फर्जी शपथपत्र मामले में पुलिस की अंतिम आख्या निरस्त, अदालत ने दिए अग्रिम विवेचना के आदेश

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फर्रुखाबाद:(जेएनआई ब्यूरो) फर्जी अनापत्ति शपथपत्र तैयार कर इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन में जमा किए जाने के आरोप से जुड़े मामले में अदालत ने पुलिस की अंतिम आख्या को निरस्त करते हुए अग्रिम विवेचना के आदेश दिए हैं।अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट/सिविल जज (सीनियर डिवीजन) त्वरित न्यायालय, फर्रुखाबाद की अदालत में प्रकीर्ण वाद में अनिल कुमार सिंह निवासी खंडौली, थाना राजेपुर की ओर से दाखिल प्रोटेस्ट पिटीशन पर सुनवाई हुई। पीड़ित ने आरोप लगाया था कि अवनीश शाक्य और अशोक कुमार ने उसके नाम से फर्जी शपथपत्र तैयार कर इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन में जमा किया। मामले में थाना राजेपुर पुलिस ने विवेचना के बाद अंतिम आख्या न्यायालय में प्रस्तुत की थी।वादी की ओर से अंतिम आख्या का विरोध करते हुए कहा गया कि संबंधित फर्जी शपथपत्र इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन के क्षेत्रीय कार्यालय आगरा के कब्जे में है। विवेचक द्वारा वहां से महत्वपूर्ण रिपोर्ट प्राप्त किए बिना ही अंतिम आख्या प्रस्तुत कर दी गई।अदालत ने पत्रावली का अवलोकन करने के बाद माना कि मामले में संबंधित अभिलेख एवं रिपोर्ट महत्वपूर्ण साक्ष्य हो सकते हैं और इस स्तर पर अग्रिम विवेचना कराया जाना आवश्यक है। अदालत ने पुलिस द्वारा प्रस्तुत अंतिम आख्या को स्वीकार करने योग्य नहीं माना।अदालत ने वादी की प्रोटेस्ट पिटीशन स्वीकार करते हुए अंतिम को निरस्त कर दिया। साथ ही थाना राजेपुर के प्रभारी निरीक्षक को निर्देश दिया कि प्रकरण में नियमानुसार अग्रिम विवेचना कराई जाए और विवेचना के परिणाम से तीन माह के भीतर न्यायालय को अवगत कराया जाए।

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