रासलीला आत्मा और परमात्मा का शुद्ध मिलन

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फर्रुखाबाद: शहर क्षेत्र के लोहाई रोड स्थित राधा श्याम शक्ति मंदिर में चल रही श्री राधाकृष्ण के जीवन चरित्र की कथा को आज शाम कहते हुए डा0 सुरेन्द्रनाथ द्विवेदी ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण की रासलीला आत्मा और परमात्मा का शुद्ध मिलन है। अनंत जन्मो से बिछड़ा जीव जब तक परमात्मा से नहीं मिल जाता तब तक उसे पूर्ण शांती नहीं मिलती।

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इस दौरान डा0 सुरेन्द्रनाथ द्विवेदी ने श्रोताओं को कथा सुनाते हुए कहा कि अनादि, अविद्या के कारण आत्मा एक शरीर से दूसरे शरीर में और एक योनि से दूसरे योनि में भटकती रहती है। प्रभुकृपा या संत कृपा से ही जीव की अनादि अविद्या का विनाश होता है। उन्होंने कहा कि गोपियों ने भगवान श्रीकृष्ण को पाने के लिए कात्यायनी देवी की अर्चना की थी। वहीं महारानी रुकमणी ने भी भगवान को पति रूप में प्राप्त करने से पूर्व मां पार्वती का पूजन किया।

उन्होंने कहा कि रामचरित मानस में यह बात वर्णित है कि श्रीराम को पति रूप में प्राप्त करने के लिए सीता जी ने गौरी पूजन किया था। इससे यह बात तो सिद्ध होती है कि परमात्मा को प्राप्त करने के लिए विधि विधान से होने वाली भक्ति की आवश्यकता है तभी रागात्मिक भक्ति का उदय होता है। शास्त्र विधान के अनुसार की गयी भक्ति से जब अन्तःकरण शुद्ध हो जाता है तभी उस पावन अन्तःकरण में भगवत विषय अनुराक्त का उदय होता है। डा0 सुरेन्द्र ने इस दौरान कथा वाचकों को भगवान श्रीकृष्ण के विभिन्न चरित्रों का वर्णन बड़े ही सहज तरीके से किया। इस दौरान कार्यक्रम की व्यवस्था देखने के लिए प्रवीन सफ्फड़, विनय अनुराग, कृष्ण गोपाल जालान, रामरतन जालान, रामकिशन सिगतिया, सावरमन अग्रवाल, अश्वनी गुप्ता आदि लोग मौजूद रहे।

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