Home Blog Page 5801

जन्म से पूर्व ही बच्चे होने लगे ऑनलाइन

अपने प्रिय दोस्तों के नवजात शिशुओं को देखने के लिए अस्पताल जाना अब पुराने दिनों की बातें होने वाली हैं। क्योंकि अब अभिभावक भी जमाने के साथ तेजी से नई तकनीकों का इस्तेमाल करने लगे हैं। नवजात शिशु के जन्म लेते ही अभिभावक अपने बच्चों को ऑनलाइन कर देते हैं। उनकी फोटो इंटरनेट पर डाल देते हैं ताकि उनके सभी परिचित इंटरनेट पर ही बच्चे को देख लें।

एक नई रिसर्च के मुताबिक दस में से आठ बच्चे जन्म लेने के तुरंत बाद ही इंटरनेट पर उपलब्ध हो जाते हैं। इसके अलावा कुछ अभिभावक तो उनके बच्चों के जन्म से पूर्व ही उनका ई-मेल बना चुके होते हैं और कुछ अपने बच्चों का प्रोफाइल फेसबुक पर डाल देते हैं। यदि आंकड़ों की मानें तो नई तकनीकों का इस्तेमाल करते हुए आज के अभिभावक अपने नवजात की फोटो इंटरनेट पर डाउनलोड करने में देरी नहीं करते हैं और साथ ही उनका अकाउंट भी खोल देते हैं।

इतना ही नहीं इन दिनों तो अभिभावक अपने शिशु के जन्म से पहले की गर्भ की स्केनिंग वाली फोटो तक भी डाउनलोड करने लगे हैं। कुछ 4 प्रतिशत अभिभावक अपने बच्चों का ई-मेल बना देते हैं, भले ही उसका इस्तेमाल बच्चों को कई वर्षों के बाद करना होता है। इस शोध में ब्रिटेन और आठ अन्य औद्योगिक देशों की करीब 2200 माताओं को शामिल किया गया था।

जिसमें पाया गया कि ब्रिटेन के 23 प्रतिशत बच्चे अपने जन्म से पहले ही इंटरनेट पर नजर आने शुरू हो गए हैं। उनकी माताएं उनकी सोनोग्राम वाली फोटो ऑनलाइन डाउनलोड कर रही हैं। कुछ 37 प्रतिशत माताएं बच्चों के जन्म के तुरंत बाद उनकी फोटो डाउनलोड करने में देरी नहीं करती है।

मक्खन लगाने वाले प्रत्याशियों की किस्मत मतदाताओं के हाँथ

फर्रुखाबाद: पंचायत चुनाव में खड़े उम्मीदवारों के चेहरे खिलने के साथ साथ मायूसी भी छाई हुई है. कल ११ अक्टूबर २०१० को बढ़पुर और कमालगंज ब्लाक के चुनाव की सारी तैयारियां पूरी कर ली गयी है. २.८७ लाख से अधिक मतदाता दोनों विकास खंडो के ४०८७ प्रत्याशियों की किस्मत का ताला खोलेगें.

वहीं मतदाताओ के मक्खन लगा रहे प्रत्याशियों में सरगर्मियां तेज हो गयी है, बोट डालने के लिए बाहर से मेहमान भी पधार चुके है. लोग यह नजारा देख कर दंग हो रहे है की सगे भाई जेठानी-देवरानी एक दूसरे की फजीहत कर चुनाव के लिए अपना ही घर तोड़ रहे है तो ये प्रत्याशी पता नहीं गाँव बालो को कितना जोड़ पाएगें. कुछ तो प्रत्याशी अपनी जमीन व् भैस वेच कर प्रधान बनने का ख्वाब संजोये बैठे है प्रत्याशी मतदाताओं को दारू, मुर्गा व् जलेवी बाँट कर मक्खन लगा रहे है. मतदाता भी सोचते है लगाने दो मक्खन खाओ और ऐसी डकार मारना कि मक्खन लगाने बालो का ही मक्खन निकल जाए.

