फर्रुखाबादः रविावार को जनपद की सभी ग्राम पंचायतों में 19-19 नवसाक्षरों की परीक्षा का आयोजन किया गया। प्रति छात्र 19 रुपये की दर से निर्धाति बजट विभागीय अधिकारी बिना डकार लिये ही हड़प गये। पुरानी उत्तर पुस्तिकाओं पर ही परीक्षा की कवायद पूरी कर ली गयी। दूर दराज के इलाकों में तो परीक्षा का उपक्रम तक नहीं किया गया, केवल कागजों पर ही निबट गयी परीक्षा।


विदित है कि साक्षर भारत मिशन के अंतर्गत निरक्षरों व नवसाक्षरों को प्रेरकों के माध्यम से शिक्षित कर शिक्षा की मुख्य धारा से जोड़ने की योजना बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों के लिये बजट-हड़पो मिशन बन कर रह गया। अव्वल तो प्रेरकों का चयन ही उगाही के चलते लटका रहा। बाद में जेएनआई पर इस संबंध में चली खबरों के बाद जिलाधिकारी के हस्तक्षेप से प्रेरकों की आधी-अधूरी सूची जारी हो पायी। परंतु शासन से परीक्षा कार्यक्रम निर्धारित होने के कारण परीक्षा तो करानी ही थी। सो रविवार को नवसाक्षरों की तीसरी परीक्षा आयोजित करायी गयी। जनपद की सभी 512 ग्राम पंचायतों में 19-19 नवसाक्षरों की परीक्षा करानी थी। प्रति छात्र 19 रुपये की दर से बजट निर्धारित है। परंतु परीक्षा के लिये बजट या सामग्री उपलब्ध कराना तो दूर ग्राम पंचायत लोक शिक्षा समिति, जिसका सचिव प्रधानाध्यापक होता है, को दिशा निर्देश तक जारी नहीं किये गये। केवल मौखिक निर्देशों पर ही परीक्षा या परीक्षा का उपक्रम पूर्ण कर लिया गया। परीक्षा के उपरांत उत्तरपुस्तिकायें जमा करने के लिये ब्लाक व जिला समन्वयक तक कहीं नजर नहीं आये।
विकास खंड बढ़पुर के कन्या प्राथमिक विद्यालय बुढ़नामऊ में परीक्षा के दौरान तो पूरा एक कुनबा ही एक साथ परीक्षा देता नजर आया। 26 वर्षीय सतनाम अपनी मां मालती व पत्नी सोनी के साथ एक ही पट्टी पर बैठ कर परीक्षा दी। परीक्षा देने आयी एक 17 वर्षीय लड़की सरिता तो इस उम्र में पढ़ने की शुरुआत करने के प्रश्न पर रोपड़ी। सरिता ने किसी प्रकार अपनी सुबकियों पर काबू पाते हुए कहा कि उसे बहुत अफसोस है कि उसने पढ़ने की उम्र में अपनी मां का कहना नहीं माना।
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साक्षर भारत मिशनः 1 लाख 84 हजार 832 रुपये डकार गये
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