योग के माध्यम से बंदी सीख रहे जीवन जीने की कला

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फर्रुखाबाद:(जेएनआई ब्यूरो) मनुष्य के लिए स्वास्थ्य ही धन है। जीवन में इसकी बड़ी अहमियत है। स्वस्थ्य व्यक्ति समाज और परिवार दोनों के लिए जरूरी है। सेन्ट्रल जेल फतेहगढ़ में शुक्रवार को शुरू हुए तीन दिवसीय योग प्रशिक्षण शिविर के पहले दिन बंदियों नें योग के माध्यम से जीवन जीने की कला का गुर सीखा|
आर्ट ऑफ लिविंग के योग शिक्षक रामकृपाल मिश्रा नें योग शिविर के प्रथम दिन कहा कि योग भगाए रोग की अवधारणा काफी प्राचीन हैं। योग हमारी पुरानी संस्कृति का हिस्सा रहा है। भाग दौड़ भरी जिदगी में मनुष्य को दवा से दूर रखने के लिए योग एक सशक्त माध्यम है। योग प्रशिक्षकों ने पहले दिन सूर्य नमस्कार, सुदर्शन क्रिया, व्यायाम, प्राणायाम, शीर्षासन, मत्यस्यासन, अनुलोम-विलोम के अलावा कई अन्य योग के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी दी। वरिष्ठ जेल अधीक्षक प्रमोद शुक्ला नें बताया कि योग प्रकृति से जुड़ी हुई वह सुंदरतम विधा है जिससे व्यक्ति स्वस्थ रह सकता है। योग एक जीवन जीने की कला है जिससे हम अपने अस्तित्व, अपनी चेतना से गहरे जुड़ते हैं। जेलर सुरेश चन्द्र, उपकारापाल सुरजीत कुमार सिंह आदि रहे|

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