भगवान परशुराम केवल एक जाति के नहीं, सर्वसमाज के प्रतीक: सपा

फर्रुखाबाद:(जेएनआई ब्यूरो) बीते दिन सपा के धरना प्रदर्शन के दौरान भगवान परशुराम के ऊपर की गयी टिप्पणी से सर्वसमाज सड़क पर आ गया| जनाक्रोश देखकर सपा बैकफुट पर आ गयी| सपा नें कहा कि भगवान परशुराम केवल एक जाति के नहीं, बल्कि संपूर्ण समाज के प्रतीक हैं|

दरअसल बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष जबाहर सिंह गंगवार नें भगवान परशुराम की जयंती बार एसोसिएशन में मनानें का विरोध किया था| इसके साथ भगवान परशुराम पर गलत वयान दिया था| जिसके विरोध में सभी हिन्दू संगठन व बड़ी संख्या में अधिवक्ता भी आ गये| मामले को गर्म देखकर सपा नें यूटर्न ले लिया| सपा जिलाध्यक्ष चन्द्रपाल यादव नें बताया कि धरना-प्रदर्शन में दलित, पिछड़े, अल्पसंख्यक और शोषित वर्गों की भागीदारी रही। इस दौरान बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष जवाहर सिंह गंगवार ने अपने विचार रखते हुए बार एसोसिएशन में परशुराम जयंती न मनाने की बात कही थी। इस विषय को लेकर आज जिलाध्यक्ष की जवाहर सिंह गंगवार से फोन पर वार्ता हुई। बातचीत के दौरान मैंने उनसे इस बयान पर स्पष्टीकरण मांगा। उनके इस विचार को कुछ लोगों द्वारा राजनीतिक रंग देने की
कोशिश की जा रही है। जवाहर सिंह गंगवार किसी महत्वपूर्ण कार्य से बाहर हैं| उन्होंने कहा उनका किसी भी धर्म जाति के देवी देवता एवं महापुरुष को अपमानित करने का उद्देश्य नहीं था।वह वापस लौटने के पश्चात अपने बयान की मूल भावना से अवगत कराएंगे। इसके पश्चात मैं इस प्रकरण पर पूरी रिपोर्ट तैयार कर राष्ट्रीय नेतृत्व के संज्ञान में अवश्य लाऊंगा।
जातियों को बांटना समाज के लिए घातक
जिलाध्यक्ष ने बताया कि सपा यह साफ करना चाहती है कि हम हर धर्म, जाति और समुदाय के महापुरुषों व देवी-देवताओं का सम्मान करते हैं। लेकिन किसी भी महापुरुष को जातिगत चश्मे से देखना अनुचित है।
भगवान परशुराम केवल एक जाति के नहीं, बल्कि संपूर्ण समाज के प्रतीक हैं। हमें ऐसे मुद्दों पर राजनीति करने की बजाय आपसी सौहार्द और सामाजिक एकता को बढ़ावा देना चाहिए| प्रदेश सरकार द्वारा पीडीए समाज पर किए जा रहे अन्याय व दमन के खिलाफ सपा पूरी मजबूती से संघर्षरत है| आज जो सत्ता में हैं, वे केवल चुनाव के समय धर्म की राजनीति करते हैं और बाद में समाज को जातियों में बांटते हैं, यह राष्ट्र और समाज दोनों के लिए घातक है।