दावे और वादे हवा हवाई- यूपी सरकार ने यूनिफॉर्म वितरण का आदेश तो भेजा मगर पैसा नहीं

Uncategorized

लखनऊ। प्रदेश में बेसिक शिक्षा परिषद के संचालित 1.59 लाख स्कूलों के पौने दो करोड़ बच्चे सरकार की लेटलतीफी व अनिर्णय का खामियाजा भुगत रहे हैं। दावा तो बेहतरीन यूनिफार्म देने का था लेकिन शैक्षिक सत्र शुरू होने के 15 दिन बाद भी नहीं बंट सकी है। नये सत्र में भी बच्चे पुरानी घिसी हुई यूनिफॉर्म या फिर घरेलू कपड़े पहन कर स्कूल आने के लिए मजबूर हैं।

यह स्थिति तब है जब सर्व शिक्षा अभियान के प्रोजेक्ट अप्रूवल बोर्ड ने अप्रैल में ही सूबे के परिषदीय स्कूलों के 1.77 करोड़ बच्चों के लिए प्रति बच्चा 400 रुपये की दर से दो सेट यूनिफॉर्म के लिए 710 करोड़ रुपये की राशि मंजूर की थी। राशि मंजूर होते ही सरकार यूनिफॉर्म के नये रंग की तलाश में जुट गई। यूनिफॉर्म के लिए शासन स्तर पर खाकी रंग तय होने के बाद सचिव बेसिक शिक्षा परिषद ने 31 मई को सभी मंडलीय सहायक शिक्षा निदेशकों और जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों को सरकार के निर्णय से अवगत भी करा दिया। अधिकारियों को स्कूलों में यूनिफॉर्म के लिए अपने स्तर से त्वरित कार्यवाही सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। बावजूद इसके स्कूली बच्चों को यूनिफॉर्म बांटने के लिए अब तक जिलों को राशि नहीं मुहैया करायी गई है।
[bannergarden id=”8″][bannergarden id=”11″]
यूनिफॉर्म वितरण को लेकर सर्व शिक्षा अभियान के राज्य परियोजना कार्यालय व शासन के बीच पत्राचार जारी है। स्कूलों में यूनिफॉर्म का वितरण विद्यालय प्रबंध समितियों (एसएमसी) के जरिये किया जाना है। शिक्षा के अधिकार अधिनियम के तहत परिषदीय स्कूलों में विद्यालय प्रबंध समितियों के गठन के लिए 28 जून 2011 को शासनादेश जारी हुआ था। समितियों का कार्यकाल दो साल का है। समितियों का कार्यकाल पूरा होने को है। शासन स्तर पर पसोपेश है कि यूनिफॉर्म का वितरण स्कूलों में गठित मौजूदा विद्यालय प्रबंध समितियों की देखरेख में कराया जाए या नई प्रबंध समितियों के गठन के बाद उनके माध्यम से।