वाह दरोगा जी- अंगुलियों पर खूब नचाया प्रशासन, अफसरों ने तस्वीरों सहित मीडिया भी झूठा बताया

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फर्रुखाबाद: प्रशासन की नाक-कान कहे जाने वाले अधीनस्थ कर्मचारी व अधिकारी ही जब आला अधिकारियों को गुमराह कर जायें तो आश्चर्य नहीं होना चाहिये। परंतु प्रशासनिक अधिकारी जब मीडिया में छपी खबरों को छोड़िये तस्वीरों तक को झुठलाने पर उतर आयें तो फिर अधीनस्तों की तारीफ करने को मन करने ही लगता है। ऐसा ही कुछ नजारा थाना शमसाबाद के ग्राम वाजिदपुर के मजरा अकबरपुर दामोदर में दबंग यादवों द्वारा शाक्य बिरादरी के आधा सैकड़ा ग्रामीणों को पलायन के लिये मजबूर कर देने के मामले में नजर आया। मामला तब और भी गंभीर हो जाता है जब मात्र 20 दिन पूर्व ही जनपद के राजेपुर में भी इसी प्रकार की घटना में कठेरिया बिरादरी के लोग गांव छोड़ कर भाग चुके हों। केवल अनी बिरादरी के नाम पर गांव में सूने पड़े घरों के सामने अकेला बैठा फूल चंद्र ही हमें मिला। उसने बताया कि उसका भाई गिरीश बाजार गया है। साधनों की व्यवस्था कर रहे हैं। कल हम भी चले जायेंगे। अब अकेल गांव में क्या करेंगे।

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थाना शमसाबाद की ग्रामपंचायत वाजीदपुर के मजरा अकबरपुर दामोदर में पुश्तों से रहते बसते चले आ रहे शाक्य बिरादरी के आधा सैकड़ा ग्रामीण अपने पूर्वजों की जमीने व दहलीज छोड़ कर गांव से पलायन कर चुके हैं। घरों पर लगे ताले जनपद में कानून व्यवस्था की दुहाई देने वाले प्रशान का मुंह चिढ़ा रहे हैं। मीडिया में इन सूने पड़े घरों पर लटकते तालों की खबरें व तस्वीरें छप रही हैं। परंतु इससे भी ज्यादा अचम्भे की बात तो यह है कि आला पुलिस अधिकारी इसे झुठलाने पर आमादा हैं। हद तो तब हो गयी जब आम तौर पर अपराधों को छुपाने के लिये बदनाम उत्तर प्रदेश पुलिस के दावों पर जिलाधिकारी ने भी मोहर लगा दी। प्रशासन की ओर से जारी अधिकारिक बयान में कहा गया है कि गांव से कोई पलायन नहीं हुआ। सभी ग्रामीण गांव में ही हैं। पर सवाल यह है कि तस्वीरों में लटकते तालों का जेवर पहने यह दरवाजे किसके हैं। अगर गांव से ग्रामीणों का पलायन नहीं हुआ तो अचानक रामप्रकाश, सकटे, हिरश्चंद, अवनेश, महेश, उदय चंद्र, महिमा चंद्र, संतराम, गनेश व उमेश आदि लगभग एक दर्जन ग्रामीणों व उनके परिजनों को क्या जमीन खा गयी या आसमान निगल गया।

