रक्षाबंधन स्पेशल: बाजार से गायब हो रही रेशम की राखी

FARRUKHABAD NEWS FEATURED धार्मिक सामाजिक

फर्रुखाबाद: रेशम के धागे की शुमार खूबसूरती में तो की जाती है, लेकिन मजबूती की कोई गारंटी नहीं होती… इसके बावजूद यह एक ऐसा धागा है जो भले ही मजबूत नहीं होता, लेकिन इस धागे से बंधे रिश्ते इतने मजबूत होते हैं जिन्हें जन्मों तक नहीं तोड़ा जा सकता है… जी हां हम बात कर कर रहे हैं रक्षा बंधन पर बहनों द्वारा भाइयों को बांधी जाने वाली उस राखी कि, जिसकी शुरुआत रेशम के धागे से हुई थी… आज रेशम के धागे से बनी राखियां बाजार में कम नजर आती हैं, लेकिन उसके विकल्प के तौर पर बाजार में तरह-तरह की राखियां मौजूद हैं… देखिए जेएनआई की खास रिपोर्ट…
भाई बहन के अटूट प्यार का त्योहार रक्षाबंधन को लेकर बाजारों की रौनक भी बढ़ गई है। शहर के नेहरु रोड, रेलवे रोड, भोलेपुर, फ़तेहगढ़ बाजार में राखी की दुकानें सजीं हैं। जर्किंन राखी बीस से 200 रुपये तक, कुंदन की बीस से साठ रुपये तथा चाइनीज राखी दस से अस्सी रुपये तक की है। सबसे ज्यादा बिक्री साठ रुपये की जर्किन राखी की है। तीस रुपये की स्टोन की राखी की है।
बच्चो को पसंद आ रही म्यूजिक और लाइट वाली राखियाँ
बाजार में बच्चों को लुभाने के लिए दुकानदारों ने म्यूजिक व लाइट वाली राखियों जो सजाया
है| जिसे नौनिहाल खूब पसंद कर रहे है| रेलवे रोड पर दुकान लगाये राखी विक्रेता संजय कुमार पटवा ने बताया कि म्यूजिक वाली राखी 70 से 80 रूपये और लाइट वाली राखी लगभग 50 रूपये में बेंची जा रही है|
राजस्थान व कलकत्ता की बनी राखियों की भरमार
बाजार में दुकानदार अधिकतर दिल्ली से राखी खरीद कर लाते है| दिल्ली में राखी राजस्थान और कलकत्ता से बनकर पंहुच 
रही है| अधिकतर राजस्थानी राखी की डिमांड है| जिस पर राजस्थान का लुक साफ दिखता है|
एक ही राखी से होंगे एक पंथ दो काज
दरअसल इस बार 15 अगस्त और रक्षाबंधन का त्योहार एक साथ हो रहा है| जिसका ध्यान राखियों के व्यापारियों नें रखा है| इस बार तिरंगे वाली राखियाँ स्कूली बच्चो को भा रही है| उस राखी में तिरंगे का लुक दिया गया है|
तलाशने पर भी नजर नही आ रही रेशम की राखी 
बाजार में इस आधुनिक राखियों ने जगह बना ली है| रेशम का धागा केबल पूजा आदि में ही प्रयोग के लिए रह गया है| बाजार में रेशम की राखी तलाशने पर ही नजर नही आती है|

(नगर प्रतिनिधि प्रमोद द्विवेदी की रिपोर्ट)