलाकर अजीत कठेरिया ने 5 करोड़ 94 लाख रुपये विधायक निधि से खर्च किये जिनमे खुद के लिए लैपटॉप के अलावा 4 करोड़ 18 लाख रुपये केवल निजी स्कूलों को ही बाट दिए| अजीत ने एक सपा नेता के स्कूल समेत चार स्कूलों को ही 1 करोड़ की सौगात से दी|

भोजपुर से सपा विधायक जमालुद्दीन सिद्दीकी ने भी शिक्षा पर खूब मेहरबानी दिखाई अलबत्ता इसके बाबजूद सरकारी आंकड़ो में शिक्षा के मामलो में कमालगंज जनपद के पिछड़े ब्लाक की श्रेणी में शामिल है| जमालुद्दीन ने पांच साल में विधायक निधि से कुल 5 करोड़ 4 लाख खर्च किये जिसमे से 3 करोड़ 12 लाख रुपये मदरसों और निजी स्कूलों को दिए|

अम्रतपुर विधानसभा से सपा विधायक और सपा प्रत्याशी नरेन्द्र सिंह यादव ने निजी स्कूलों को लगभग ठेंगा ही दिखाया| नरेन्द्र सिंह यादव ने विधायक निधि से कुल 107 कार्य कराये जिनमे स्कूलों को कुल ९ काम दिए उसमे भी रकम केवल 9 लाख रुपये ही खर्च की| नरेन्द्र सिंह यादव ने विधायक निधि का ज्यादातर हिस्सा सड़के, नाली, सोलर लाइट आदि बनबाने में ही खर्च कर दी|

जहाँ समाजवादी पार्टी काम बोलता के नारे पर प्रचार कर रही है वहीँ स्थानीय विधायक अपनी विधायक निधि के काम से जनता को लुभाने का कोई दावा नहीं कर रहे| कारण साफ़ है विधायक निधि में सब कुछ ठीक ठाक नहीं है|

चुनाव प्रचार से स्थानीय मुद्दे गायब, राष्ट्रीय मुद्दों के सहारे प्रत्याशी

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Posted on : 07-02-2017 | By : पंकज दीक्षित | In : EDITORIALS, Election-2017, FARRUKHABAD NEWS, Politics

फर्रुखाबाद: लोकतंत्र बड़ा गजब की चीज है और नेता उसमें नायाब नमूना। जनपद में 70 प्रत्याशी मैदान में हैं, मगर कमाल की चीज यह है कि किसी के पास आम जनता से जुड़ा स्थानीय मुद्दा और विकास का कोई खाखा नहीं है। विधायक निधि से सड़कें और नाली बनवाने के अलावा अगर कोई विकास होता है तो वह विधायक निधि से बनने वाले निजी स्कूल है। नेता विधायक बन जाने के बाद विधायक निधि के इस्तेमाल के अलावा क्या करेगा इसका कोई जबाब किसी नेता के पास नहीं है।

पांच साल तक आम आदमी की जो रोजमर्रा की तकलीफें हैं और जिनके लिए आम आदमी को या तो दर-दर की ठोकर खानी पड़ती है या रिश्वत देकर के काम चलाना पड़ता है, उसके लिए नेताओं के पास कोई समाधान नहीं। कोटेदार का भ्रष्टाचार, पुलिस का उत्पीड़न, सरकारी सहायता पाने के लिए लेखपाल द्वारा जारी की जाने वाली रिपोर्ट, सरकारी इलाज या किसान के ट्यूववेल का कनेक्शन हो, बिना रिश्वत आम आदमी निजात पाता नहीं दिख रहा और किसी नेता के पास अपने चुनावी पिटारे में इसका समाधान भी नहीं।

वक्त के साथ चुनाव की तकरीरें भी बदलीं और जनता की उम्मीदें भी मगर नेताओं ने अपना चुनावी फार्मूला नहीं बदला। कितने प्रतिशत सवर्ण वोट, कितने प्रतिशत ठाकुर, कितने प्रतिशत मुसलमान, कितने प्रतिशत दलित कुल मिलाकर मामला जातियों की गिनती लगाने में ही सिमट गया है। फर्रुखाबाद जनपद की चारों सीटों पर चुनाव लड़ रहे प्रमुख दलों के एक दर्जन प्रत्याशी भी इसी जमात में शामिल हैं। किसी ने रोजगार दिलाने के लिए स्थानीय तौर पर कोई कारखाना लगाने की बात नहीं की, उसके विधायक बनने पर कोटेदार ब्लैक में राशन बेचने की जगह आम जनता को ईमानदारी से बांट देगा ऐसा भी कोई वादा नहीं कर रहा और किसान को उसकी फसल के नुकसान होने पर लेखपाल बिना रिश्वत लिये मुआवजे के लिए रिपोर्ट लगा देगा ऐसी भी तकरीर एक भी नेता ने नहीं की है। कुल मिलाकर लब्बो लबाब यह है कि नेता भ्रष्टाचार के साथ है, अपराधियों को शरण दे रहा है और जनता को बेबकूफ बना रहा है। वरना राष्ट्रीय भ्रष्टाचार की जगह स्थानीय भ्रष्टाचार की चर्चा करता।