JNI स्पेशल: (जोक) बॉस तो मुझे होना चाहिए…

एक दिन ईश्वर एक इंसान को बना रहे थे। इस दौरान शरीर के अंगों के बीच बॉस बनने की जंग छिड़ गई। हर कोई बॉस बनने के लिए अपनी अपनी दलीलें पेश करने लगा।

दीमाग: मेरे नियंत्रण में तो पूरा शरीर रहता है, ऐसे में बॉस मुझे होना चाहिए।

पैर: नहीं..नहीं.. तुम तो बस सोच सकते हो वो मेरी मरजी है कि मैं तुम्हारी दिखाई दिशा पर चलूं या न चलूं बॉस मुझे होना चाहिए।

हाथ: अरे भई ! सिर्फ सोचने और चलने से तो कुछ नहीं होता मेरे छुए बिना तो कोई काम हो ही नहीं सकता। बॉस मुझे होना चाहिए।

आंखे: लेकिन जब तक मैं चीज को देखूं नहीं हाथ, पैर, दीमाग तुम लोग कोई भी काम का पता कैसे लगा सकोगे। ऐसे में बॉस की असली दावेदार मैं हूं।

इस तरह शरीर का हर अंग बॉस बनने के लिए अपनी अपनी दलीलें पेश कर रहा था। तभी एक आवाज आई.. बॉस मुझे होना चाहिए। यह सुनकर सब हंसने लगे एक ने कहा तुम्हें तो सिर्फ धड़कना आता है..और तुम कर ही क्या सकते हो।

दिल: दीमाग तुम बस सोच सकते हो, हाथ तुम बस छू सकते हो , आंखे सिर्फ देख सकती हैं और पैर सिर्फ चल सकता है। लेकिन यह सब मेरे दम पर ही तो हो रहा है। अगर मैने काम करना बंद कर दिया तो शरीर मर जाएगा और तुम सब बेकार हो जाओगे। ऐसे बॉस तो मुझे होना चाहिए।

पाठ:-

जी हां, सोचने से कोई बॉस नहीं होता। बॉस वो होता है जिसके न होने से सब कुछ बिखर जाए। जैसे धड़कने बंद होने पर शरीर मर जाता है।

चिट्ठी न कोई संदेश, …जहां तुम चले गए

सूचना प्रौद्योगिकी युग में नित नए अविष्कारों के बीच मशीनें और रफ्तार भले ही बढ़ी हों, लेकिन मिट्टी और दिल से जुड़ी बहुत सी चीजें गायब हो गई हैं। अब पिया की पाती के इंतजार में कोई दरवाजे पर नजर नहीं टिकाता, मनीआर्डर की आस में बूढ़े मां-बाप डाकिए का इंतजार नहीं करते और तार आने पर अमंगल की आशंका से माथे पर चिंता की लकीरें पड़ने का सिलसिला भी खत्म हो गया है।

अत्र कुशलम तत्रास्तु, आदरणीय पिताजी को सादर चरण स्पर्श। आगे समाचार यह है कि मैं यहां पर ठीक प्रकार से हूं और आशा करता हूं कि ईश्वर की कृपा से आप भी कुशल मंगल से होंगे और बड़ों को नमस्ते, छोटों को प्यार जैसे वाक्य अब कहीं दिखाई नहीं देते।

संचार क्षेत्र में टेलीफोन और मोबाइल क्रांति ने खतों की इस दुनिया को लगभग खत्म सा कर दिया है। पहले लोग दूर दराज रहने वाले अपने नाते रिश्तेदारों को पोस्टकार्ड और अंतर्देशीय के जरिए संदेश भेजा करते थे और पत्र लिखने की बाकायदा एक शैली होती थी। हर घर में पोस्टकार्ड की लोकप्रियता और सर्वसुलभता का यह आलम था कि सरकार ने दशकों तक पोस्टकार्ड की कीमत में कोई इजाफा नहीं किया।

भारतीय डाक विभाग के विपणन अधिकारी आरके सिंह ने कहा कि मोबाइल क्रांति ने लोगों से लोगों के बीच संपर्क की व्यवस्था को पहले के मुकाबले कहीं अधिक मजबूत किया है। लेकिन इससे डाक विभाग की पत्र व्यवस्था पर नकारात्मक असर पड़ा है।

