ये जाँच है बड़ी आसान- लैपटॉप वितरण अव्यवस्था में चकबंदी अधिकारिओ ने लगायी बाट या फिर..

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फर्रुखाबाद: तो क्या कुल 21 ब्लाक में लगे सभी 42 अफसर अपनी ड्यूटी सही से निभाने में नाकामयाब रहे या फिर डीएम के लिखित आदेशो में अफसरों ने मनमानी करके फेरबदल कर लिया था| जैसे जब आर्किटेक्ट के बनाये नक़्शे में कोई छोटा से फेरबदल घर का पूरा नक्शा ही बिगाड़ देता है, बिलकुल वैसा ही हुआ था| लैपटॉप लाभार्थियो को सीट पर पहुचते ही मिल जाने थे ऐसा आदेश था, मगर सीट पर सिर्फ खाली झोला रख दिया गया| और मुख्यमंत्री के मंच पर पहुचने तक लैपटॉप नहीं बाटे गए थे|
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21 ब्लाको में लैपटॉप प्रभारी अफसर बनाये गए थे| इनमे 2 इंजीनियर और 19 चकबंदी अधिकारी थे| आदत के अनुसार जैसे उत्तर प्रदेश में चकबंदी कई वर्षो तक चलती है वैसे ही इन चकबंदी अधिकारिओ ने लैपटॉप भी आराम से बाटने का काम किया| लाभार्थी लैपटॉप लिए जा रहा है बिना कुछ दिए कहीं ये सोच तो देरी का कारण नहीं बनी? जो भी हो चकबंदी अधिकारिओ ने डीएम के करे कराये पर पानी फेर दिया| उस रात सुबह 5 बजे तक डीएम सिटी मजिस्ट्रेट और तहसीलदार लैपटॉप ब्लाको तक पहुचाते रहे| उसके बाद ये लैपटॉप चकबंदी अधिकारिओ को जो ब्लाक के लैपटॉप प्रभारी थे उन्हें लाभार्थियो की कुर्सी पर रखवाने थे| और इस काम में लाइन वार जिम्मेदारी लेखपालो की थी| मगर अगर लेखपालो को लैपटॉप दिए ही न गए होंगे तो सीट पर रखे जाते कैसे?
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पंक्ति न 1 के जिम्मेदार लोग कहाँ थे?
जब मुख्यंत्री अखिलेश यादव मंच से उतर कर नीचे आ गए और ब्लाक संख्या 1 में आकर उन्होंने वितरण में देरी होते देखा और लैपटॉप अपने हाथ से लाभार्थियो को सौपने चाहे तो मामला गड़बड़ा गया| एक लाभार्थी को दूसरे का लैपटॉप दे दिया गया| ये बात मुख्यमंत्री को भी पता चल गयी| पंक्ति संख्या 1 पर लेखपाल इंस्पेक्टर सिंह यादव पंक्ति प्रभारी थे, उनकी सहायता के लिए पतिराम कश्यप शिक्षक को लगाया गया था| ब्लाक प्रभारी संतोष सिंह यादव सहायक निबंधक कोआपरेटिव थे तो उस ब्लाक के लैपटॉप प्रभारी अजय कुमार वर्मा चकबंदी अधिकारी थे| जब मुख्यमंत्री उस ब्लाक में पहुचे तो ये सब कहा थे? इस बात की तहकीकात की सबसे ज्यादा जरुरत है| क्योंकि तस्वीरे जो उस वक़्त की मिली है उसके अनुसार पांचवी पंक्ति के प्रभारी लेखपाल विवेक पाण्डेय और तीसरी पंक्ति के शिक्षक संजय तिवारी को आगे बुलाया गया| और बेसिक शिक्षा अधिकारी को व्यवस्था अपने हाथो से सम्भालनी पड़ी| उन्हें किन परिस्थियो में आगे बुलाना पड़ा/आना पड़ा ये भी जाँच का बड़ा बिंदु है| क्या गायब हो गए थे पंक्ति न 1 के प्रभारी लेखपाल इंस्पेक्टर सिंह यादव, संतोष सिंह यादव अजय कुमार वर्मा या फिर ये जब अक्षम होने लगे पीछे से दूसरे लोगो को बुलाना पड़ा| ये सब तो जाँच का विषय है| मगर तस्वीरे यही बोलती है की पीछे की पंक्ति में लगे कर्मियों ने आगे आकर व्यवस्था सम्भाली थी-
laptop dist mismanage

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इन ब्लाको के लैपटॉप प्रभारियो से जबाब माँगा गया है| जिम्मेदारी तो तय होना निश्चित ही है ऐसा सरकारी सूत्रों से इशारे मिल रहे है| मगर लैपटॉप रखने की जगह सिर्फ झोले रखे जाए ये परिवर्तन कैसे हुआ असल हिसाब इस बात पर ही तय होगा| पूरे पंडाल में लैपटॉप प्रभारी बेसिक शिक्षा अधिकारी भगवत पटेल थे| यानि कि यदि लैपटॉप की जगह झोले रखे जा रहे थे तो बेसिक शिक्षा अधिकारी को जिलाधिकारी के आदेश के क्रम में सीटो पर लैपटॉप रखे जाने को तय करना चाहिए था| बबल जरुर ब्लाक न 1 में पकड़ में आया जहाँ मुख्यमंत्री अखिलेश यादव पहुचे थे, मगर कमोवेश पूरे पंडाल के लाभार्थियो की सीटो पर लैपटॉप नहीं रखे गए थे|

कौन कौन थे ब्लाक के लैपटॉप प्रभारी-

१- अजय कुमार वर्मा, चकबंदी अधिकारी|
२- माननी लाल, चकबंदी अधिकारी|
३- नरेन्द्र सिंह, चकबंदी अधिकारी|
४- मंदी लाल, सहायक चकबंदी अधिकारी|
५- राम नारायण यादव, अवर अभियंता RES|
६- राकेश कुमार, सहायक चकबंदी अधिकारी|
७- श्याम सिंह, सहायक चकबंदी अधिकारी|
८- इन्द्रेश कुमार पाण्डेय, सहायक चकबंदी अधिकारी|
९- शत्रुंजय सिंह, सहायक चकबंदी अधिकारी|
१०- रामविलास आजाद, सहायक चकबंदी अधिकारी|
११- रामनाथ वर्मा, सहायक चकबंदी अधिकारी|
१२- शिवराम वर्मा, सहायक चकबंदी अधिकारी|
१३- वीरेंदर सिंह, सहायक चकबंदी अधिकारी|
१४- अवधेश कुमार श्रीवास्तव, सहायक चकबंदी अधिकारी|
१५- विजय कुमार वर्मा, सहायक चकबंदी अधिकारी
१६- श्रीचंद, अवर अभियंता RES|
१७- शैलेन्द्र कुमार, सहायक चकबंदी अधिकारी|
१८- कुवर महेश सिंह, सहायक चकबंदी अधिकारी|
१९- योगेन्द्र सिंह, सहायक चकबंदी अधिकारी|
२०- सुनील कुमार प्रजापति, सहायक चकबंदी अधिकारी|
अगले अंक में पढ़िये कौन से अफसर को कौन सी जिम्मेदारी दी गयी थी और क्यों भूखे प्यासे वापस लौटे लाभार्थी|

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