बीआरजीएफ की निगरानी अब डीएम के जिम्मे

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investigationलखनऊ : प्रदेश सरकार ने बसपा हुकूमत के एक और फैसले को पलटते हुए पिछड़ा क्षेत्र अनुदान निधि (बीआरजीएफ) के कार्यो के लिए नई गाइड लाइन तय की है। अब बीआरजीएफ योजना की धनराशि से कराये जाने वाले निर्माण कार्यो का क्रियान्वयन सम्बंधित ग्राम पंचायत, क्षेत्र पंचायत, जिला पंचायत और नगर निकाय करेंगे।
सरकार ने पलटा बसपा हुकूमत का एक और फैसला
पैकफेड व लैकफेड को नहीं मिलेगा कोई कार्य

पंचायती राज मंत्री बलराम यादव ने शनिवार को नये फैसले की जानकारी दी। कार्यो के प्रभावी समन्वय, पर्यवेक्षण एवं अनुश्रवण के लिए जिलाधिकारी को दायित्व सौंपते हुए जिला परियोजना प्रबंध इकाई का अध्यक्ष बनाया गया है। परियोजनाओं की वित्तीय व प्रशासनिक स्वीकृति निर्गत करने का अधिकार भी डीएम को दिया गया है।

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जिला परियोजना इकाई योजना के निर्माण कार्य का क्रियान्वयन पंचायत व निकायों के जरिए सुनिश्चित करायेगी। बसपा सरकार में बीआरजीएफ के कार्यो के लिए कई निर्माण एजेंसियों को कार्यदायी संस्था बनाया गया था। गत वर्षो में ग्राम पंचायतों के लिए स्वीकृत धनराशि यूपी प्रोजेक्ट कारपोरेशन लिमिटेड, समाज कल्याण निर्माण निगम लिमिटेड, पैकफेड और लैकफेड जैसी निर्माण संस्थाओं को धनराशि आवंटित होती थी। अब यह व्यवस्था समाप्त कर दी गयी है। अब केन्द्र सरकार की गाइड लाइन्स के अनुसार बीआरजीएफ योजना के कार्य केवल पंचायतें एवं नगर निकायों से ही कराया जायेगा। यदि कोई कार्य पंचायत की क्षमता के बाहर होगा तो पंचायत प्रस्ताव पारित कर एजेंसी या विभाग का चयन स्वयं करेगी। कार्यो के पर्यवेक्षण की पूरी जिम्मेदारी भी सम्बंधित पंचायत की होगी। उन्होंने बताया कि पचास हजार रुपये तक की लागत के कार्यो की स्वीकृतियां ग्राम पंचायत स्वयं प्रदान करते हुए कार्यो का क्रियान्वयन करेगी, परंतु उससे अधिक लागत के निर्माण कार्यों की तकनीकी स्वीकृति वित्तीय नियमों के अन्तर्गत सक्षम स्तर से प्राप्त की जायेगी।

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