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अब निजी कंपनियों को किसानों से सीधे जमीन खरीदनी होगी

भूमि अधिग्रहण की नई नीति

फर्रुखाबाद: गुरुवार को राज्य सरकार ने भूमि अधिग्रहण की नई नीति जारी कर दी है। नयी नीति के अनुसार सरकार अब निजी कंपनियों के लिए किसानों की जमीन का अधिग्रहण नहीं करेगी। इन कंपनियों को किसानों से सीधे आपसी सहमति के आधार पर जमीन खरीदनी होगी। सरकार केवल ‘फैसिलिटेटर’ की भूमिका अदा करेगी। इसके तहत वह सिर्फ भूमि अधिग्रहण की अधिसूचना जारी करेगी। भूमि का अधिग्रहण तभी हो सकेगा, जब उस क्षेत्र के सत्तर फीसदी किसान इसके लिए राजी हों। अधिग्रहीत भूमि की 16 प्रतिशत भूमि विकसित कर संबंधित किसान को नि:शुल्क दी जायेगी। किसान चाहे तो वह कुछ प्रतिशत भूमि का नगद प्रतिकर भी ले सकता है।

सरकार ने नई नीति के तहत अधिग्रहीत की गई भूमि के कुल क्षेत्रफल की 16 प्रतिशत भूमि को विकसित करके प्रभावित किसान को नि:शुल्क देने की व्यवस्था की है। नई नीति के तहत सरकार सभी प्रकार के भूमि अधिग्रहण के मामलों में करार नियमावली का पालन करेगी। नई नीति में प्रदेश के विकास के लिए बड़ी निजी कम्पनियों द्वारा स्थापित की जाने वाली विद्युत परियोजनाओं एवं अन्य कार्यों हेतु भूमि अधिग्रहण पर विशेष ध्यान दिया गया है, क्योंकि इसे लेकर ही किसानों में सबसे ज्यादा असंतोष रहता है। इस नीति का लाभ भट्टा पारसौल सहित उन क्षेत्रों के किसानों को नहीं मिलेगा, जहां अधिग्रहण को लेकर विवाद चल रहा है क्योंकि नई नीति गुरुवार से ही पूरे प्रदेश में लागू की गई है।

डीपीआरओ में आहरण वितरण को लेकर नया पेंच

फर्रुखाबाद: कोषाधिकारी की द्वारा आहरण वितरण के लिये राजपत्रित अधिकारी होने की शर्त लागू कर दिये जाने के बाद से जिला पंचायतराज अधिकारी कार्यालय में आहरण वितरण को लेकर चल रही उठा पटक में नया पेंच फंस गया है। एक ओर जहां प्रभारी जिला पंचायतराज अधिकारी इंद्रपाल यादव अपने हस्ताक्षर प्रमाणित कराने के चक्कर में हैं वहीं सहायक जिलापंचायतराज अधिकारी देवेंद्र नाथ मिश्रा को विभागीय निदेशक ने राजपत्रित प्रतिष्ठा प्रदान कर दी है।

विदित है कि विगत लगभग एक वर्ष से जिला पंचायतराज अधिकारी कार्यालय में आहरण वितरण को लेकर कोषागार से आपत्ति लगी है। पूर्व में डीएन मिश्रा के डीपीआरओ रहते तत्कालीन मुख्य विकास अधिकारी सीपी त्रिपाठी द्वारा स्वयं आहरण वितरण का भार ले लिया गया था। बाद श्री त्रिपाठी के स्थानांतरण और नये डीपीआरओ के पदस्थापन के बाद से यह समस्या फिर खड़ी हो गयी है। अंबेडकर ग्रमों में नाली खंडंजे के लिये आये लगभग दो करोड़ से अधिक की ग्रांट के अतिरिक्त सफाई कर्मियों का वेतन भी कई माह से नहीं निकला है। स्वच्छ शौचालयों के निर्माण् का बजट भी आहरित नहीं किया जा सका है। फिलहाल नये डीपीआरओ इंद्रपाल सिंह यादव अपने हस्ताक्षर प्रमाणित कराने के लिये प्रयासरत हैं।

