टीम सचिन- इलेक्शन मैनेजमेंट से वोटर मैनेजमेंट तक

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Sachinफर्रुखाबाद: उम्र जरूर नई लगती है मगर तजुर्बा पुराना है| खेलने खाने की उम्र में ही सचिन यादव राजनीति में उत्तर चुके थे| पिछले दो चुनाव वे अपने पिता को लड़ा और जिता चुके है| उन चुनावो में सचिन यादव ने जो फाइल तैयार की थी और जिस युवा को अपने पिता के साथ जोड़ने में कामयाब हुए थे वही युवा आज सचिन यादव को चुनाव लड़ा रहे है|

एक एक गाव और एक एक बूथ की अलग अलग फाइल| किस बूथ पर कौन कौन साथ है और कौन कौन विरोधी| सब कुछ फाइल में दर्ज| नए बदलते समीकरणों में घटाने जोड़ने का पूरा ब्यौरा किसी सरकारी दफ्तरी फाइल की तरह| चुनाव लड़ने का तरीका और उसे अमली जामा पहनाने का काम खुद सचिन यादव पहले से ही कर रहा था|

कार्यकर्ताओ को ट्रेनिंग
कार्यकर्ताओ को बाकायदा ट्रेनिंग दी जा रही है| क्या भाषण देना है और जनता से क्या और कैसे कहना है| इसके लिए बाकायदा एमबीए डिग्रीधारियों की टीम वर्कशॉप करती है| मकसद हर जनता तक बात पहुचाना|

सुबह अपने पिता के साथ कुछ मुद्दो पर चर्चा के बाद दोनों अलग अलग दिशा में प्रचार पर निकल जाते है| जो साथी कभी उनके साथ गाड़ी में चलते थे उनमे से अब कई टीम लीडर बनकर अलग अलग चलने लगे है| टीम लीडर में ज्यादातर चेहरे पुराने सपाई है और नए जुड़ रहे युवाओ के साथ प्रचार पर है|

हर गतिविधि पर निगाह
देर रात प्रचार से लौटने के बाद सचिन एक बार फिर से दफ्तरी का काम संभालते है| कौन से गाड़ी कहा रही, किस कार्यकर्ता को कहाँ कहा कैसा माहौल दिखाई पड़ा| क्या समस्या है और क्या निदान| एक एक फ़ाइल खोलते जाना और अलगे दिन के लिए दिशा निर्देश देने के साथ ही अगले दिन की व्य्तनी बन जाती है|

इलेक्शन मैनेजमेंट से लेकर वोटर मैनेजमेंट तक पर निगाह रखकर चुनाव की तयारी कर रहा सचिन यादव अपनी रणीनीति में कितना सफल होंगे ये तो 16 मई का परिणाम तय करेगा मगर एक बात जरूर है कि युवाओ को जोड़ने में कामयाबी जरूर पाई है|