भ्रूण हत्या नहीं कुपोषण बिगाड़ रहा है महिला-पुरुष अनुपात

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फर्रुखाबाद, जनगणना-2011 के ताजे आंकड़ों से कम से कम एक बात तो साफ हो गयी है कि अभी भी जनपद में महिला-पुरुष अनुपात विगाड़ने के लिये भ्रूण हत्या से अधिक कुपोषण जिम्मेदार है। शासन की ओर से महिलाओं व किशोरियों को कुपोषण से बचाने के लिये अनेक योजनाओं के बावजूद स्थिति में सुधार नहीं दिख रहा है। जनगणना के प्रारंभिक आंकड़ों के अनुसार विगत एक दशक में तस्वीर काफी बदली है। साक्षरता के प्रतिशत में वृद्धि के साथ ही जनसंख्या वृद्धि की दर पर भी अंकुश लगा है।

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*साक्षरता में वृद्धि के साथ जनसंख्या वृद्धि दर घटी


केंद्र सरकार की ओर से जनगणना.2011 के जो आंकड़े प्रकाशित किये गये है, उनके अनुसार विगत एक दशक में जनपद की जनसंख्या 15 लाख 70 हजार से बढ़कर 18 लाख 87 हजार से अधिक हो गयी है। महिला पुरुष अनुपात पर नजर रखे समाजशास्त्रियों के नजरिये से सुखद पहलू यह है कि इस 3 लाख 17 हजार से अधिक की जनसंख्या बृद्धि में 1 लाख 58 हजार पुरुषों के सापेक्ष महिलाओं की भागीदारी 1 लाख 59 हजार से अधिक है। इन आंकड़ों को थोड़ा और बारीकी से विश्लेषित किया जाये तो पता चलता है कि नगर क्षेत्र में जहां प्रति एक हजार पुरुषों पर 881 महिलायें हैं वहीं ग्रामीण क्षेत्र में यह संख्या मात्र 872 ही है।

जाहिर है कि यह अंतर भ्रूण परीक्षण और भ्रूण हत्या नहीं कुपोषण और अन्य रूढ़िवादी सामाजिक परिस्थितियां ही जिम्मेदार हैं। साक्षरता दर में वृद्धि और जनसंख्या वृद्धि दर में कमी इस जनगणना के दो सुखद संदेश हैं और जो देखा जाये तो साक्षरता रूपी सिक्के के दो पहलू है। विगत दस वर्षों में शिक्षा के प्रति जनता का बढ़ा रुझान ही है जिसके चलते साक्षरता का प्रतिशत 49.72 से बढकर 59.62 हो गया। महिलाओं की साक्षरता प्रतिशत में वृद्धि पुरुषों की अपेक्षा बेहतर रही है। महिला साक्षरता प्रतिशत में जहां 12 प्रतिशत की वृद्धि हुई है वहीं पुरष वर्ग में यह वृद्धि मात्र 9 प्रतिशत है।

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