फर्रुखाबाद:(जेएनआई ब्यूरो) जनपद में गंगा एवं रामगंगा का जलस्तर बढ़ने के साथ ही नाव बनाने वाले कारीगरों की व्यस्तता भी बढ़ गई है। सावन माह में पांचालघाट पर कांवड़ियों की बढ़ती आवाजाही और गंगा के लगातार बढ़ते जलस्तर के बीच बाढ़ की आशंका को देखते हुए नाव निर्माण का कार्य युद्धस्तर पर चल रहा है।पांचालघाट गंगा घाट पर तैयार की जा रही नावों की मांग केवल फर्रुखाबाद तक सीमित नहीं है, बल्कि हरदोई, शाहजहांपुर, बदायूं, लखीमपुर खीरी और कन्नौज समेत कई जनपदों से लगातार ऑर्डर मिल रहे हैं।नाव निर्माता सोता बहादुरपुर निवासी अल्लादीन ने बताया कि बाढ़ के मौसम में आसपास के जिलों से नावों की मांग काफी बढ़ जाती है। इसी को ध्यान में रखते हुए पहले से नावें तैयार की जा रही हैं। उन्होंने बताया कि 14 फुट लंबी नाव जिसमें 10 से 15 लोग बैठ सकते हैं,की कीमत लगभग 15 हजार रुपये है जबकि 18 फुट लंबी नाव करीब 25 हजार रुपये में तैयार की जाती है।अल्लादीन ने बताया कि इस सीजन में उनके यहां लगभग 20 मिस्त्री नाव निर्माण में लगे हुए हैं। पूरे सीजन में करीब 300 नावें तैयार कर उनकी बिक्री का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने कहा कि गंगा का जलस्तर बढ़ने पर गांवों के प्रधान, ग्रामीण और आपदा राहत कार्यों से जुड़े लोग बड़ी संख्या में नावें खरीदते हैं, जिससे स्थानीय कारीगरों की आजीविका भी मजबूत होती है।उधर, गंगा के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए जिला प्रशासन भी पूरी तरह सतर्क है और संभावित बाढ़ से निपटने की तैयारियां तेज कर दी गई हैं। वहीं ग्रामीण क्षेत्रों के लोग भी आवागमन और आपात स्थिति से निपटने के लिए निजी उपयोग हेतु नावों की खरीदारी कर रहे हैं।फर्रुखाबाद का प्रसिद्ध पांचालघाट इन दिनों नाव निर्माण का प्रमुख केंद्र बना हुआ है, जहां गंगा के बढ़ते जलस्तर के साथ कारीगर दिन-रात नाव तैयार करने में जुटे हैं।
गंगा का जलस्तर बढ़ते ही तेज हुआ नाव निर्माण का कार्य
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