इसी उठ पटक के बीच पंचात राज विभाग के निदेशक डीएस श्रीवास्तव ने सहायक जिला पंचायतराज अधिकारी डीएन मिश्रा की १६ वर्ष् की सेवा पूर्ण हो जाने के क्रम में उनको राजपत्रित अधिकारी की प्रतिष्ठा प्रदान किये जाने की पुष्टि कर दी है। इसी के साथ एक प्रश्न और पैदा हो गया है कि क्या केवल प्रतिष्ठा प्रदान करने भर से कोषागार की वित्तीय हस्तपुस्तिका के नियम का अनुपालन हो जायेगा? क्योंकि राजपत्रित अधिकारी होने का अर्थ है कि अधिकारी के नाम का बाकायदा शासकीय राजपत्र में प्रकाशन (गजट) करा दिया गया हो। बहर हाल मामले में एक नया पेंच तो फंस ही गया है, और विभागीय बिलों के भुगतान रोक अभी जारी है।

बेसिक शिक्षा- क्यूँ कटा MDM समन्वयक का 7 दिन का मानदेय?

फर्रुखाबाद: प्राधिकरण मध्याह भोजन योजना को जिले से भेजी गयी मासिक/वार्षिक प्रगति रिपोर्ट बिना जिलाधिकारी के हस्ताक्षर कराये भेजने पर समन्वयक को दण्डित किये जाने का आदेश अपर निदेशक कानपुर मंडल बेसिक शिक्षा ने किया है| बेसिक शिक्षा विभाग में मध्याह भोजन योजना की समन्वयक नीलू मिश्रा का 7 दिन मानदेय एक बार फिर काटने के आदेश किये गए है| बिना जिलाधिकारी के हस्ताक्षर कराये MDM की विभिन्न प्रगति आख्या लखनऊ भेजने के पीछे कहीं के MDM के जिला स्तरीय खातो में घपले घोटाले खुलने का डर तो नहीं है|

विदित हो कि उत्तर प्रदेश मध्याह भोजन प्राधिकरण हर माह पूरे प्रदेश की जिलेवार प्रगति समीक्षा और मध्याह भोजन योजना नई दिल्ली को रिपोर्ट भेजने के लिए जिलों से प्रगति आख्या मंगवाता है| ये प्रगति रिपोर्ट नियमानुसार जिले की मध्याह भोजन समिति के बतौर पदेन अध्यक्ष जिलाधिकारी और जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी बतौर सचिव के हस्ताक्षर के प्रेषित किये जाने चाहिए| इन रिपोर्ट में परिवर्तन लागत, परिवहन लागत, मध्याह भोजन योजना के जिला स्तर और ग्राम स्तर के विविध व्यय (MME), और रसोइया मानदेय सम्बन्धी खर्च प्राप्ति आदि के व्योरे दर्ज किये जाते है| प्राधिकरण लखनऊ और नई दिल्ली इन रिपोर्ट को जिलाधिकारी हस्ताक्षरित मान्यता देता है| मगर फर्रुखाबाद जिले से ये रिपोर्ट आमतौर बिना जिलाधिकारी के हस्ताक्षर कराये भेजी जाती रही है| अप्रैल 2011 माह की प्रगति आख्या पर भी जिलाधिकारी के हस्ताक्षर नहीं कराये गए| केवल जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी और समन्वयक ने हस्ताक्षर कर प्राधिकरण लखनऊ रिपोर्ट प्रेषित कर दी| 19 मई 2011 को लखनऊ स्थित प्राधिकरण में प्रदेश स्तरीय बैठक में इस मामले पर कड़ी फटकार के बाद प्रदेश के कई जिला स्तरीय समन्वयको के वेतन काटने के आदेश किये गए है|

फर्रुखाबाद में MME के खाते में गड़बड़ी का खुलासा-
गड़बड़ी छुपाने के लिए फ़ाइल जिलाधिकारी को नहीं भेजी गयी?

