मात्र दस रुपये में शहर में जाम का लाइसेंस

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फर्रुखाबाद: पुलिस को गरीबों को न्याय दिलाने में भले ही महारत हासिल न हो लेकिन अवैध बसूली में नंबर वन है और शायद यह रिकार्ड कभी नहीं टूटेगा| तिराहे, चौराहों पर पिकेट ड्यूटी करने वाले सिपाहियों की नजर सदैव शिकार पर रहती है| ड्ग्गामार वाहनों का संचलन हो या नो इंट्री में वाहन घुसेड़ने का मामला।

ऐसा ही दृष्य गुरूवार सुबह फर्रुखाबाद के बस अड्डे पर देखने को मिला। छोटे ट्रक के चालक ने वाहन को जैये ही नो इंट्री जोन चौक बाजार की तरफ मोड़ा तभी वहां ड्यूटी पर तैनात खाकी वर्दी वाला बड़ी फुर्ती से उठा और हाँथ देकर वाहन को रोक लिया  चालाक ड्राईवर भी सिपाही की मंशा को समझ गया। करीब आते ही उसने रुपये निकालकर सिपाही की ओर बढा दिये|

कुछ पुलिस कर्मी कोतवाली के सामने केवल इस काम के लिये खडे कर दिये जाते है कि बह यहां से गुजरने बाले टैम्पुओं से ओवरलोडिग के बहाने व दुपहिया वाहनों से कागजात चैक करने के बहाने अवैध बसूली कर सके। बाहनों से पुलि‍स कर्मी सादा बर्दी में भी अबैध बसूली करने में लगे हुए है। जब भी कोई मौरम, ईंट के अलावा लकड़ी व भूसा से भरे ट्रेक्टर एवं मेटाडोर वाहन आते हुए दि‍खाई पडते है तो अवैध वसूली में लगे इन पुलि‍स कर्मि‍यों के चेहरे पर चमक आ जाती है, और तुरंत ही अपनी बाइक पर सवार होकर आ रहे बाहनों के सामने अपनी बाइक लगा देते हैं। ऐसे में सामान से भरे इन वाहनों के चालक गाड़ी रोक देते है और फि‍र शुरू हो जाता है अबैध वसूली का दौर। जो वाहन चालक सादा बर्दी बाले इन पुलि‍स कर्मि‍यों को जानते है वह चुपचाप या कहें कि‍ उन्हें देखते ही उन्हें देने के लि‍ए रूपये नि‍काल लेते है। जो नये होते है वह सादा बर्दी में इन्हें नहीं पहचान पाते है और रूपये देने से इंकार करते है तो यह पुलि‍स कर्मी मारपीट पर उतारू हो जाते है।