उन्होंने कहा कि अब अंतर्देशीय और पोस्टकार्ड की बिक्री लगभग न के बराबर होती है। टेलीग्राम भी अब न के बराबर होते हैं। पहले ये दोनों चीजें डाक विभाग की आय का मुख्य स्रोत हुआ करती थीं। सिंह ने कहा कि हालांकि अब स्पीड पोस्ट और पार्सल ने आय के प्रमुख स्रोत की जगह ले ली है।

विश्व डाक दिवस अंतरराष्ट्रीय डाक यूनियन की स्थापना के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। पत्रों के घटते महत्व को लेकर दुनियाभर का डाक तंत्र चिंतित है। यूनेस्को के सहयोग से अंतरराष्ट्रीय डाक यूनियन हर साल पत्र लेखन प्रतियोगिता का आयोजन करती है और इसके विजेताओं को विश्व डाक दिवस पर सम्मानित किया जाता है। प्रतियोगिता का उद्देश्य डाक लेखन की घटती विधा को बचाना है और यह आयोजन पिछले 35 साल से हो रहा है।

बेसिक व मिडिल स्कूलों में एक हेडमास्टर

उत्तर प्रदेश में एक ही कैम्पस में चलने वाले बेसिक व उच्च प्राथमिक विद्यालय अब एक हेडमास्टर के अधीन होंगे।

इस व्यवस्था को लागू करने पर शासन स्तर पर सहमति बन चुकी है। इसके क्रियान्वयन के लिए बेसिक शिक्षा निदेशक से स्कूलों का आंकलन कर 15 नवम्बर तक रिपोर्ट देने को कहा गया है।

शैक्षिक सुधारों के लिए प्रमुख सचिव दुर्गाशंकर मिश्र की अध्यक्षता में गठित समिति ने सहायक बेसिक अधिकारियों से सुझाव मांगे थे। इस सिलसिले में उत्तर प्रदेश विद्यालय निरीक्षक संघ के प्रतिनिधियों ने भी शासन को अपने सुझाव दिये थे। संघ ने एक ही कैम्पस और एक ही मजरे में चलने वाले कक्षा एक से पांच तक तथा उच्च प्राथमिक स्कूलों में अलग-अलग हेडमास्टर के बजाय एक ही हेडमास्टर की नियुक्ति समेत कई सुझाव दिये।

संघ के इन्हीं सुझावों पर प्रमुख सचिव दुर्गाशंकर मिश्र की अध्यक्षता में बैठक हुई। इसमें सचिव बेसिक शिक्षा अनिल संत, माध्यमिक शिक्षा सचिव जितेन्द्र कुमार, सचिव मुख्यमंत्री चन्द्रभानु, निदेशक माध्यमिक शिक्षा संजय मोहन और निदेशक बेसिक शिक्षा दिनेश कनौजिया और विभाग के अन्य अफसरों के अलावा संघ के महामंत्री प्रमेन्द्र कुमार शुक्ल और प्रकाशन मंत्री अजय विक्रम सिंह भी मौजूद थे।

बैठक में संघ के प्रस्ताव पर विचार करते हुए तय हुआ कि प्रबंधन लागत में कमी लाने और शिक्षकों की कमी दूर करने के लिए एक ही मजरे और एक ही कैम्पस में चलने वाले बेसिक और उच्च प्राथमिक स्कूलों को कक्षा एक से आठ तक का दर्जा देते हुए वहां एक ही हेडमास्टर के हवाले शिक्षण कार्य कर दिया जाय। प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री दुर्गाशंकर मिश्र ने इस बारे में बेसिक शिक्षा निदेशक दिनेश कनौजिया को प्रदेश में संचालित हो रहे ऐसे स्कूलों का ब्यौरा एकत्र कर 15 नवम्बर तक रिपोर्ट शासन को देने को कहा है। संघ के अन्य सुझावों पर बाद में विचार होगा।

पंचायत चुनाव के दिन दुकानें बंद रखने का निर्देश

उत्तर प्रदेश सरकार ने पंचायत चुनाव के दिन इलाके के कमर्शियल कॉम्प्लेक्स, दुकानों को बंद रखने और क्षेत्र में चलने वाले कारखानों

