सपाइयों के दबाव में वक्फ की जमीन के बैनामे की तैयारी

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फर्रुखाबाद: नियमों को धता बताकर राजनैतिक दबाव में वक्फ जमीन के दाखिल-खारिज की जैसे तैयारी कर ली है। पहले तो तथ्यों को छिपाकर वक्फ जमीन की विक्री के लिए अनापत्ति प्रमाणपत्र जारी करा लिया गया। बाद में तथ्यों के सामने आने पर शासन स्तर पर की गयी अपील के बाद धोखे से जारी अनापत्ति प्रमाणपत्र तो निरस्त कर दिया गया परन्तु उसके आधार पर हुए बैनामे पर अभी भी कशमकश जारी है। जिलाधिकारी व तहसीलदार द्वारा बैनामे को शून्य घोषित कर दिये जाने के बावजूद सपा के पूर्व विधायक की पत्नी के नाम वक्फ जमीन के दाखिल खारिज का मुकदमा अभी एसडीएम सदर के न्यायालय में जीवित है।

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प्रचंड बहुमत के साथ सत्ता में वापसी के बाद समाजवादी पार्टी के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव भले ही लखनऊ में बैठकर वक्फ जमीनों की सुरक्षा की बातें कर रहे हों परन्तु जमीनी हकीकत कुछ और है। उन्हीं की पार्टी से जुड़े लोग वक्फ जमीनो पर कब्जे से पीछे नहीं हट रहे हैं। बात सपा सरकार के पुराने कार्यकाल की है। तब तथ्यों को छिपाकर प्रशासन की मिलीभगत से कायमगंज के मोहल्ला गिर्द स्थित वक्फ की जमीन की विक्री के लिए अनापत्ति प्रमाणपत्र जारी कर दिया गया व इस एनओसी के आधार पर आनन फानन में बैनामा भी करा लिया गया। इस बीच वक्फ के मुतबल्ली मुतवल्ली अब्दुल हसीन खां की पैरवी और सपा की सरकार जाने के बाद शासन स्तर पर पूर्व में जारी एनओसी को निरस्त कर दिया गया।

शासनादेश के क्रम में जिलाधिकारी ने भी यह एनओसी 2 अप्रैल 2004 में  निरस्त कर दी। एनओसी निरस्त होने के आधार पर तहसीलदार ने बैनामे को शून्य घोषित करते हुए दाखिल खारिज के लिए भेजी गयी फाइल को लिखित टिप्पणी के साथ निरस्त कर दिया। इसके बावजूद कब्जे के लालच में सक्रिय विपक्षियों ने तहसीलदार के आदेश के विरुद्व एसडीएम के न्यायालय में अपील नम्बर 7/10 मुकदमा कर दिया। जो आज तक विचाराधीन है।

अब एक बार फिर सपा की सरकार सत्ता में आयी, तो विपक्षी फिर सक्रिय हो गये। सत्ता पक्ष के दबाव में फाइल एक बार फिर खुल गयी और वर्षों से बंद पड़ी फाइल पर धड़ाधड़ तारीखें लगने लगीं। मजे की बात है कि इस दौरान स्वयं वक्फ बोर्ड की ओर से पार्टी बनाये जाने के प्रार्थनापत्र तक का उपजिलाधिकारी सदर ए के लाल ने संज्ञान लेना उचित नहीं समझा। जाहिर है कि अधिकारियों के स्थानांतरण की इस वयार में एसडीएम साहब भी चलते-चलते कुछ निर्णय कर ही जाने के मूड़ में नजर आ रहे हैं। यद्यपि एसडीएम कोर्ट का आदेश अभी बाहर नहीं आया है। परन्तु यह अंदाजा तो सबको है कि उसमें क्या लिखा जायेगा।

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