संघ का फॉर्मूला, बहुमत आया तो मोदी नहीं तो शिवराज PM!

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modi-shivrajनई दिल्ली। नरेंद्र मोदी को पीएम पद का दावेदार घोषित करने को लेकर बीजेपी की खींचतान बढ़ती ही जा रही है। एक अखबार का दावा है कि आरएसएस का खेमा चाहता है कि मोदी के नाम पर मुहर लगे लेकिन लालकृष्ण आडवाणी और सुषमा स्वराज इसके लिए राजी नहीं। दोनों खेमे के बीच बढ़ते तनाव के बीच संघ ने एक नया फॉर्मूला निकाला है। इस नए फॉर्मूले के तहत पीएम पद के लिए बीजेपी से एक नहीं बल्कि तीन-तीन दावेदारों के नाम सामने आ रहे हैं।

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बीजेपी के लिए पीएम पद की दावेदारी नासूर बनती जा रही है। ये वो घाव है जिसे बार-बार कुरेदा जा रहा है और हालात बिगड़ते ही जा रहे हैं। गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की दावेदारी पर मुहर लगाने की गरज से आरएसएस एक फॉर्मूले के साथ सामने आई है। इसके मुताबिक अगर मोदी बीजेपी को 272 सीटें दिलवाने में कामयाबा रहे तो वो ही प्रधानमंत्री बनेंगे। अगर पार्टी 200 सीटों से आगे नहीं बढ़ती तो गठबंधन की सरकार संभव। ऐसे में शिवराज सिंह चौहान या राजनाथ सिंह गठबंधन सरकार की कमान संभाल सकते हैं। राजनाथ सिंह का नाम मोदी खेमे ने आगे बढ़ाया है। जबकि शिवराज का नाम आडवाणी खेमे की ओर से आया है।
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सूत्रों के मुताबिक पीएम पद की दावेदारी को लेकर जारी खींचतान से मोदी काफी नाखुश हैं और उन्होंने संघ प्रमुख मोहन भागवत और पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह से साफ-साफ कह दिया है कि वो तभी पीएम बनेंगे जब बीजेपी अपने बूते बहुमत हासिल करेगी। सूत्रों के मुताबिक मोदी गठबंधन की गठरी लेकर पीएम नहीं बनना चाहते हैं।

जानकारों का कहना है कि नरेंद्र मोदी ये जान चुके हैं कि 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी 272 सीटों के जादुई आंकड़े तक नहीं पहुंच पाएगी। इसलिए अब उनमें प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किए जाने को लेकर कोई खास उत्साह नहीं बचा है।

मोदी भले ही पीएम बनने के लिए अनिच्छुक हों, लेकिन आरएसएस उनकी दावेदारी में लगातार दम भर रहा है। मोदी के पक्ष में हवा बनाने के लिए संघ प्रमुख मोहन भागवत दिल्ली पहुंच चुके हैं। शुक्रवार को उन्होंने बीजेपी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी और सुषमा स्वराज से मुलाकात भी की।

सूत्रों के मुताबिक भागवत से मुलाकात के दौरान सुषमा स्वराज ने कहा कि साल के अंत में दिल्ली, मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में अगर मोदी के नाम का ऐलान अभी किया गया तो चारों राज्यों में पार्टी के समीकरण बिगड़ सकते हैं। सुषमा स्वराज ने तर्क दिया कि चार राज्यों के विधासभा चुनावों में बढ़ती महंगाई, भ्रष्टाचार और आर्थिक मोर्चे पर केंद्र सरकार की नाकामी बड़ा मुद्दा है। ऐसे में अगर मोदी के नाम का ऐलान हुआ तो चुनाव मुद्दों से हटकर व्यक्ति विशेष पर केंद्रित हो जाएगा और इससे अल्पसंख्यक वोटों का ध्रुवीकरण होने की तगड़ी संभावना है।

सूत्रों के मुताबिक मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कमोबेश यही तर्क राजनाथ सिंह के सामने रखा था। शिवराज ने कहा था कि अगर मोदी को उम्मीदवार घोषित किया गया तो मुस्लिम वोटों का ध्रुवीकरण होगा और मध्य प्रदेश में पार्टी को 30 सीटों पर नुकसान हो सकता है।

मामला उछलने के बाद शिवराज सिंह चौहान ने ट्विटर पर सफाई दी, ‘मीडिया में ऐसी खबरें आ रही हैं कि मैं नरेंद्र मोदी को पीएम पद का दावेदार घोषित किए जाने का विरोध कर रहा हूं। ये खबर पूरी तरह गलत और भ्रामक है। बीजेपी में पार्टी सबसे ऊपर है और सही वक्त आने पर पीएम पद के दावेदार का नाम घोषित किया जाएगा। अभी इस बारे में कयास लगाने से बचें।‘

फिलहाल सबकी नजर टिकी है 8 और 9 सितंबर को होने वाली समन्वय समिति की बैठक पर। इस बैठक में आरएसएस, बीजेपी, वीएचपी और दूसरे संगठनों के आला नेता मिलकर बीजेपी की आगे की रणनीति पर चर्चा करेंगे। कहा जा रहा है कि मोदी की दावेदारी बैठक के एजेंडे में नहीं है। लेकिन जब मामला इतना गरम है तो फिर इससे बच पाना मुश्किल ही लगता है।

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