रावण की चिता की लकड़ी को लूटकर घर लेजाने में क्या है राज?

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फर्रुखाबाद: भारत देश में हिन्दू धर्म सबसे पुराना धर्म माना गया है। जिसमें विभिन्न प्रकार की मान्यताओं के साथ देवी देवताओं की पूजा की जाती है। हिन्दू धर्म के अनुसार 33 करोड़ देवी देवता हैं जो मानव जाति की रक्षा और उनके लिए फलदायी सिद्ध होते हैं। इसी के चलते विभिन्न प्रकार से इन देवी देवताओं को पूजा जाता है। यहां तक कि पुरानी कहावत है कि हिन्दू धर्म में आदर के नाम पर पत्थरों तक की पूजा होती है। वहीं मान्यताओं को अगर जानने की कोशिश करें तो दशानन रावण की चिता की लकड़ी को घर ले जाने के लिए श्रद्धालुओं में ऐसी मारामारी मचती है कि कई तो चुटहिल हो जाते हैं। आखिर दशानन की चिता की लकड़ी को घर ले जाने के पीछे क्या रहस्य है?

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त्रेता युग में दशानन रावण लंका नगरी में निवास करता था। जो धन, धान्य और सम्पन्नता का प्रतीक मानी जाती थी। रावण की लंका सोने की थी और सोना भी विशेष प्रकार का जो जलने के बाद भी काला नहीं होता था। कई महीनों तक राम रावण के बीच युद्ध चला। लेकिन राम के हाथ सफलता नहीं लग रही थी। तब विभीषण ने रावण की नाभि में अमृत होने की बात कही। जिस पर श्री राम ने रावण की नाभि में तीर मारकर उसका वध किया।

उस समय की बात करें तो श्री राम की सेना में रावण के मरने के बाद विशेष उत्साह था। रावण तीनों लोकों का राजा था और अपनी वीरता का प्रमाण वानर सेना अपने घर पर प्रमाणित करने के लिए रावण की अस्थियां ले आयी थी। वहीं आम जनता में भी तभी से रावण की चिता की लकड़ी घर ले जाने की परम्परा शुरू हो गयी। लेकिन इसके पीछे वैज्ञानिक रहस्य दूसरा था। वर्तमान में रावण के जले हुए पुतले में पटाखे इत्यादि लगाये जाते हैं। जिसे जलने के बाद बांस की लकड़ी में बारूद की गंद आने लगती है और जब यह लकड़ी चारपाई इत्यादि में लाकर ठोंक दी जाती है तो उसमें खटमल नहीं पनपते।

वहीं रावण की लंका में लगी लकड़ी को भी घर ले जाने की प्रथा है। आध्यात्मिक कारणों पर ध्यान दे तो धन के राजा कुबेर ने लंका का निर्माण देव शिल्पी विश्वकर्मा द्वारा कराया गया था। जिसे बाद में रावण ने जबर्दस्ती ले लिया था। लंका दहन के बाद बचा हुआ सोना वानर सेना ने इस मान्यता के साथ उठा लिया था कि उसमें कुबेर का वास है। इसी परम्परा के आधार पर आज भी जहां लंका दहन की परम्परा निभायी जाती है तो वहां लोग लंका की बची हुई राख या लकड़ी घर पर लाकर तिजोरी में रखते हैं। मान्यता है कि इस प्रकार कुबेर का उनके घर में वास होता है।

बुधवार को रावण के पुतला दहन व लंका दहन के बाद रावण की चिता की लकड़ी लेने के लिए श्रद्धालु उमड़े तो पुलिस के हाथ पैर फूल गये। तड़ातड़ छूट रहे पटाखों के बीच घुसी भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने कई बार लाठियां भी चटकाईं। लेकिन भीड़ थी कि बगैर रावण की चिता की लकड़ी के जाने को तैयार नहीं हुई। कइयों ने तो खुन्नस में पुलिस अधिकारियों को गाली गलौज तक कर दिया। कइयों को पकड़कर पुलिस ने पिटायी भी कर दी। लेकिन रावण की चिता की लकड़ी करीब दो घंटे तक पुलिस की नाक में दम किये रही।

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