हेल्थ: टीवी, कंप्यूटर छीन रहा है आंखों की रोशनी

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यदि आपका बच्चा लगातार कंप्यूटर में लगा रहता है। टीवी पर कार्टून देखने के लिए चिपका रहता है। दूध पीना उसे बिल्कुल पसंद नहीं।

मैदान की बजाय घर में विडियो गेम्स में व्यस्त रहना अच्छा लगता है। खानपान में हरी सब्जियां देखते ही मुंह चिढ़ाता है और जंक फूड उसे बेहद पसंद है, तो आप इसे गंभीरता से लेना शुरू करें। इन वजहों से आपका लाड़ला अपनी आंखों की रोशनी खो सकता है।

सरकार के राष्ट्रीय अंधता निवारण कार्यक्रम के तहत प्राणी संस्था के एक सर्वे के दौरान चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। 6 से 14 साल के तीन लाख 75 हजार बच्चों पर किए गए सर्वे में 52 हजार बच्चों में दृष्टि दोष पाया गया है। इनमें 35 हजार लड़कियां और 17 हजार लड़के शामिल हैं। दृष्टि दोष के तहत इन बच्चों में मायोपिया, एंबलायपिया, भेंगापन, मांसपेशियों में तनाव की वजह से सिरदर्द, आंखों से पानी आना, विटामिन ए की कमी पाई गई है। यहां तक कि 22 बच्चों में मोतियाबिंद की पुष्टि भी हुई है।

पिछले साढ़े चार साल से गौतमबुद्धनगर, गाजियाबाद और पूर्वी दिल्ली के कुछ स्कूलों में राष्ट्रीय अंधता निवारण कार्यक्रम के तहत प्राणी संस्था 6 से 14 साल की उम्र के बच्चों की आंखों की जांच के लिए एक अभियान चला रही है। गौतमबुद्धनगर के 148 , पूर्वी दिल्ली के 50 और गाजियाबाद के 262 स्कूलों में समय-समय पर जांच शिविर लगाए जा रहे हैं। संस्था के निदेशक डॉ. पी. एस. चौहान ने बताया कि इन स्कूलों में सरकारी व पब्लिक सभी तरह के छोटे-बड़े स्कूल शामिल किए गए हैं।

उन्होंने बताया कि 52 हजार बच्चों में 10 पर्सेंट बच्चे ऐसे पाए गए जिनकी दूर की नजर कमजोर है। इसके अलावा 12 पर्सेंट बच्चों में एक आंख विजुअलिटी में कमी पाई गई। दूसरी आंख की विजुलटी ठीक होने की वजह से इन बच्चों को देखने में कोई समस्या नहीं हो रही थी। अधिकांश बच्चों में विटामिन ए की कमी निकली। उन्होंने बताया कि बच्चे को कोई समस्या नहीं होने पर भी साल में एक बार उसकी आंखों की जांच करा लेनी चाहिए।