नगर में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की प्रतिमा स्थापित करने की मांग

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फर्रुखाबाद:(जेएनआई ब्यूरो) भारतीय जनता पार्टी के पूर्व मंडल महामंत्री शिवम् दुबे और नगर पालिका के सभासद अनिल तिवारी ने प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह से मुलाकात कर नगर में भारत रत्न एवं देश के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की प्रतिमा स्थापित किए जाने की मांग उठाई। उन्होंने नगर के प्रमुख चौराहों में से किसी एक स्थान पर अटल जी की प्रतिमा स्थापित करने के साथ ही उस स्थल का नामकरण भी उनके नाम पर किए जाने का अनुरोध किया। मंत्री को सौंपे गए ज्ञापन में कहा गया कि अटल बिहारी वाजपेयी भारतीय राजनीति के ऐसे युगपुरुष थे, जिन्होंने अपने उत्कृष्ट नेतृत्व, ओजस्वी वक्तृत्व और राष्ट्रहित सर्वोपरि की भावना से देश को नई दिशा प्रदान की। प्रधानमंत्री के रूप में उनके कार्यकाल में देश ने विकास, सुशासन और राष्ट्रीय गौरव के अनेक नए आयाम स्थापित किए। उनका व्यक्तित्व राजनीतिक सीमाओं से परे जाकर पूरे देश के लिए प्रेरणा का स्रोत रहा है। प्रतिनिधिमंडल ने सुझाव दिया कि नगर के सेंट्रल जेल तिराहा, विजाधरपुर तिराहा, लाल दरवाजा चौराहा अथवा फतेहगढ़ चौराहा में से किसी एक प्रमुख स्थान का चयन कर वहां अटल बिहारी वाजपेयी की भव्य प्रतिमा स्थापित की जाए। साथ ही उस चौराहे अथवा स्थल का नाम भी अटल जी के नाम पर रखा जाए, जिससे आने वाली पीढ़ियां उनके योगदान से प्रेरणा प्राप्त कर सकें। शिवम् दुबे ने कहा कि अटल जी केवल एक राजनेता नहीं बल्कि राष्ट्रवाद, लोकतंत्र और भारतीय संस्कृति के प्रतीक थे। उनके सम्मान में नगर में प्रतिमा स्थापित होना पूरे जिले के लिए गौरव की बात होगी। वहीं सभासद अनिल तिवारी ने कहा कि अटल जी ने देश की राजनीति में शुचिता, संवाद और विकास की जो परंपरा स्थापित की, उसे सदैव स्मरण रखा जाएगा। पर्यटन मंत्री ठाकुर जयवीर सिंह ने प्रतिनिधिमंडल की मांग को गंभीरता से सुनते हुए मामले में आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया। उन्होंने जिलाधिकारी से प्रस्तावित स्थलों और प्रशासनिक औपचारिकताओं के संबंध में विस्तृत रिपोर्ट उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद शासन स्तर पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। नगर के भाजपा कार्यकर्ताओं और अटल समर्थकों ने इस पहल का स्वागत करते हुए उम्मीद जताई है कि शीघ्र ही नगर में अटल बिहारी वाजपेयी की प्रतिमा स्थापित होने का मार्ग प्रशस्त होगा। इससे न केवल उनकी स्मृतियों को सम्मान मिलेगा बल्कि नगर की पहचान भी एक नई ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ सकेगी।

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