फर्रुखाबाद जिलें में मध्याह भोजन योजना के MME में घपले घोटाले की खबर पिछले सप्ताह जेएनआई ने प्रकाशित की थी| प्राधिकरण को जिलाधिकारी के हस्ताक्षर के बिना रिपोर्ट भेजना उस घोटाले की एक कड़ी हो सकती है| रिपोर्ट पर हस्ताक्षर मिड-डे-मील समन्वयक और बेसिक शिक्षा अधिकारी ने किये हैं| MME के खाते को इन दोनों के सिवा कोई संचालित नहीं करता है| इस खाते का लेखा जोखा रखने की जिम्मेदारी समन्वयक नीलू मिश्रा की है और इसके बैंक खाते का एकल संचालन बेसिक शिक्षा अधिकारी के हस्ताक्षर के द्वारा होता है| जाहिर है इस खाते में क्या क्या घपला घोटाला है इसकी जानकारी केवल इन्ही दोनों पदों को है| कहीं राज खुल जाने के डर से तो इसकी फ़ाइल जिलाधिकारी से नहीं छुपायी गयी| वर्ष 2010-11 की वार्षिक रिपोर्ट पर जिलाधिकारी के हस्ताक्षर कराये गए थे| उस रिपोर्ट के मुताबिक ग्राम स्तर का पैसा ग्राम सभाओ के खातो में 31-03-2011 ko भेज दिया गया था| मगर जेएनआई ने खुलासा किया था कि इस खाते में 7.10 लाख रुपया 23 मई 2011 तक जिला स्तर पर पड़ा रहा| जाहिर है अगर अप्रैल माह की मासिक रिपोर्ट पर जिलाधिकारी के हस्ताक्षर कराये जाते तो MME के खाते में गड़बड़ी की पोल खुल सकती थी जिसे छुपाने के लिए जिलाधिकारी तक फ़ाइल ही नहीं भेजी गयी|

अधिकतम मतदान ही दल बदल पर लगाएगा अंकुश

सतीश दीक्षित की कलम से-
फर्रुखाबाद जिले में जिस बात को सभी प्रबुद्ध और जागरूक जन जानते हैं| वह बात लखनऊ के भाजपा प्रदेश कार्यालय में बड़ी ही धूमधाम के साथ संपन्न हो गई| बात पूर्व सांसद चन्द्र भूषण सिंह मुन्नूबाबू का तीसरा चौथा या पांचवां दल बदल कथित घर वापसी|

दल बदल को अपने-अपने निहित तात्कालिक लाभों के मद्दे नजर सभी राजनैतिक दल और नेता प्रोत्साहित करने हैं| जो आता है उसके नए घर में प्रशंसा होती है जो जाता है उसकी पुराने घर में लानत मलामत होने लगती है| मतलब यह है कि दल बदल के इस लम्बे चौड़ें हमाम में कमोवेश सभी नेता और राजनैतिक दल दिगंबर भेष धारी हैं|

दल बदल की भयंकरता और लोक तांत्रिक व्यवस्था पर पड़ने वाले उसके दुष्परिणामों से ऊपर तो सब नेता और राजनैतिक दल चिंता जताते हैं| परन्तु उस पर प्रभावी रोकथाम लगाने में दिलचस्पी किसी की नहीं हैं| बातें चाहे कितनी ही नीतियों व सिद्धांतों की हों वास्तविकता यह है कि दल बदल केवल इसलिए होता है कि जो कुछ पुराने घर में रहते नहीं मिल सका वह दल बदल से मिल जाए| आखिरकार सभी दलों को तलाश जिताऊ उम्मीदवारों की ही रहती है| अगर तीन वार सपा से सांसदी चुनाव का टिकट पाने वाले और दो बार जीतने वाले मुन्नू बाबू के बेटे को सपा भोजपुर विधान सभा से जमालुद्दीन सिद्दीकी के स्थान पर पार्टी प्रत्याशी बना देती तब फिर निश्चित ही लखनऊ में हुयी घर वापसी या दल बदल नहीं होता| लेकिन तब शायद घोषित सपा पत्याशी किसी नए घर या ठिकाने की तलाश में निकल पड़ते| यदि जिला पंचायत अध्यक्ष पद के चुनाव में सपा विधायक नरेन्द्र सिंह यादव के कथित काले कारनामों को माफ़ करके उन्हें अमृतपुर विधान सभा क्षेत्र से पार्टी प्रत्याशी नहीं घोषित किया जाता तब फिर वह कितने दिन सपा की और सेवा करते इसका जवाब तो वही दे सकते हैं|