जागरूकता के दौर में अगर नेता जनता को बेबकूफ समझ रहा है तो वह उसकी सबसे बड़ी भूल होगी। 100-50 मोबाइल नम्बर जोड़कर व्हाट्सअप ग्रुप पर नेताओं की बम-बम वाली तस्वीरें खूब फायर हो रहीं हैं। मगर आम जनता में चर्चा नेताओं की उदासीनता, बेरुखी और मतलबीपन की ही हो रहीं हैं। वर्ष 2017 का चुनाव कई मायनों में इतिहास बनाने वाला है। जनता फोकट के चुनावी वादों से प्रभावित होती नहीं दिखायी पड़ रही है। सरकार बनने के बाद मुफ्त में मिलने वाले एक जीबी इंटरनेट या स्मार्टफोन की चर्चा बाजार में उतनी नहीं है जितनी कि मुफ्त बंटने वाले सामान के बजट पर आने वाले खर्च की है। क्योंकि नेता अपनी जेब से चुनावी वादे पूरा करने नहीं जा रहा जेब आयकरदाता की ही कटने वाली ही है।

विधानसभा 2017- फर्रुखाबाद की चारो विधानसभा में किस किस की इज्जत दांव पर

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Posted on : 22-01-2017 | By : पंकज दीक्षित | In : EDITORIALS, Election-2017, FARRUKHABAD NEWS

फर्रुखाबाद: अब जबकि सपा, बसपा और भाजपा तीनो मुख्य दलो ने अपने अपने प्रत्याशियो की घोषणा कर दी है, सबसे ज्यादा सिटिंग विधायको की इज्जत दांव पर होगी| उन्हें अपनी न केवल गद्दी बचानी है बल्कि ये भी साबित करना है कि वे अपने वादे पर खरे उतरे थे| विपक्षियो को कम से कम पिछले पांच साल का हिसाब भले ही न देना हो मगर वे पीड़ित जनता के कितने काम आये ये तो बताना ही पड़ेगा| फिलहाल जैसा उत्तर प्रदेश में माहौल चल रहा है, विकास और विनाश की जगह कानून व्यवस्था और जात पात के मुद्दे पर ही वोट पड़ने वाला है| नेता गला फाड़ फाड़ कर मंचो पर और मीडिया में चिल्लायेगा मगर चुनाव प्रचार का प्रोग्राम केवल और केवल जात के हिसाब से ही बनाएगा| मगर अंत में फैसला फ्लोटिंग वोट पर ही होगा यानि की लहर किसकी| क्योंकि जात के आंकड़े तो सबही के पास है| और उस हिसाब से सभी जीतेंगे|

नोटबंदी कोई मुद्दा नहीं बनेगा अलबत्ता नोटबंदी से खर्चे में कमी जरूर होगी| खबर ये थी कि कुछ नेताओ ने ग्रामीण क्षेत्रो में कुछ खास प्रधानों के माध्यम से बैंको में 1000 और 500 के नॉट जमा कराये थे वे वापस नहीं आ पाए है| आपाधापी में और रिजर्व बैक की बंदिशों के कारण ज्यादातर नेताओ का पैसा जन धन खाते में जमा होने के कारण 5000/- प्रति खाता प्रति माह ही निकल पाया है और खाताधारक ग्रामीण क्षेत्रो की बैंको में सुबह से ही लाइन नेताओ के चक्कर में लगा हुआ है| नेताओ की साख इतनी गिर चुकी है कि अब ज्यादातर नेताओ को चुनाव में कोई उधार नहीं देता| कामगार अग्रिम पैसा लेकर ही नेताजी का काम करते है| क्योंकि जीत गया तो हनक में नहीं देता और हार गया तो फिर हार ही गया…..| कुल मिलाकर मामला अर्थव्यवस्था के आसपास खूब टिकेगा| क्योंकि चुनाव आयोग भी एक आदमी को कुर्सी पर बैठाने का 8 रुपया प्रत्याशी के खाते में जोड़ेगा ही|

