भदंत विजय सोम इंटर कॉलेज में प्रधानाचार्य प्रताप बहादुर के 7 रिश्तेदारो की नियुक्तियां रद्द

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corruptionफर्रुखाबाद: माध्यमिक शिक्षा निदेशक अमर नाथ वर्मा ने सपा नेता प्रताप बहादुर सिंह शाक्य के परिवार के 7 सदस्यों की अवैध तरीके से दी गयी नौकरी छीन ली| मामले को निपटाने में पूरे तीन साल और 2 बार अदालत को कड़ा रुख अख्तियार करना पड़ा| अल्पसंख्यक संस्था के नाम पर प्रधानाध्यापक ने पत्नी, दो भाई, दोनों भाइयो की पत्नियों, एक भतीजे और एक चचेरे भाई को सहायक अध्यापक बना डाला| जबकि शिक्षा निदेशक के आदेश के अनुसार प्रबंध समिति को अपने किसी भी रिश्तेदार को शैक्षिणिक कार्य के लिए नियुक्ति देने का अधिकार नहीं है|

रद्द की गयी नियुक्तियों में प्रधाचार्य प्रताप बहादुर सिंह के सेज संबंधी इस प्रकार है-
१- राजीव कुमार सिंह – भाई
२- संजीव कुमार सिंह- भाई
३- अजीत प्रताप सिंह- भाई का पुत्र
४- मंजू कुशवाहा- प्रताप बहादुर की पत्नी
५- मधु कुशवाहा- भाई संजीव की पत्नी
६- सुजाता कुशवाहा- भाई राजीव की पत्नी
७- देवेन्द्र सिंह – पिता के भाई के पुत्र

अदालत के आदेश पर फैसला देते हुए अमरनाथ वर्मा ने लिखा है कि पूरी विवेचना (पक्ष और विपक्ष को सुनने के बाद) में तथ्य निकल कर आया है कि भदंत विजय सोम इंटर कॉलेज संकिसा फर्रुखाबाद में विभिन्न तिथियों में प्रबंश समिति द्वारा नियुक्त उपरोक्त सहायक अध्यापक जो कि प्रधानाध्यापक के संबंधी है की नियुक्ति पूर्णरूपेण इंटरमीडिएट शिक्षा अधिनियम 1921 के अध्याय तीन के विनिमय 4 के प्रतिकूल एवं नियम विरुद्ध तथा अनियमित होने के कारन निरस्त करते हुए माँननीय उच्च न्यायालय में योजित रीत याचिका संख्या 22560/2014 सुबोध कुमार यादव बनाम उत्तर प्रदेश राज्य व् अन्य में पारित निर्णय दिनाक 21.4.2014 के अनुपालन में प्रकरण एतद्द्वारा निस्तारित किया जाता है|

हालाँकि प्रबंधन द्वारा कहा गया कि चूँकि संस्था अल्पसंख्यक है लिहाजा उस पर सविधान की धारा ३०(१) के तहत अधिकार प्राप्त है कि प्रबधक और प्रधानाचार्य अपने विद्यालय में नियुक्ति कर सकते है और उन पर उत्तर प्रदेश का अन्य कोई नियम मान्य नहीं है| मगर सवाल एक बड़ा ये भी है सामाजिकता (स्कूल चलना समाज सेवा का कार्य है ) का ढोल पीटने वालो को अपने परिवार के अलावा कोई अन्य योग्य व्यक्ति नहीं मिला शिक्षक रखने के लिए| स्कूल के प्रथम प्रधानाचार्य पूर्व सपा नेता स्व लाल बहादुर शाक्य थे और उन्होंने अपने कार्यकाल में ही अपने बड़े पुत्र प्रताप बहादुर को प्रवक्ता नियुक्त कर दिया था| समाजवादी नेता थे, (हालाँकि विधायकी के लड़े चार चुनावो में से एक भी नहीं जीते) मुलायम सिंह के करीबी थे| जब जब सपा की सरकार आई काम बन गया| अब एक अदालत ही है जो बार बार समाजवादी पार्टी और उनके कार्यकर्ताओ को झटके पर झटके दे रही है|

नियुक्ति की फाइल पर दस्खत करने वालो को कोई दंड नहीं?
वकौल शिक्षा निदेशक नियुक्ति मामले में अवैधता हुई है| मगर इस अवैधता पर मुहर जो तत्कालीन जिला विद्यालय निरीक्षक रहे होंगे उन्होंने भी लगाई होगी| अब माल खाकर बिना पढ़े फाइल पर हस्ताक्षर तो नहीं किये होंगे फिर उन्हें दोषी क्यों नहीं ठहराया जाता| सवाल बड़े ही है| मगर जबाब किसी के पास नहीं| कॉलेज खोल कर धंधा चलाने वाले इस जिले में कैसे कैसे है इस पर तो पूरी पुस्तक लिखी जा सकती है| एक इंटर कॉलेज में तैनात शिक्षक प्रबंधक के पेट्रोल पम्प पर प्रबन्धकी करते है तो एक प्रधानाचार्य दूसरे इंटर कॉलेज के प्रबंधक भी है| किस्से शिक्षा की ऐसी तैसी के बड़े है उनमे से भदंत विजय सोम इंटर कॉलेज तो एक नमूना मात्र है|