अभी तो शुरूआत ही है| प्रत्याशी अभी केवल सपा और बसपा ने ही घोषित किये हैं| उन पर भी विघ्न संतोषियों के अनुसार परिवर्तन की तलवार लटकी है| सभी दलों के प्रत्याशियों की घोषणा होने दीजिये| घमासान का असली नजारा तो उसके बाद ही देखने को मिलेगा|

दल बदल में सब कुछ मीठा ही मीठा नहीं होता है| मुन्नू बाबू ने जिस घर में अपनी पुनर्वापसी की है उसमे उन्ही की ही तरह भाजपा और सपा में सुविधा अनुसार चहल कदमी करने वाले और जब चाहो तो निजी पार्टी बनाने और उसका विलय कर देने वाले साक्षी जी महाराज पहले से ही विराजमान हैं| मुन्नू बाबू ने पिछली वार भाजपा इन्ही साक्षी जी की बजह से छोडी थी| इन्ही साक्षी जी ने भूड नगरिया ( राजेन्द्र नगर ) में सपा विधायक नरेन्द्र सिंह यादव द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में मुन्नू बाबू को ” सड़े आलू का बोरा ” खिताब से नबाजा था| अब दोनों एक साथ एक ही पार्टी में रहते हुए क्या-क्या गुल खिलायेंगें| लोक सभा चुनाव तक दोनों एक साथ रह पायेंगें यह तो आने वाले दिनों में ही पता चलेगा| कुछ-कुछ यही स्थिति पिता की खून पसीने से सींची गई पार्टी को छोड़कर हांथी की सवारी करने और बड़े वेआबरू होकर तेरे कूंचे से हम निकले कि हांथी से उतर कर पुनः अपने घर लौटने वाले मेजर सुनील दत्त द्विवेदी की भी होगी फिर फेर का संग है देखो कब तक चलता है|

दल बदल की इस भयानक महामारी को रोकने के दो ही तात्कालिक उपाय हैं| पहला राजनैतिक दलों की प्रबल इच्छा शक्ति पर निर्भर करता है और दूसरा आम मतदाता के प्रबल पुरुषार्थ पर| सामन्यतः दल बदलू का सामान्य गणित यह होता है कि उसकी अपनी बिरादरी का वोट उसके नए ठिकाने के प्रतिवद्ध वोट से मिलकर सफलता का पर्याय बन जाएगा| शरण देने वाले राजनैतिक दल की सोंच भी यही होती है कि आने वाले की विरादरी का वोट पार्टी के लिए संजीवनी का काम करेगा|

अगर सारे राजनैतिक दल लोकतंत्र और देश के हित में एकजुट होकर इस बात पर सहमत हो जाएँ कि दल बदल करने वाले किसी भी व्यक्ति को दल में तीन साल तक एक कार्यकर्ता के रूप में कार्य करने पर ही चुनाव में प्रत्याशी बनाया जाएगा| इस स्थित में दल बदल और विशेष रूप से चुनाव से पूर्व होने वाले दल बदल अपने आप प्रभावी अंकुश लग जाएगा| परन्तु सरकारी प्रयासों और चुनाव आयोग की संस्तुतियों आदि का वास्ता देकर कोई भी राजनैतिक दल इस दिशा में कदम बढ़ाएगा| इसकी उम्मीद जिताऊ उम्मीदवार की खोज में लगे किसी से करना ही बेकार है| सभी दागी अपराधी को टिकट न देने की कसमें खायेंगें सभी दल बदल पर अंकुश लगाने की बता भी करेंगें परन्तु कथित जिताऊ उम्मीदवार की खोज में वह सारे पाप करेंगें जो उन्हें नहीं करने चाहिए|