कुल मिलाकर नोट एक बार फिर बाटेंगे| सिटिंग विधायको को अपना हिसाब देना ही होगा| बीच चुनाव में ये मुद्दा उठेगा| जनता, सोशल मीडिया और विपक्षी कमर कैसे बैठे है| विधायक निधि कैसे कैसे कहाँ खर्च की ये सवाल झूम के उठेगा| कितनी स्कूल को दी और कितने से सड़क नाली और हैण्डपम्प कराये| नेताओ को ये भी बताना होगा कि वे कमाते कैसे है, यानि की उनका सोर्स ऑफ़ इनकम क्या है| कुछ भी हो सकता है, खेती किसानी, जमीनों का धंधा, उद्योग व्यापार, कमीशनखोरी आदि आदि| अब पब्लिक सोशल मीडिया वाली है| बड़े मिर्ची लगने वाले सवाल सोशल मीडिया पर दागने वाले है| अखिलेश यादव की मोबाइल योजना में पंजीकरण कराने वाले सभी सपाई है ऐसा सोचना आत्ममुग्ध होने से अधिक कुछ नहीं होगा|

भाजपा के स्टार प्रचारक प्रधानमंत्री मोदी ने एक नयी लकीर पिछले तीन महीने में खींची है| अमीर और गरीब के बीच की चर्चा| इसका असर जरूर दिखेगा| ग्रामीण इलाको में सुबह और शाम को चौपार में जलती पोर (अलाव) पर इसके अलावा अभी भी कोई चर्चा नहीं है| बड़े आदमी पकडे गए| गरीब इसी बात से खुश है| परेशानी भले ही हुई हो मगर किया अच्छा| इस चर्चा पर सभी शामिल होते है इसमें पार्टीबंदी लागू नहीं होती| सपा काम गिनाएगी| बसपा कानून व्यवस्था पर चिल्लाएगी| भ्रष्टाचार पर दोनों चुप रहेंगे| क्यों? इस पर शोध बाकी है| दोनों दल चुनाव बाद एक दूसरे को जेल भेजने के दावे करेंगे और भूल जायेंगे| पहले ऐसा हो चुका है| कुल मिलाकर कुछ नया होने वाला है भूल जाइये| पुराने कलमकार मुलायम के साथी जो चुनावों में अपनी लेखनी से नेताओं की मरम्मत करते थे अबकी बार साइकिल चलाएंगे| मगर नगर में चलाएंगे या फिर विदेश में ये अभी कहना मुश्किल है| वैसे राजनीती कुछ भी कराये| बाप बेटे में फूट करा दे| चाचा भतीजे में दंगल करा दे| भाई से भाई लड़ा दे|

तो एक बार फिर से मैदान ए जंग में मेजर सुनील दत्त द्विवेदी और विजय सिंह, नरेन्द्र सिंह यादव और सुशील शाक्य, अजीत कठेरिया और अमर सिंह खटिक, नागेन्द्र सिंह राठौर और अरशद जमाल सिद्दीकी मुकाबले में हाजिर है| जाँचिये, परखिये और कीजिये विचार…

मिलते है अलगे लेख में…

नोट बंदी असर: गरीब खोमचे वालो की सेल बढ़ी, शोरूम सन्नाटे में

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Posted on : 15-11-2016 | By : पंकज दीक्षित | In : EDITORIALS, FARRUKHABAD NEWS

फर्रुखाबाद; प्रधानमंत्री मोदी के 500 और 500 के पुराने नोटों के चलन से बाहर कर देने के बाद गरीबो को फायदा दिखने लगा है| रोज मजदूरी करके कमाने वालो को काम मिल रहा है| पहले भवन निर्माण में कमर तोड़ने वाली मजदूरी मिलती थी इन दिनों काले धन वाले उन्हें नोट बदलवाले के लिए ले जा रहे है| बस लाइन में लगे रहो और नोट बदलवाओ| इस दौरान उनके खाने पीने और नाश्ते का इंतजाम भी किया जा रहा है| इधर बैंको के सामने भीड़ लग है उधर रेहड़ी और ठेले वालो की लाटरी निकल आई है| भीड़ वाली जगह पर केले, मूंगफली, सेव चाट के ठेले लगाने को मिल रहे है| लाइन में लगे बोर न हो इसलिए मूंगफली का लिफाफा हर तीसरे हाथ में नजर आ रहा है| अब योजना का विरोध करने का मतलब ये भी हो सकता है कि

