फर्रुखाबाद:(दीपक शुक्ला) करोड़ों रुपये की लागत से निर्मित इटावा-बरेली नेशनल हाईवे 730-सी निर्माण के कुछ ही समय बाद अपनी बदहाली की कहानी खुद बयां कर रहा है। आम जनता को बेहतर और सुरक्षित यातायात सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से बनाए गए इस हाईवे पर जगह-जगह मानकों की अनदेखी और निर्माण कार्य में कथित भ्रष्टाचार के आरोप अब खुलकर सामने आने लगे हैं। हालत यह है कि कई स्थानों पर सड़क क्षतिग्रस्त हो चुकी है, जबकि नालों के ऊपर बनाई गई छतें टूटकर धराशायी हो रही हैं। इससे राहगीरों और वाहन चालकों की जान पर लगातार खतरा मंडरा रहा है।
सबसे गंभीर स्थिति फतेहगढ़ स्थित सेंट्रल जेल चौराहे के आसपास देखने को मिल रही है। यहां नालों की दुर्दशा के कारण जल निकासी व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है। नाले का पानी सड़क पर बह रहा है, जिससे हाईवे पर विशाल जलभराव की स्थिति पैदा हो गई है। सड़क पर कई फीट तक फैला पानी अब तालाब का रूप ले चुका है। लगातार जलभराव के कारण सड़क की परत उखड़ गई है और गहरे गड्ढे बन गए हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि इन गड्ढों में गिरकर आए दिन बाइक सवार और अन्य वाहन चालक चोटिल हो रहे हैं। बारिश के दौरान स्थिति और अधिक भयावह हो जाती है, क्योंकि पानी के नीचे गड्ढे दिखाई नहीं देते और दुर्घटना की आशंका कई गुना बढ़ जाती है।
लोगों का आरोप है कि नालों के ऊपर डाली गई छतों के निर्माण में गुणवत्ता का बिल्कुल ध्यान नहीं रखा गया। कई स्थानों पर नाले की छत मामूली वजन पड़ते ही टूट गई। इससे निर्माण कार्य में घटिया सामग्री के इस्तेमाल की आशंका जताई जा रही है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जहां-जहां मरम्मत कार्य किया गया, वहां भी मानकों का पालन नहीं किया गया। आरोप है कि मरम्मत के दौरान न तो पर्याप्त मात्रा में सरिया डाली गई और न ही गुणवत्तायुक्त आरसीसी का प्रयोग किया गया।
चिंता की बात यह है कि जिन स्थानों पर नालों की छतें टूट चुकी हैं, वे लंबे समय से खुले पड़े हैं। इससे दुर्घटना की आशंका लगातार बनी हुई है। रात के समय या बारिश में इन खुले नालों के कारण कोई बड़ा हादसा हो सकता है, लेकिन जिम्मेदार विभाग की ओर से अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि हाईवे निर्माण के दौरान हजारों पेड़ों की बलि देकर चौड़ी सड़क बनाई गई थी, ताकि लोगों को बेहतर यातायात सुविधा मिल सके। लेकिन आज वही हाईवे लोगों के लिए परेशानी और खतरे का कारण बनता जा रहा है। करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद सड़क, नाले और जल निकासी व्यवस्था की बदहाली निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है। क्षेत्रीय नागरिकों ने नेशनल हाईवे अथॉरिटी और जिला प्रशासन से हाईवे की तकनीकी जांच कराकर दोषी अधिकारियों एवं निर्माण एजेंसी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। साथ ही जलभराव, टूटे नाले और क्षतिग्रस्त सड़क की तत्काल मरम्मत कराए जाने की मांग भी उठाई है, ताकि भविष्य में किसी बड़े हादसे को रोका जा सके| नेशनल हाई-वे के एई विशाल मिश्रा नें जेएनआई को बताया की जल भराव की समस्या व नालो की समस्या को जल्द से जल्द दूर किया जायेगा | ठेकेदार को जल्द कार्य करने लिये निर्देशित किया जायेगा |