लोकतंत्र की असली मालिक जनता है| चुनाव को महँगा करने वाले चुनाव में मतदान न करने वाले लोकतंत्र के हितैषी नहीं हैं| दल बदल की इस बीमारी का इलाज भी सामान्य मतदाता के पास ही है| मतदाता किसके पक्ष में मतदान करें यह पूर्णतः उसके अपने हाँथ में है| दल बदलू जातिवादी कुनवा परस्त अवसर वादी दल और प्रत्याशी केवल धन बल बाहुवल के बल पर इससे जीतते हैं क्योंकि आम मतदाता उत्साह और उमंग के साथ मतदान के लिए निकलता ही नहीं है| हमारी मतदान के प्रति इस बेरुखी के कारण ही भ्रष्टाचार बढ़ता है, महंगाई बढ़ती है, विकास का चक्का जाम हो जाता है व बेरोजगारी, अराजकता बढ़ती जाती है| हम ५ साल सरकारों व जनप्रतिनिधियों को कोसते रहते हैं| परन्तु जब उन्हें चुनने और बदलने का अवसर आता है तब हम मतदान करने और मतदान के लिए लोगों को प्रोत्साहित करने के स्थान पर कोई न कोई बहाना बनाकर घरों में कैद हो जाते हैं|

जिस दिन आम मतदाता कष्ट और परेशानी सहकर भी तीर्थयात्रा की तर्ज पर लोकतंत्र को चुनाव यज्ञ में अपने मतदान की आहुति देने निकल पडेगा| दल बदल करने वाले लोकतंत्र को लूटने और बदनाम करने वाले लोग राजनैतिक दल और प्रत्याशी स्वतः ही चुनाव मैदान से बाहर हो जायेंगें| चुनाव सुधरने का इन्तजार मत करिए| इनके मार्ग में बाधाएं खड़ी करने वालों की लाइन बहुत लम्बी है| इन बाधाओं को हटाने के लिए हमें मतदान केन्द्रों पर निष्पक्ष और निर्भीक होकर मतदान की कभी खत्म न होने वाली लाइन में लगाकर अपने लोकतंत्र को सच्चा और अच्छा बनाने के लिए पूरे उत्साह के साथ मतदान करने की आदत डालनी पड़ेगी| विश्वास है कि आप ऐसा ही करेंगें|

माया किसान पंचायत: नई भूमि अधिग्रहण नीति लागू

लखनऊ। यूपी सरकार ने आज किसान प्रतिनिधियों से मिलने के बाद नई  भूमि अधिग्रहण नीति लागू करने का फैसला किया है। मायावती ने कहा कि, इस पंचायत में प्रदेश के कोने-कोने से किसान आए थे। किसान प्रतिनिधियों ने भूमि अधिग्रहण पर अपने-अपने सुझाव दिए हैं। देश के अन्य राज्यों में भी  भूमि अधिग्रहण में किसानों के विरोध का सामना करना पड़ता है।

भूमि अधिग्रहण की नई नीति आज से लागू


माया ने कहा कि भूमि अधिग्रहण से संबंधित नई नीति बनाई गई है। इसे आज से लागू कर दिया जाएगा। यदि किसानों के और सुझाव होंगे तो उसे जोड़ दिया जाएगा। हमारी नीति केंद्र की आगामी नीति से की गुना अधिक किसान हितैसी है।

नई भू-नीति में होंगे तीन विकल्प
माया ने कहा कि इस नई नीति में किसानों के हितों का ध्यान रखा गया है। इसमें तीन विकल्प हैं। भूमि अधिग्रहण के समय किसानों को तीनों विकल्प दिए जाएंगे।

भूमि अधिग्रहण पर घेरेंगे संसद
माया ने बताया कि, मैंने इस संबंध में केंद्र को पत्र लिखकर कानून में बदलाव की मांग की है। लेकिन सरकार द्वारा नहीं सुने जाने पर हमारी सरकार ने तय किया है कि हम इसे संसद में उठाएंगे। यदि नहीं हुआ तो संसद का घेराव करेंगे।

यूपी की मुखिया मायावती की किसान पंचायत में भारतीय किसान यूनियान के नेता चौधरी राकेश टिकैत ने किसान आयोग के गठन की मांग की है। इसके लिए उन्होने ने एक मांग पत्र सौंपा है। गुरूवार को मायावती ने अपने चार के शासन में पहली बार किसानों की पंचायत की।

इस पंचायत के लिए पश्चिमी यूपी के साथ राज्य के दूसरे हिस्सों के किसान प्रतिनिधि वोल्वो एसी बसों से बुधवार को ही लखनऊ पहुंच गए थे। सुबह करीब 11 बजे विधानसभा के तिलक हाल में किसान पंचायत को मायावती ने संबोधित किया।

