वेवजह बैठे बिठाये हुए गम पाल लिया, हमने बेकार में उल्फत का भरम पाल लिया

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फर्रुखाबाद: नववर्ष की पूर्व संध्या पर आयोजित काव्य गोष्ठी में कवियों नें अपनी-अपनी कबिताओं से श्रोताओं को ताली बजानें पर मजबूर कर दिया|
शहर के नितगंजा स्थित डाकघर में आयोजित सरस काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया| जिसमे मुख्य अतिथि के रूप में डाक बैंकिंग के मैनेजर संदीप तिवारी रहे| जिसमे आयोजक आनन्द भदौरिया नें सभी कवियों के डिजिटल पोस्ट बचत खाते खोले| इस दौरान महेश पाल उपकारी नें विना तिथि के जो घर आये, उसे मेहमान कहते है, आनन्द भदौरिया नें वीणा वादिनी वर दो माँ, ऐसा मुझको वर दो माँ, निमिष टंडन नें देखो आज आदमी कितना व्यस्त हो गया, गीता भारद्वाज बादल कुहरा, धुंध हटा निकलो नववर्ष रजाई से, भारती मिश्रा न समझो गुजरे जमाने है, डॉ० कृष्ण कान्त अक्षर दुनिया के रंजो गम से लगती है टूटने, वैभव सोमबंशी नें मंगलमय कल्याणमय शुभ हो नूतन वर्ष है व उपकार मणि ने वेवजह बैठे बिठाये हुए गम पाल लिया, हमने बेकार में उल्फत का भ्रम पाल लिया, प्यार को लोग इबादत भी कहते है, बस यही सोंच के हमने ये भरम पाल लिया गीत का पाठ किया|

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