फर्रुखाबाद: चुनावो में कदम रखने से पहले सचिन यादव होम वर्क करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे है| युवाओ को कैसे जोड़ा जाए, घर घर में घुस कर महिलाओ को कैसे जोड़ा जाए और दुखती नब्ज पर कहा हाथ रखा जाये| इस दौरान सचिन यादव जो नई चाल चल रहे है वो पुराने अंदाज में चुनाव लड़ने वालो के लिए एक चुनौती पेश जरुर करेगी| आधी आबादी का वोट हासिल करने के लिए सचिन की बहन मोनिका का कमान सम्भालना| नगरपालिका के पिछले चुनाव में यही चाल मनोज और वतस्ला अग्रवाल ने चली थी और विरोधी आज तक नहीं समझ पाये कि वत्सला अग्रवाल की जीत में सबसे बड़ा हाथ आधी आबादी यानि महिलाओ का था| ये कैसे हुआ और कैसे किया गया ये राज जेएनआई ने समझने के लिए चुनावो के बाद बड़ा अध्ययन किया था, एक एक किटी पार्टी के महत्त्व से लेकर घरेलु नौकरानियों के सहारे चुनाव साधा गया| क्या क्या दिया गया और कैसे कैसे हुआ ये न खोलने वाले राज है| एक एक वोट के लिए सधी हुई चाल मनोज अग्रवाल ने चली थी| हालाँकि उसमे शराब बाटने जैसे कुछ घटिया अनुचित साधन भी इस्तेमाल हुए मगर सबसे बड़ी बात कि उन्होंने वो सोचा और किया जो दूसरे सोच नहीं पाए|

बिलकुल यही अंदाज नवोदित नेता सचिन यादव करने जा रहा है| महिला सम्मेलन के बहाने महिलाओ को इक्कट्ठा करना और महिला सशक्तिकरण का भाषण पिलाने के साथ साथ उन्हें घर पहुचने से पहले अपनी एक छतरी का उपहार देकर विदा करना एक सधी हुई राजनैतिक चाल कह सकते है| वैसे नेता और आयोजक इसे समाजसेवा कहेंगे मगर शराब की दुकान पर कोई काफी पीने नहीं जाता इसे भूलना नहीं चाहिए| तो महिला सम्मेलन में भाग लेने आई हर बेटी और बहु को एक छाते के साथ विदा करना सचिन यादव की घर घर पहुचने का एक बड़ा माध्यम रहा| इसके लिए सचिन यादव ने न तो बसपा की तरह जातियों के सम्मान करने का नाटक किया और न ही कोई हल्ला गुल्ला| बात घर घर पहुचेगी बगैर जाति का समीकरण लगाये| कितनी महिलाये आई ये तो गिनती नहीं है मगर छाता सब के हाथ में दिखा| वो छाता जो शायद वे आसानी से नहीं खरीद पाती| जातियों के सहारे राजनैतिक गोट बिछाने वाले हर नेता के लिए भी सचिन यादव एक खतरे की घंटी है|
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राजनैतिक तैयारी- छाते के बहाने घर घर पंहुचा दी सचिन ने अपनी पहचान
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