मानव के अंदर बैठे पांच राक्षसों को मारना ही पूजा का मुख्य उद्देश्य

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FARRUKHABAD : नवरात्र के पांचवें दिन माता स्कन्द की पूजा का एक विशेष महत्व है, इनको ममता की देवी भी कहा जाता है। महाकाल मंदिर स्थित 108 प्रतिमाएं बड़ी अदभुत एवं अलौकिक हैं। मंदिर में पूजा अर्चन के बाद प्रवचन में कहा गया कि मानव के अंदर बैठे पांच राक्षसों को मारना ही पूजा का मुख्य उद्देश्य है।devi

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महाकाल मंदिर में अर्चना दीक्षित व मुनि अलौकिक महाराज के संयुक्त पूजन में मां भगवती को वेदमंत्रों से पूजा गया तथा उनको विभिन्न प्रकार के मेवा फल मिष्ठान, पूड़ी सब्जी आदि पकवानों का भोग धीरज सिंह कुशवाह व कृष्णादेवी, कमलेश, ज्योति, ममता, धीरेन्द्र आदि लोगों ने लगाया। इस विशेष पूजन में सैकड़ों भक्तों को अपने प्रवचन में कहा कि मानव के अंदर बैठे हुए पांच रक्षस काम, क्रोध, मोह, लोभ, अहंकार का नाश उसी प्रकार करना चाहिए जिस प्रकार देवियों ने पांच राक्षसों का वध किया था।

मंदिर में पूजा के बाद सभी भक्तों को प्रसाद वितरण किया गया। इस दौरान अवधेश बाजपेयी, लल्ला, संजय, विमला, रेनू, शान्ती, सरोज, निर्मला बाजपेयी आदि मौजूद रहे।

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महाकाल मंदिर के बारे में बताया गया कि मंदिर में 108 प्रतिमायें विभिन्न स्वरूपों की विराजमान हैं। इनमें प्राचीन समय की स्थापित माता फूलमती की प्रतिमा भी विराजमान है। मां महामाई फूलमती जोकि सम्पूर्ण विश्व एवं देश के विभिन्न भागों में अनेक नामों से जानी जाती है। उनमें पाकिस्तान में हिंगला देवी, तिब्बत में दक्षायणी देवी, नेपाल में गुहेश्वरी देवी, बंग्लादेश में ढकेश्वरी देवी, यशोरेश्वरी देवी, श्रीलंका में इन्द्राक्षी देवी तथा कश्मीर में चीची देवी, लद्दाख में सुन्दरी देवी, गुजरात में अम्बारी देवी आदि के नामों से जानी जाती है।

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