बीमार सीएचसी की बदहाल स्वास्थ्य सेवाएं

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फर्रुखाबाद:(राजेपुर) सूबे की सरकार केबल गरीबों को उनका हक दिलाने के नाम पर ही आयी| सरकार बनने के बाद सूबे की स्वास्थ्य व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिये काफी प्रयास भी शुरू हुये| लेकिन उनके सरकारी अफसर अपने फर्ज को इस तरह अंजाम दे रहे है यह तस्वीरों में साफ दिख रहा है| फिर क्या फर्क रह गया पिछली सपा सरकार और वर्तमान की भगवा सरकार में| जब गरीब को उसका हक की नही मिल पाता| दर्द से परेशान मरीज जब सीएचसी में आता है तो उसे ना ही समय पर चिकित्सक मिलता है और ना ही दवा |
कस्बे में बनी सीएचसी सैकड़ो गाँवो के लोगो के लिये किसी संजीबनी से कम नही है| लेकिन उसको केबल सफेद हाथी इस लिये कहना उचित होगा कि यदि अस्पताल में 11 बजे झाड़ू लगेगी तो इसका मतलब है कि चिकित्सक दोपहर से पहले नही आते होंगे| शनिवार को भी यही शिकायते मिलने के बाद जब जेएनआई टीम ने सीएचसी को खंगाला तो पता चला जो आरोप लग रहे थे वह सही थे|
सीएचसी के प्रभारी चिकित्सक आरिफ सिद्दीकी के दरवाजे पर ताला लटका था| अन्य अस्पताल कर्मी भी नदारद थे| अस्पताल के महिला वार्ड में प्रसव हेतु भर्ती 22 वैशाली पत्नी प्रेमराज सिंह निवासी सुखियापुर ने आरोप लगाया कि बीती शुक्रवार की शाम वह लगभग 7 बजे अस्पताल प्रसब हेतु पंहुची| लेकिन उसे किसी ने नही देखा| रात भर फर्स पर लेती रही| शनिवार को सुबह उसे फार्मासिस्ट ने आकर बेड नसीब कराया| सूत्रों ने बताया कि अस्पताल में लगे सीसीटीवी कैमरे रात में लगभग 11 बजे बंद कर दिये जाते है और सुबह जब सीएचसी कर्मी आते है तब सीसीटीवी खोला जाता है|
रैन बसेरा का खराब पड़ा इज्जत घर
अस्पताल के करीब ही एक रैन बसेरा बना है| इसको परिजनों के तीमारदारों के खिले खोला गया है| जिसका शौचालय खराब है| वही अपनी की टंकी भी टूटी है|
संबिदा कर्मी का डेढ़ साल से नही मिला मानदेय
अस्पताल में तैंनात सत्यपाल पुत्र दयाराम संबिदा कर्मी के पद पर तैनात है| उसने बताया कि डेढ़ वर्ष से उसका मानदेय नही मिला| जिससे उसको रोटी के लाले है| लेकिन अस्पताल उसका मानदेय देने का मन नही बना रहा|

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