वैसे किसी भी घटना के दो पहलु होते ही है| नजरिया आपका है कि आप किस अंदाज में किस नजरिये से उसे देखते और महसूस करते है| घर की वो महिलाए जो बाहर जाने तो तरसती रहती है उन्हें खुले में लाइन में लगकर नोट बदलना किसी नए काम को सीखने जैसा लग रहा है| हालाँकि कुछ बुजुर्ग महिलाए और पुरुष जिनकी उम्र लाइन में लगने की नहीं रह गयी है उन्हें मजबूरी में लगना पड़ रहा है| तकलीफ हो रही है| मगर ऐसे लोगो को तकलीफ केवल नोट बदलने में ही हो रही है ऐसा नहीं है| उन्हें तो कोटेदार से भी हर माह दो चार पड़ रहा है जहाँ लाइन भी है, घटतौली भी है और घटिया सामान भी मिलता है| मोदी के फैसले का विरोध करने वाले शायद उनकी तकलीफों को दूर करने के लिए कभी कोटेदारो से नहीं भिड़े होंगे| खैर नजरिया अपना अपना है| सबसे बड़ा दर्द तो उस आदमी का है जो काला धन लिए बैठा है| ऐसे लोगो की कमाई पर बट्टा लगा है|

8 नबम्बर की रात 8 बजे जब भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पुराने नोटों को बंद करने का फैसला लिया उसके तुरंत बाद हमारे एक व्यापारी मित्र ने तर्क किया की इससे भाजपा को नुक्सान होगा| समझाने में मैंने सिर्फ इतना ही कहा की पिछले 70 साल में इस देश में हर फैसले सिर्फ वोट बैंक को निशाने पर रख कर किये गए कभी राष्ट्र हित में फैसला नहीं हुआ, इस बार हुआ है| नरेगा चालू हुई इसमें 18 साल से ऊपर के लोगो को काम मिलना था| उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने लैपटॉप बाटे जिन्हें भी 18 साल से ऊपर की उम्र के लोगो को मिलना था| समाजवादी पेंशन योजना में भी शत प्रतिशत वोटरों को ही फायदा मिलना है| कुल मिलाकर चुनावों में घोषित की गयी भिविन्न पार्टियों द्वारा योजनाओ पर नजर डाले तो निशाने पर कहीं न कहीं वोटर ही रहा| शून्य से 17 साल तक उम्र वालो के लिए क्या हुआ| केंद्र सरकार का प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षा का सालाना बजट कुल 23 हजार करोड़ से ज्यादा अब तक न हो पाया जबकि समाजसेवा के नाम पर देश में प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा के प्राइवेट स्कूलों की कमाई 1 लाख 32 हजार करोड़ सालाना से ज्यादा है| ये प्राइवेट स्कूल चलाने वाले कोई आम आदमी नहीं है| पिछले सत्तर सालो में केंद्र और राज्य सरकारों के संरक्षण में इन्हें फलने फूलने का मौका मिला| इन संस्थानों में पढ़ने वाले बच्चे वोटर नहीं थे लिहाजा इन्हें न तो लैपटॉप मिला और न ही इनके लिए केंद्र और राज्य सरकार ने मनरेगा जैसी कोई टैक्स पोषित योजना से लाभ पहुचाया| चूँकि वे वोटर नहीं थे|

आजाद भारत में देश के अपना सविधान लागू होते समय आरक्षण को दस साल के लिए लागू किया गया था मगर उसे सात बार बढ़ाया गया| चूँकि उसे बढ़ाए जाने या बंद किये जाने से वोटर प्रभावित हो रहा था| देश की सत्ता के शीर्ष पद पर बैठ कर राष्ट्र हित की जगह वोट हित में फैसला लेने का सिलसिला चलता रहा है| कोई बदलाव आया तो विरोध और समर्थन की स्थिति सामने आई है| मोदी ने नोट बंदी के फैसले से एक लकीर खीच दी है जहाँ से दो रास्ते होने तय है| वनवास या एक बार फिर राजतिलक| जनता उन्हें किस रास्ते पर भेज ये जनता पर छोड़ दीजिये| जनता को बरगलाने की कोशिश राजनितिक दल न करे तो ही अच्छा क्योंकि अब तकनीक की क्रांति का युग है| आप तो बस राजेश खन्ना पर फिल्माया और किशोर कुमार का गया फिल्म “रोटी’ के गीत का आनद ले– ये पब्लिक है सब जानती है….|

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