बंद कमरे में हुई पंचायत में मायावती ने क्या बोला मीडिया को इसकी भनक नही लगी। किसान प्रनिधियों ने बैठक को सकारात्मक बताया है। पंचायत में राज्य सरकार के सभी आला अफसर के साथ ही कृषि मंत्री चौधरी लक्ष्मी नरायण व ग्रामीण अभियंत्रण सेवा विभाग के मंत्री ठाकुर जयवीर सिंह भी मौजूद थे।

दिग्विजय ने बाबा पर फिर साधा निशाना

कहा आमरण अनशन और आन्दोलन से नहीं आयेगा काला धन वापस

नई दिल्ली: बाबा रामदेव के अनशन में सिर्फ दो दिन बचे हैं। इसे लेकर सरकार और कांग्रेस में हलचल है और बैठकों का सिलसिला जारी है।

बाबा रामदेव ने गुड़गांव जाने से पहले अपने करीबियों के साथ बैठकर प्रस्तावित सत्याग्रह और सरकार के रुख को लेकर रणनीति पर विचार किया। दूसरी ओर, मीडिया में सूत्रों के हवाले से यह खबर आ रही है कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता इस बात से खफा हैं कि बाबा रामदेव और केंद्र सरकार के चार मंत्रियों के बीच बुधवार को दिल्ली एयरपोर्ट पर हुई बैठक में हुई बातचीत का ब्योरा उन्हें नहीं बताया गया।

पार्टी नेताओं के बीच योग गुरु की चार केंद्रीय मंत्रियों द्वारा अगुवानी किए जाने के मामले पर गहरे मतभेद हैं। कांग्रेस और सरकार में भी मंथन का सिलसिला चल रहा है। कांग्रेस कोर ग्रुप शाम को बैठक करने वाली है। सूत्र बताते हैं कि इसमें इस पर फैसला होगा कि बाबा रामदेव को अनशन करने से रोकने के लिए क्‍या किया जाए और अगर इसमें कामयाबी नहीं मिली तो स्थिति से निपटने की रणनीति क्‍या हो।

लेकिन इससे पहले कांग्रेस के महासचिव दिग्विजय सिंह ने एक बार फिर बाबा रामदेव पर निशाना साधा। उन्‍होंने कहा कि आमरण अनशन और आंदोलन से न तो काला धन वापस आएगा और भ्रष्‍टाचार मिटेगा। इसलिए बाबा रामदेव को सरकार की बात मान कर अनशन का कार्यक्रम छोड़ देना चाहिए। उनका कहना था कि बाबा से कांग्रेस को कोई डर नहीं है। बकौल दिग्विजय, ‘अगर कांग्रेस बाबा रामदेव से डरी होती तो पार्टी उन्‍हें जेल में बंद कर देती

बाबा रामदेव ने 4 जून से अनशन का ऐलान किया है। बाबा को अनशन करने से रोकने के लिए सरकार किसी भी हद तक जाने को तैयार दिख रही है। हालांकि कांग्रेस इससे मुश्किल में लग रही है। उसे कुछ कहते नहीं बन रहा। बुधवार को जिस तरह पूरी सरकार एयरपोर्ट पर ही बाबा रामदेव के इंतजार में खड़ी हो गई और उज्‍जैन से पहुंचते ही उन्‍हें बातचीत के लिए घेर लिया, इससे पूरी कांग्रेस सहमत नहीं लगती।

कांग्रेस के उच्‍च पदस्‍थ सूत्रों का मानना है कि यह अप्रत्‍याशित कदम ‘गैरजरूरी’ था और कांग्रेस का ‘इससे कोई लेना-देना नहीं’ है। सूत्रों का यहां तक कहना है कि हवाईअड्डे पर अगुवानी के लिए बड़े मंत्रियों-अफसरों को भेजने का फैसला सोनिया गांधी की जानकारी के बिना ही ले लिया गया था। पार्टी इसमें किसी भी तरह शामिल नहीं है।

