फर्जी शिक्षकों पर हाईकोर्ट की नजर टेड़ी, नये सिरे से होगा सत्यापन

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फर्रुखाबाद: बेसिक शिक्षा विभाग में फर्जी प्रमाणपत्रों के आधार पर भर्ती अध्यापकों पर इस बार उच्च न्यायालय की नजर टेड़ी हो गयी है। एक जनहित याचिका पर निर्णय के क्रम में उच्च न्यायालय ने 2004 से अब तक हुई विभिन्न विशिष्ट बीटीसी भर्तियों में नियुक्त पाये अध्यापकों के प्रमाणपत्रों का नये सिरे से सत्यापन कराये जाने के निर्देश दिये हैं।

बेसिक शिक्षा विभाग में फर्जी प्रमाणपत्रों के आधार पर चयनित अध्यापकों की एक बड़ी फौज शामिल है। गाहे बगाहे शिकायतों के बाद अक्सर जांच भ्रष्टाचार की भेंट चढ़कर दम तोड़ जाती है। कुछ मामलों में शिकायतकर्ता के ज्यादा पीछे पड़ने पर कार्यवाही के नाम पर बहुत से बहुत वेतन रोक दिया जाता है और जांच ठंडे बस्ते में चली जाती है। यदि किसी मामले में सेवा समाप्ति का आदेश होता भी है तो महीनों उसे सम्बंधित अध्यापक को इस मंशा के साथ तामील नहीं कराते हैं कि वह इस आदेश के विरुद्व न्यायालय से स्थगनादेश ही ले आये।

कुल मिलाकर लाख प्रयासों के बावजूद बेसिक शिक्षा विभाग से इन फर्जी शिक्षकों का सफाया नहीं हो पा रहा है परन्तु इस बार मामला कुछ अलग है। एक जनहित याचिका पर उच्च न्यायालय ने संज्ञान लेते हुए सम्पूर्णानंद विश्वविद्यालय के प्रमाणपत्रों पर चयनित सभी अध्यापकों के प्रमाणपत्रों की जांच सम्बंधित महाविद्यालय के अभिलेखों से विशेष वाहक द्वारा कराये जाने के निर्देश दिये हैं। उल्लेखनीय है कि विश्वविद्यालय स्तर पर फर्जी मार्कसीटों के फर्जी सत्यापन की संभावना के मद्देनजर ये आदेश किया गया है।

डायट प्राचार्या सुमित्रा गर्ग ने बताया कि उच्च न्यायालय के आदेश के क्रम में शासन से पत्र जारी हो गया है। सम्बंधित बेसिक शिक्षा अधिकारियों को इस सम्बंध में निर्देशित भी किया जा चुका है।