वैदिक मंत्रों के बीच पूजे गए सृष्टि शिल्पी विश्वकर्मा

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फर्रुखाबाद:(जेएनआई ब्यूरो) उद्योग के देवता और दुनिया के पहले इंजीनियर भगवान विश्वकर्मा की जयंती जिले में गुरुवार को धूमधाम से मनाई गई। इस अवसर पर कल-कारखानों को सजाया गया तो वहीं मशीन कारीगरों ने काम बंदकर पूजा-अर्चना की। इस उपलक्ष्य में जगह-जगह प्रसाद वितरण भी किया गया। लेकिन कोरोना संक्रमण के चलते कार्यक्रमों की भव्यता कम रही|
शहर में बेल्डिंग, लोहे का काम व लकड़ी, बिजली का काम करने वाले दुकानदारों ने अपनी दुकानों को झालर से सजाया तथा पूजा पाठ किया। हर कारखाने व दुकान में हवन किया गया तथा भगवान विश्वकर्मा को याद किया गया। रोडवेज बस स्टैंड की वर्कशॉप में पूजा की। लोक निर्माण विभाग और बिजली विभाग के वर्कशॉप और सभी उपकेंद्रों में पूजा पाठ किया गया। उपकेंद्रों को सजाया गया तथा प्रसाद बांटा गया।  आइटीआई में पूजन किया गया तथा प्रसाद वितरण हुआ|
सृष्टि सृजन के साज शिल्पी के रूप में वैदिक कालीन समय से प्रतिष्ठित विश्वकर्मा को निर्माण के भगवान का दर्जा प्राप्त है। द्वापर व त्रेता कालीन धर्म ग्रंथों में भगवान विश्वकर्मा की चर्चा कई जगहों पर आई है। रामकाल में सोने की लंका और जरासंध से राज छोड़ कर भागे भगवान कृष्ण के लिए द्वारिका पुरी के निर्माण का श्रेय भगवान विश्वकर्मा को ही जाता है। ऐसे निर्माण के निर्माता कहे जाने वाले भगवान विश्वकर्मा की हर साल लोक में इस एक दिन पारंपरिक रूप में आराधना की जाती है।

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