कांग्रेस सार्वजनिक रूप से इस मामले में खुल कर बोल भी नहीं रही है। लेकिन पार्टी के महासचिव दिग्विजय सिंह ने बाबा रामदेव पर निशाना जरूर साधा है। उन्‍होंने कहा, ‘बाबा रामदेव के अनशन से कौन डर रहा है? भ्रष्‍टाचार और काले धन के मुद्दे पर हम भी गंभीर हैं। उन्‍हें (बाबा को) मनमोहन सिंह और कुछ मंत्रियों की ओर से किया गया आग्रह मान लेना चाहिए।

CM के कर्मचारियों ने की लड़कियों से छेड़छाड़

नई दिल्ली। दिल्ली में लड़कियां कितनी महफूज हैं इसका अंदाजा इसी से लगा सकते हैं कि दिल्ली सरकार के कर्मचारी भी लड़कियों को छेड़ने में पीछे नहीं। बीती रात राजधानी दिल्ली में एक और शर्मनाक मामला सामने आया है। दरअसल सीएम के कर्मचारियों द्वारा तिलक मार्ग पर दो लड़कियों के साथ छेड़ने का मामला सामने आया है। आरोपी का नाम जगदीश वशीष्ट बताया जा रहा है।

मीडिया के जरिए सामने आई लड़की ने पूरे मामले से सबको रूबरू कराया है। मामला बुधवार देर रात का है। लड़की आईटीओ और प्रगति मैदान के बीच ऑटो का इंतजार कर रही थी। तभी मुख्यमंत्री की पायलट गाड़ी में सवार दो कर्मचारियों ने उसके साथ छेड़खानी शुरू कर दी।

लड़कियां जब तंग आ गई तो उन्होंने ट्रैफिक पुलिस को इसकी सूचना दी। लेकिन ट्रैफिक पुसिल ने भी कुछ नहीं किया। बाद में जब तिलक मार्ग पुलिस थाने में इसकी शिकायत की गई तो दोनों कर्मचारियों को पुलिस ने गिरफ्तर भी किया और उन्हें जमानत पर रिहा कर दिया गया लेकिन इस मामले ने दिल्ली सरकार और खासकर महिला मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के दावों की पोल खोल दी है।

युवती का आरोप है कि दोनों ड्राइवर बुरी तरह से शराब पीए हुए थे। साथ ही गाड़ी में भी शराब की कई बोतलें थी। यहीं नहीं पुलिस वालों ने भी सीएम कर्मचारियों का साथ दिया। पुलिस वालों ने लड़की से कहा कि एफआईआर दर्ज कर ली है जबकि ऐसा हुआ नहीं था। पुलिस वाले सीएम कर्मचारियों के बदले खुद माफी मांगने लगे।

मीडिया में जब यह खबर दिखाई गई तो उसके कुछ देर बाद ही सीएम के सचिव की ओर से यह बयान आया कि जिस लड़की के साथ छेड़छाड़ हुई है उससे मुख्‍यमंत्री शीला दीक्षित शुक्रवार को सुबह 10 बजे मुलाकात करेंगी।
वहीं मुख्‍यमंत्री शीला दीक्षित ने कहा कि इस मामले के जांच के आदेश दे दिए गए हैं। उन्‍होंने कहा कि इस मामले में दोषी पाए गए आरोपियों को बख्‍शा नहीं जाएगा।

सपाईयों ने सम्मलेन में भीड़ जुटाकर ताकत दिखाई

फर्रुखाबाद: समाजवादी पार्टी के प्रत्याशियों एवं पदाधिकारियों ने बढपुर स्थित गेस्ट हॉउस में आयोजित जिला सम्मलेन में भीड़ जुटाकर पार्टी की ताकत दिखाई|

सम्मलेन में सपा विधायक एवं प्रत्याशी नरेन्द्र सिंह यादव, पूर्व विधायक उर्मिला राजपूत, पूर्व विधायक जमालुद्दीन सिद्दीकी एवं अजीत कठेरिया ने काफी प्रयास करके भीड़ एकत्र की| वक्ताओं ने अधिक भीड़ जुटाने के लिए नरेन्द्र सिंह यादव के गुणगान किये तो कार्यक्रम की अध्यक्षता करने वाली अधिवक्ता संघ की प्रदेश सचिव मधुलिका यादव को मंच पर खड़े होकर कहना पडा कि अब शक्ति प्रदर्शन की कोई जरूरत नहीं है| सभी प्रत्याशियों के टिकट तय हो चुके हैं| चुनाव जीतने के लिए मेहनत करें|

