भ्रष्टाचार से निबटने को लोकायुक्त ने मांगी और ताकत

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**एमपी व कर्नाटक का दिया उदाहरण**

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भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे कई मंत्रियों पर कार्रवाई की गाज गिरा चुके लोक आयुक्त न्यायमूर्ति एनके मेहरोत्रा का मानना है कि भ्रष्टाचार पर कारगर रोक के लिए इस संस्था को और मजबूत और अधिकारसंपन्न बनाए जाने की जरूरत है। अभी लोक आयुक्त का दायरा काफी सीमित है। यूपी में इस संस्था को एमपी व कर्नाटक की तर्ज पर और ताकत मिलनी चाहिए।

न्यायमूर्ति मेहरोत्रा ने कहा कि सीमित अधिकारों के चलते प्रदेश में लोकायुक्त चाह कर भी बहुत कुछ करने की स्थिति में नहीं है। लोकायुक्त के पास कोई न तो कोई जांच एजेंसी है और न ही तकनीकी व वित्तीय विशेषज्ञ, जिनके जरिये वह समयबद्ध तरीके से किसी मामले की प्रभावी जांच करा सके। लोकायुक्त जांच भी तभी कर सकता है, जब उससे कोई शिकायत करे। मानवाधिकार आयोग व अन्य संवैधानिक संस्थाओं की तरह उसे भी स्वत: संज्ञान लेकर जांच करने का अधिकार देकर और मजबूत व प्रभावी बनाया जा सकता है। मौजूदा समय में लोकायुक्त के पास किसी मामले की जांच कराने के लिए कोई ऐसी एजेंसी नहीं है जिस पर उनका सीधा नियंत्रण हो। तकनीकी व वित्तीय विशेषज्ञ न होने से प्रभावी जांच में कठिनाई आती है। मध्य प्रदेश व कर्नाटक में ऐसी व्यवस्था है जिसकी वजह से वहां भ्रष्टाचार संबंधी मामलों का तेजी और प्रभावी ढंग से निस्तारण हो रहा है।

न्यायमूर्ति मेहरोत्रा का कहना है कि पुलिस, विजिलेंस या एंटी करप्शन विंग लोकायुक्त के अधीन की जानी चाहिए। ताकि इनके अफसरों से वह अपनी निगरानी में जांच करवा सके। अभी ले-देकर दो डिप्टी एसपी ही दिए गए हैं और वे भी ऐसे जिनका कहीं और समायोजन नहीं हो सकता।

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