बात बहुत सीधी सी है। विवाद विगत कई दिनों से चल रहा था। एक पक्ष ने पुलिस से सांठगांठ कर ली, और दूसरे पक्ष पर दबाव बनाना शुरू कर दिया। बहाना ढूंड कर मारपीट करना, घरों में पत्थर फेंकना, रात-बिरात घरों में घुस कर महिलाओं से बदसलूकी का प्रयास करने जैसी घटनायें रोज होने लगीं तो पीड़ितों ने जिलाधिकारी से गुहार लगाई। पुलिस का मामला देख कर उन्होंने एसपी के पास ग्रामीणों को भेज दिया। एसपी साहब ने दरोगा को फोन मिलाया तो उसने बताया कि सर यही लोग तो दबंग हैं, पेशबंदी में शिकायतें कर रहे हैं, आज भी इनमें से कुछ ने गांव में फायरिंग की है। फिर क्या था एसपी साहब का पारा चढ़ गया। बोले सालों बंद कर दो (यह कथानक उन पीड़ितों की जुबानी डरते डरते सुनाया गया)। दरोगाजी ने पीड़ितों में शामिल गांव के पूर्व प्रधान रामप्रकाश सहित कई को थाने में बैठा लिया। वर्तमान प्रधान ने कुछ मिलने जुलने वाले असरदार लागों से चिरौरी कर जैसे तैसे इन लोगों को छुडा कर वापस घर भेजा।

इस घटना क्रम के बाद ग्रामीणों का व्यवस्था से विश्वास उठ चुका था। सुबह होने पर ग्रामीणों ने आपस में सलाह मशविरा कर जान और बहन बेटियों की आबरू गंवाने से बेहरत गांव छोड़ जाने का फैसला कर लिया। समस्या पशुओं की थी। सो उनके लिये वाहनों की व्यवस्था की गयी। इसी बीच घटना की भनक मीडिया को लग जाने की सूचना पर पुलिस सक्रिय हो गयी। तब तक लगभग आधे पीडित पलायन कर चुके थे। गांव में पहुंच कर हलका इंचार्ज ने ग्रामीणों को नरम-गरम तरीके से समझाने का प्रयास किया। मरता क्या न करता। शाम हो चुकी थी। वाहनों की भी व्यवस्था नहीं थी। सो रात गुजारना मजबूरी थी।

परंतु मीडिया में खबर आ चुकी थी। न्यूज चैनलों पर खबर चलने लगी थी। दूसरे दिन कई अखबारों ने प्रथम पृष्ठ पर स्टोरी की थी। लखनऊ तक से फोन आने लगे। डीएम ने एसपी से पूछा, तो जवाब वही था जो दरोगा उनकों बता चुका था। डीएम ने फिर भी अपनी तरफ से एसडीएम काय्रमगंज को जांच के लिये भेजा। एसडीएम साहब ने भी पहुंचने से पहले थाना इंचार्ज से कैफियत ली। अपने पहुंचने की सूचना दी। उनके पीछे पीछे थानेदार साहब भी गांव पहुंच गये। पीड़ित पक्ष के अधिकांश लोग जा चुके थे। सामने खड़े दबंगों की ताकत व हिम्मत कई गुना और बढ़ चुकी थी। पीछे दरोगा जी की नजरों का इशारा भी साफ था। इसके बावजूद पीड़ितों ने अपनी बात कहने की दबी जुबान से कोशिश की। पलायन के विषय में पूछे जाने पर पुलिस ने बताया कि “सर कोई नहीं गया। सब तो यहीं आपके सामने मौजूद हैं।” एसडीएम साहब का कोई सीधा सरोकार तो था नहीं, डीएम का आदेश था, सो हुकुम बजाने चले आये थे। कायमगंज पहुंच कर डीएम को सूचना दे दी-“कोई पलायन नहीं हुआ, घटना स्थल पर यथा स्थिति बनाये रखने के आदेश पुलिस को दे दिये गये हैं”। नतीजा यह हुआ कि प्रशासन ने आधिकारिक रूप से यही बयान जारी कर दिया।

इस पूरे घटनाक्रम के उल्लेख पीछे आपको यह बताना है कि पहले तो हम भी थानाध्यक्ष को दोषी समझ रहे थे, परंतु जब जनपद स्तर पर प्रशासन भी दरोगा की बात को सही मान कर अधिकारिक बयान जारी कर दे तो फिर दरोगा की योग्यता की प्रशंसा करनी ही चाहिये।

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