के मजदूरों को मतदान करने के लिए जाने की छूट देने को कहा है।

एक बयान के अनुसार, प्रदेश के लेबर डिपार्टमेंट ने नोटिस जारी कर राज्य के सभी डिस्ट्रिक्ट ऑफिसर्स और लेबर डिपार्टमेंट से जुड़े सभी अधिकारियों को निर्देश दिया है कि प्रदेश में होने वाले पंचायत चुनावों के दौरान वह सुनिश्चित करें चुनाव के दिन उस इलाके की दुकानें और कमर्शियल संस्थान बंद रहें।

इसके अतिरिक्त अगर इलाके में लगातार चलने वाले कारखाने हैं तो उसके सभी कर्मचारियों और मजदूरों को मतदान करने का मौका दिया जाए और बाकी कारखानों मेंमतदान के दिन सार्वजनिक अवकाश घोषित किए जाएं। श्रम विभाग ने सख्ती से पालन करने को कहा है।

गौरतलब है उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनावों के तहत चार चरणों में 11 अक्टूबर, 14 अक्टूबर, 20 अक्टूबर तथा 25 अक्टूबर को मतदान होने हैं।

पंचायत चुनाव में लालपरी और कच्ची का बोलवाला

पंचायत चुनाव में कुर्सी की रेस को हर कोई जीतना चाहता है, भले ही यह किसी की जिंदगी की कीमत पर क्यों न हो। जिंदगी को लील रही लाल परी और कच्ची शराब न जाने कितने नाम हैं इसके जिसे बांटने से पंचायत चुनाव में खड़े प्रत्याशियों को कोई गुरेज नहीं है और न ही पीने वाले ग्रामीण इससे सबक ले रहे हैं। ‘कच्ची’ की बलि चढ़ रहे लोगों को बचाने के लिए शासन-प्रशासन की मुस्तैदी को चकमा देकर प्रत्याशी नये हथकंडे अपना रहे हैं। तू डाल-डाल तो मैं पात-पात की तर्ज पर जहां कच्ची शराब नहीं मिल पा रही है वहां अब इसके विकल्प के रूप में प्रत्याशी मतदाताओं को लुभाने के लिए इथनॉल व मिथनॉल स्प्रिट की व्यवस्था अवैध तरीके से शराब के कारखानों से कर रहे हैं।

जानकारी के अनुसार एक लीटर इथनॉल में कितना पानी मिलाकर पीने लायक शराब बनायी जाए यह ज्ञान प्रत्याशियों एवं उनके समर्थकों को नहीं है। इस वजह से थोड़ा बहुत पानी मिलाकर ही इसे मतदाताओं को पिला दिया जा रहा है। कहीं- कहीं मिथनॉल (मिथाइल स्प्रिट) भी प्रत्याशियों ने गैलनों में मंगा लिया है। इसमें थोड़ा बहुत पानी मिलाकर मतदाताओं को पिलाने की व्यवस्था कर ली गयी है। पियक्कड़ मतदाता जल्द असर करने वाली शराब के चक्कर में इसे अपना रहे हैं। इस वजह से उनकी अतडि़यों के जलने और आंखें खराब होने तथा अंतत: मौत का शिकार होने का खतरा बना हुआ है।

मिर्च बढाए मुंह का स्वाद और चेहरे की सुन्दरता

खाने में स्वाद बढ़ाने वाली मिर्च अब चेहरे की सुंदरता भी बढ़ाएगी। हाल ही में वैज्ञानिकों ने भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान में पेप्रिका नाम से मिर्च की नई किस्म विकसित की है। यह तीखी नहीं होती तथा अपने प्राकृतिक रंग के कारण महिलाओं की सौंदर्य सामग्री एवं लिपस्टिक के निर्माण में विशेष योगदान देगी।

