फर्रूखाबाद: भ्रष्टाचार के खिलाफ शासन व जिला प्रशासन की लाख कोशिशों के बावजूद शिक्षा विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार समाप्त होने का नाम नहीं ले रहा है। जनपद में लगभग आधा सैकड़ा वित्तीय सहायता प्राप्त विद्यालयों में घोर अनियमिततायें कर तमाम नियुक्तियां की गयीं और सरकारी धन को भयंकर चूना लगाया जा रहा है। इसका एक उदाहरण नगर क्षेत्र के वढ़पुर स्थित शीतला जूनियर हाईस्कूल में देखा जा सकता है।
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उक्त विद्यालय में शैक्षिक सत्र 1979-80 में इण्टरमीडिएट पास प्रमाण पत्र पर नियुक्त किये गये सहायक अध्यापक ओमप्रकाश राजपूत को विद्यालय प्रवंधतंत्र में हाईकोर्ट के एक आदेश की आड़ में नियुक्ति तिथि 01 जुलाई 1979 से प्रशिक्षित वेतन मान लगबाकर सरकार को चूना लगाया है जबकि श्री राजपूत नें 1982 में बीएड की परीक्षा उत्तीर्ण की थी। तत्कालीन वेसिक शिक्षा अधिकारी रामस्वरूप शुक्ला द्वारा जारी 30 मई 1987 के अनुमोदन पत्रांक सं0 854/8788 में श्री राजपूत को इण्टर, बीएड दर्शाया गया है और उनकी नियुक्ति तिथि से ही प्रशिक्षित व प्रोन्नति वेतनमान का शिक्षा विभाग द्वारा एरियर बनाकर दे दिया गया विभाग के अधिकारी व कर्मचारियों द्वारा यह जानने की भी कोशिश नहीं की गयी कि श्री राजपूत नें बीएड की योग्यता किस वर्ष हासिल की।
विगत मई व जून में ऑनलाईन बेतन भुगतान की शासन की योजना के अन्र्तगत जनपद के सभी विद्यालयों के रिकार्ड शिक्षा विभाग द्वारा तलव किये गये थे जिसमें उक्त विद्यालय का भी समस्त रिकार्ड विभाग को उपलब्ध कराया गया। जिसमें श्री राजपूत द्वारा बीएड की योग्यता का प्रमाण पत्र भी जमा किया गया था इसके बाबजूद विभागीय अधिकारी व कर्मचारी आंख बन्द करके ऑनलाईन पेंमेंट योजना में उनकी डाटा फीडिंग करा दी और एक माह का वेतन भी निर्गत करवा दिया गया। वैसे तो उक्त विद्यालय में इसके अलावा भी कई अनियमिततायें बताई जाती हैं। विद्यालय के प्रभारी प्रधानाध्यापक घुरईलाल वर्मा ने बताया कि प्रोन्नति व प्रशिक्षित वेतनमान गलत ढंग से लग गया है।
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बीएसए का कारनामा: अप्रशिक्षित अध्यापक को दे दिया प्रशिक्षित वेतन मान
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