फर्रुखाबाद:(जेएनआई ब्यूरो) कला एवं संस्कृति को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल करते हुए अखिल भारतीय संस्था कलार्पण द्वारा कथक कार्यशाला का शुभारंभ किया गया। संस्कृति विभाग उत्तर प्रदेश सरकार के निर्देशन में आयोजित यह कार्यशाला डिवाइन लाइट पब्लिक स्कूल, कुटरा फतेहगढ़ में शुरू हुई, जहां विद्यार्थियों और कला प्रेमियों में उत्साह देखने को मिला।
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि डॉ. भारत चंद्र गौड़, विशिष्ट अतिथि विद्यालय प्रबंधक राकेश श्रीवास्तव एवं धर्मपाल सिंह ने दीप प्रज्वलित कर किया। कार्यक्रम में संगीत विधा संयोजक इशांत मिश्रा ने ध्येय गीत प्रस्तुत कर माहौल को सांस्कृतिक रंगों से भर दिया।
मुख्य अतिथि डॉ. भारत चंद्र गौड़ ने कहा कि कला व्यक्ति के सर्वांगीण विकास का महत्वपूर्ण माध्यम है। कलाकार जीवन भर अपनी कला के प्रति समर्पित रहता है और समाज को नई दिशा देने का कार्य करता है।
उन्होंने बताया कि ग्रीष्मकालीन कार्यशालाओं की यह परंपरा आचार्य ओम प्रकाश मिश्र ‘कंचन’ द्वारा शुरू की गई थी, जो आज भी निरंतर जारी है। विद्यालय के प्रबंधक राकेश श्रीवास्तव ने विद्यार्थियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि जीवन में कला का होना बेहद आवश्यक
है। इस तरह की कार्यशालाएं बच्चों के व्यक्तित्व विकास के साथ उनके भविष्य को भी उज्ज्वल बनाने का कार्य करती हैं।
कार्यशाला की प्रशिक्षक शिवानी कटियार ने कथक की विशेषताओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि कथक भारत की पारंपरिक शास्त्रीय नृत्य विधा है, जिसमें भाव, अभिनय और अभिव्यक्ति की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। उन्होंने बच्चों को नृत्य की बारीकियों से परिचित कराया।
कार्यक्रम का संचालन विशाल श्रीवास्तव ने किया। इस अवसर पर सचिव राम मोहन शुक्ला, राज गौरव पाण्डेय, अमित सक्सेना ‘नक्श थिएटर’, मनोज कश्यप, दिलीप कश्यप, सत्या सिंह, धीरज मौर्य, कृष्णा, सुधांशु रहे।
कथक कार्यशाला का शुभारंभ, बच्चों को भारतीय कला-संस्कृति से जोड़ने की पहल