बनारस स्थित अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिक राजेश कुमार ने अपने सहयोगियों के साथ इस मिर्च को विकसित किया है। इसे आईवीपीबीसी-535 नाम दिया गया है। हालांकि यह पेप्रिका के नाम से भी जानी जाएगी। राजेश कुमार ने बताया कि हमारे देश में इस मिर्च पर पहली बार रिसर्च हुई है। लेकिन यूरोपीय देशों व अमेरिका में कुछ कंपनियों ने सफलतापूर्वक ऐसा परीक्षण किया है।

वहां इनसे लिपस्टिक एवं अन्य सांैदर्य उत्पाद बनाए जा रहे हैं। कैलीफोर्निया की एक कंपनी पेप्रिका मिर्च से बनी लिपस्टिक क्लिीमिक लांग लास्टपेप्रिका नाम से बेच रही है। कई रंगों वाली मिर्च: यह मिर्च लाल, पीले, नारंगी तथा भूरे रंग में मिलेगी। इस वजह से ऐसे हानिकारक रसायनों से छुटकारा मिल सकेगा, जिनका इस्तेमाल इन रंगों वाली लिपस्टिक बनाने में किया जाता है।

शादी के लिए मचल रही है राखी सावंत

स्वयंवर रचाने के बाद भी शादी का लड्डू राखी को नहीं मिल पाया, इसका उन्हें मलाल चाहे न हो, पर शादी की जल्दी जरूर है। तभी तो वो भगवान से भी प्रार्थना कर रही हैं कि हे भगवान! जल्दी से मेरी शादी करवा दे। उनका कहना है कि अभी तक जिनके साथ रिश्ते बने, वो अच्छे नहीं लगे, तो उन्हें छोड़ दिया। अब उन्हें अपने लिए मिस्टर राइट की तलाश है। इमेजिंग टीवी चैनल पर शुरू होने वाले टीवी शो ‘राखी का इंसाफ….Ó को लेकर विडियो कॉन्फ्रेसिंग के माध्यम से उदयपुर के पत्रकारों से रूबरू हुई एक्ट्रेस राखी सावंत ने कहा कि वो अभी दिलों को जोडऩे वाले इस शो में बिजी है।

टीवी चैनल पर 16 अक्टूबर को शुरू होने वाले शो के बारे में राखी ने बताया कि उनके शो से कई बिछड़ों के दिल मिलेंगे। अभी तक उनके शो के 13 एपिसोड की शूटिंग हो चुकी है और एक—एक एपीसोड के लिए वो 16—16 घंटे काम कर रही है। इस शो के लिए वो कई शहरों में जाकर केसेज के सबूत जुटा रही है। उनका कहना है कि शो के माध्यम से उन्होंने सालों से दूरियों में जी रहे कई लोगों का इंसाफ कर उन्हें मिलाया है।

वन्यजीव के अंगों का तस्कर गिरफ्तार

मुरादाबाद:: उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले में पुलिस ने वन्य जीवों के अंगों की तस्करी में लिप्त गिरोह के एक सदस्य को गिरफ्तार किया है। यह गिरोह नेपाल में सक्रिय है।

जिले के गलशहीद थाना क्षेत्र में पुलिस ने मंगलवार देर रात महीप सिंह नाम के युवक को बाहरसिंगा के आठ सींगों के साथ गिरफ्तार किया। वह इन सींगों को मुरादाबाद के अपने किसी ग्राहक को बेचने आया था।

मुरादाबाद परिक्षेत्र के पुलिस उप-महानिरीक्षक बी. पी. जोगदंड ने बुधवार को एक संवाददाता सम्मेलन में इसकी आधिकारिक जानकारी दी। जोगदंड ने बताया कि खुफिया जानकारी के आधार पर पुलिस और वन विभाग की टीम ने महीप को धर दबोचा। वह उत्तराखण्ड के चंपावत जिले का रहने वाला है।

पुलिस के मुताबिक प्रारंभिक पूछताछ में उसने कबूल किया है कि वह नेपाल के एक गिरोह के लिए पिछले कई साल से काम कर रहा है। उसे उत्तर प्रदेश, उत्तराखण्ड, राजस्थान और मध्य प्रदेश में ग्राहकों को वन्य जीवों के अंगों की आपूर्ति की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।