रक्षा बंधन 13 को: कच्चे धागे से बंधा पक्का बंधन

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फर्रुखाबाद: हिंदू धर्मावलंबियों द्वारा श्रावण मास की पूर्णिमा को रक्षा बंधन का पर्व बड़े ही उत्साह से मनाया जाता है। इस दिन बहनें अपने भाइयों की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधती है और उसके उज्जवल भविष्य की कामना करती हैं। वहीं भाई भी जीवन भर अपनी बहनों को रक्षा का वचन देते हैं। यह पर्व भाई-बहन के प्रेम का अनुपम उदाहरण है। इस बार यह पर्व 13 अगस्त, शनिवार को है।

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बहनों को इस पर्व का बड़ी ही बेसब्री से इंतजार रहता है। वहीं भाई भी बहनों के घर आने की बाट जोहते हैं। जब बहनें अपने भाइयों की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधती है तो वे यह कामना करती हैं कि उसके भाई के जीवन में कभी को कष्ट न हो। वह उन्नति करें और उसका जीवन सुखमय हो। वहीं भाई भी इस रक्षा सूत्र को बंधवाकर गौरवांवित अनुभव करता है और जीवन भर अपनी बहन की रक्षा करने की कमस खाता है। यही स्नेह व प्यार इस त्योहार की गरिमा को और बढ़ा देता है।

रक्षा बंधन सिर्फ एक त्योहार ही नहीं है बल्कि इसका एक मनोवैज्ञानिक पक्ष भी है, जो भाइयों को उनकी बहनों के प्रति जिम्मेदारी को व्यक्त करता है। यह जिम्मेदारी सिर्फ बहनों की रक्षा करने तक ही सीमित नहीं है बल्कि जीवन भर उसके सुख-दु:ख में साथ देने की है।

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