हैप्पी बर्थ डे टू कृष्णा- आसान नहीं होगा श्रीकृष्ण को प्रसन्न करना

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shri krishnaदेशभर में आज जन्माष्टमी की धूम है. आज रात भगवान श्रीकृष्ण जन्म लेंगे. जगह-जगह भगवान की पूजा-अर्चना की विषेश व्यवस्था की गई है. जन्माष्टमी की पूजा और व्रत का भी खास महत्व होता है.
रात के 12 बजे कान्हा लेते हैं जन्म
रात 12 बजे जैसे ही धरती पर कान्हा के पावन चरण पड़ते हैं, हर तरफ शंख का पवित्र नाद गूंजने लगता है. घंटों की आवाज बधाई संदेश देती है. कान्हा के नाम का जयकारा भक्तों के तन-मन में नया जोश, नई उमंग भर देता है. जन्माष्टमी पर कृष्ण के पावन और अलौकिक रूप का दर्शन भक्तों को धन्य कर देता है. कान्हा जैसे आज्ञाकारी, बलशाली और जगतपालक पुत्र की कामना हर मां को होती है और जन्माष्टमी का त्योहार मां की इन्हीं कामनाओं को पूरा करने का आशीर्वाद लेकर आता है.
इस साल आसान नहीं होगा श्रीकृष्ण को प्रसन्न करना
जन्माष्टमी की रात्रि को मोहरात्रि भी कहा गया है. कहते हैं इस रात को जिसने श्रीकृष्ण का ध्यान करते हुए उनका नाम जप लिया, उसकी सभी इच्छाएं पूरी हो जाती हैं, लेकिन इस साल भगवान कृष्ण से जुड़ा ग्रह शुक्र और राधा से जुड़ा ग्रह मंगल दोनों के नीच होने के कारण और चंद्रमा के रोहिणी नक्षत्र में होने की वजह से जन्माष्टमी पर आपको श्रीकृष्ण को प्रसन्न करने के लिए थोड़ी ज्यादा मेहनत करनी होगी. ज्योतिषियों का कहना है कि गोपाल सहस्त्रनाम और विष्णु सहस्त्रनाम मंत्रों का जाप भक्तों के लिए विशेष फलदाई साबित होंगे.

जन्माष्टमी की पूजा और व्रत का महत्व

जन्माष्टमी के दिन व्रत रखने और पूजा करने से भगवान भक्तों की खाली गोद भर देते हैं, जिन्हें संतान नहीं होती, उन्हें बच्चे की खुशियां दे देते हैं. यही नहीं इस दिन पूजा करने से बच्चों में श्रीकृष्ण जैसे गुण भी आ जाते हैं. लेकिन ये दिन उनके लिए खास तौर पर खुशियां लेकर आता है जो वंश की चिंता में घुले जा रहे हैं. धर्म के जानकारों का कहना है कि जन्माष्टमी पर वंश वृद्धि का आशीर्वाद भगवान अपने भक्तों को देना नहीं भूलते. बस उन्हें खास मंत्रों का जाप करना होता है. जन्माष्टमी के महत्व का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसके व्रत को व्रतराज कहा जाता है. ये मान्यता है कि इस एक दिन व्रत रखने से कई व्रतों का फल मिल जाता है और अगर भक्त पालने में भगवान को झुला दें तो उनकी सारी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं.
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मथुरा में जन्माष्टमी की धूम
बात भगवान श्रीकृष्ण की हो और मथुरा का जिक्र ना हो तो सबकुछ अधूरा ही लगता है. कृष्ण जन्म की मथुरा में भी जोरदार तैयारियां की गई हैं. मंदिरों को धूमधाम से सजाया-संवारा गया है. देश और दुनिया के हर कोने से कई लोग जन्माष्टमी के दिन मथुरा आते हैं. मथुरा और वृंदावन के हर कोने में नंदलाला के जन्म की तैयारी जोर-शोर से की जाती है. और हो भी क्यों ना श्रीकृष्ण का जन्म भी तो मथुरा में ही हुआ था.
दिल्ली के एस्कॉन में भव्य आरती
दिल्ली के एस्कॉन मंदिर में सुबह-सुबह पूरी धूमधाम से नंदलाला की आरती की गई. आधी रात को भगवान जन्म लेंगे, लेकिन उनके जन्म से पहले ही भक्तों में बेहद उत्साह है. एस्कॉन मंदिर में श्रीकृष्ण के भक्त झूमते-गाते नजर आए. सुबह की आरती में सैकड़ों की तादाद में भक्त एस्कॉन मंदिर पहुंचे. शाम से ही एस्कॉन में श्रीकृष्ण के भक्त पहुंचना शुरू कर देते हैं, रात में 12 बजे कन्हा के जन्म के बाद को एस्कॉन का नजारा देखने लायक होता है.
हेमा मालिनी बनीं राधा
कृष्ण जन्माष्टमी के मौके पर बॉलीवुड अभिनेत्री हेमा मालिनी ने राधा की भूमिका निभाई. मुंबई में जुहू के एस्कॉन मंदिर में हेमा मालिनी ने राधा बनकर डांस किया.

मुंबई में दही-हांडी की धूम

मुंबई में भी कृष्ण जन्माष्टमी की तैयारी जोरों पर है. जन्माष्टमी के लिए दही-हांड़ी फोड़ने की आखरी प्रैक्टिस मंगलवार को गोविंदाओं ने की. दही-हंडी अब मनोरंजन के साथ शक्तिप्रदर्शन का साधन भी बनता जे रहे हैं. सुर्खियों में बने रहने के लिए आयोजकों और राजनीतिज्ञों की ओर से लाखों रुपये के पुरस्कार घोषित किए जाते हैं. गोविंदा महीनों से इसकी तैयारियों करते रहते हैं और इस काम के लिए बाकायदा ट्रेनर को भी रखा जाता है. साथ ही साथ गोविंदाओं और उनके मंडल का बीमा भी करवाया जाता है.

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