सरकारी विज्ञापन एसएमएस व वेबसाईट पर भी जारी होंगे- डीएवीपी

Uncategorized

इंटरनेट व मोबाइल के बढ़ते जाल का फायदा उठाने के लिए सरकार ने सरकारी विज्ञापनों को प्राइवेट सेक्टर की भारतीय वेबसाईट और एसएमएस सेवा से भी जारी करने का फैसला किया है| भारत सरकार के डीएवीपी यानि विज्ञापन एवं द्रश्य प्रचार निदेशालय ने इस आशय का पत्र डीएवीपी पर जारी किया है| एक निश्चित सीमा से अपर के पाठको वाली वेबसाईट और एसएम्एस प्रोवाइदर सरकारी विज्ञापन के लिए अपना पंजीकरण डीएवीपी पर करा सकते है|

अखबारों की प्रसार संख्या में धांधली कर ऊँचे रेट हासिल करने की कला इस क्षेत्र में नहीं चलने वाली क्यूंकि इसमें गूगल अनालिटिक पर मापे गए प्रतिदिन/प्रतिमाह के पाठक ही मान्य होंगे| ऐसी स्थिति में किसी भी वेबसाईट के लिए उसकी वेबसाईट के पाठको के झूठे आंकड़े पेश करना संभव नहीं होगा| इस प्रकार का घालमेल अखबारों में खूब हो रहा है| बाजार से और सरकार से मिलने वाले विज्ञापन की दरो को ऊँचा करने के लिए अखबार अधिक संख्या में छापा जाता है और जिलास्तर पर मौजूद एजेंसी इन अतिरिक्त अखबारों को डम्प करती है| क्यूंकि 16 रुपये प्रतिकिलो बिकने वाली अखबार की रद्दी भी इतनी कीमत की होती है कि उसे अखबार बाटने की बजाय रद्दी बेचने में ज्यादा फायदा होता है| अखबारों में बढ़ती प्रतिद्वान्धिता के चलते बड़े बड़े अखबारों में ये शीत युद्ध चलता है| उत्तर प्रदेश के कई शहरो में ये कारनामा होता रहा है| इस प्रकार की खबरे मीडिया की खबरों को प्रकाशित करने वाले पोर्टल www.bhadas4media.com पर देखी जा सकती है|

डी ए वी पी की एक रिपोर्ट के मुताबिक ग्रामीण अंचलो में अखबारों की नगण्य पहुच के चलते सरकार ने वेबसाईट और मोबाइल पब्लिशर (समस) का इस्तेमाल सरकार की योजनाओ को पहुचाने का फैसला लिया| वेबसाईट और मोबाइल पर सरकारी विज्ञापन लेने के लिए पंजीकरण प्रपत्र डीएवीपी की वेबसाईट पर उपलब्ध है|