जिलाध्यक्ष चंद्रपाल सिंह यादव एवं संचालन करने वाले महा सचिव सुरेन्द्र सिंह गौर आदि वक्ताओं ने बसपा सरकार की जमकर बखिया उधेड़ी| कहा गया कि माया सरकार हर मामले में फेल हो गयी है| प्रदेश में जंगल राज कायम है| महिलाओं की आबरू सुरक्षित नहीं है| अवैध धन बसूली के कारण पूरे प्रदेश में भ्रष्टाचार चरम सीमा पर है|

वक्ताओं ने महंगाई एवं भ्रष्टाचार के लिए केंद्र सरकार की भी आलोचना की|

पुलिस अधीक्षक ने खुफिया विभाग के सूचना तंत्र को सक्रिय किया

फर्रुखाबाद: पुलिस अधीक्षक ओपी सागर ने आज स्थानीय अभिसूचना इकाई के कर्मचारियों को नुख्से बताकर सूचना तंत्र को सक्रिय किया| श्री सागर ने कोतवाली फतेहगढ़ के भवन में स्थित LIU का व्यापक निरीक्षण किया|

इस दौरान श्री सागर ने फालतू कबाड़ को हटाने, लकड़ी के जर्जर दरबाजे की जगह लोहे का गेट लगवाने, खराब टीवी व कूलर को बदलवाने एवं फर्नीचर की व्यवस्था करने का निर्देश दिया| विभागीय रिकार्ड के निरीक्षण के दौरान पायी गयी खामियों को शीघ्र ही दूर करने की हिदायत दी| कर्मचारियों को समझाया कि उन्हें राष्ट्रद्रोही, आतंकवादी, राजनैतिक एवं आपराधिक घटनाओं की जानकारी के लिए हर समय सतर्क रहना चाहिए और सम्बेदंशील घटनाओं की जानकारी तुरंत ही अधिकारियों को दें|

श्री सागर ने नकली नोट की जांच-पड़ताल करने वाली मशीन को चलवाकर उसमे १०० के नोट की पहचान करवाई| उन्होंने बताया कि जो विदेशी जिले में ८० दिन से अधिक प्रवास करे उसके लिए LIU कार्यालय में रजिस्ट्रेशन करवाना अनिवार्य होता है| निरीक्षण के दौरान LIU इंस्पेक्टर गजराज सिंह आदि कर्मचारी मौजूद रहे|

अस्पताल में शराब की दावत उड़ाने वाला सिपाही निलंबित

फर्रुखाबाद: लोहिया अस्पताल में ड्यूटी के दौरान शराब की दावत उड़ाने वाला आर्म्स पुलिस का सिपाही राम नरेश पुलिस अधीक्षक के हत्थे चढ़ गया| एसपी ने सिपाही को डाक्टरी परीक्षण कराकर निलंबित कर दिया|

थाना राजेपुर के ग्राम भरखा निवासी चर्चित गुड्डू सिंह किसी मुकद्दमे के मामले में जेल में बीमार होने के कारण लोहिया अस्पताल में भर्ती हुआ| बीती रात उसकी सुरक्षा में सिपाही राम नरेश तैनात था| रामनरेश मध्यरात्रि ड्यूटी के समय अस्पताल में ही शराब की दावत उड़ा रहा था| सयोंग से पुलिस अधीक्षक ओपी सागर सुरक्षा ड्यूटी की जांच-पड़ताल करने के लिए बंदी वार्ड पहुँच गए| उन्होंने सिपाही को नशे की हालत में पकड़ लिया|

एसपी के निर्देश पर आवास विकास चौकी के सिपाही ज्ञान सिंह नशेड़ी सिपाही का डाक्टरी परीक्षण कराने के लिए लोहिया अस्पताल ले गए| डॉ अजीत सिंह ने जांच-पड़ताल के दौरान सिपाही राम नरेश के शरीर में एल्कोहल पाया| इसी आधार पर पुलिस अधीक्षक ने उसे निलंबित कर दिया|