बिप्र धेनु सुर संत हित, लीन्ह मनुज अवतार

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फर्रुखाबाद:(नगर संवाददाता) शुक्रवार को रामलीला में “असुरों के अत्याचारों से रक्षा करने का आश्वासन नारायण ने दिया तथा अवतार भी धारण किया। अयोध्या नरेश दशरथ निसंतान होने से दुखी थे उन्होने अपना दुरख गुरु बशिष्ठ जी को सुनाया, तब गुरु वशिष्ठ ने श्रृंगी ऋषि को बुला कर ‘पुत्रकामेष्टि यज्ञ ‘कराया। यज्ञ से प्रकट हुए अग्निदेव से प्राप्त हव्य को राजा ने अपनी रानियों कौशल्या, कैकयी तथा सुमित्राको वाँट दिया।
राजा दशरथ के चार पुत्र राम-भरत-लक्ष्मण और शत्रुघ्न हुए पूरे अवध में आनंद छा गया। उधर जनक पुरी में सीता जी का जन्म हुआ।” श्री राम विविध कला केन्द्र के कलाकारों ने विजय दुबे (मटर, लाल) के निर्देशन में श्री राम लीला मण्डल के तत्वावधान में लीला क्षेत्र रामवाग व सरस्वती भवन में आकाशवाणी, राम जन्म, जानकी जन्म, बाल लीला का मंचन भावपूर्ण ढंग से किया गया। लीला क्षेत्र राम वाग में वंश वाजपेयी (राम) अनिमेष दुबे (लक्ष्मण) मायापति शुक्ल (भरत) अंशू त्रिपाठी (शत्रुघ्न), वैभव पान्डेय (सीता) तथा सरस्वती भवन में यश मिश्र (राम), ईशू मिश्र (लक्ष्मण), सत्यम शुक्ल (सीता), राम जी दीक्षित, मोहन – दुवे (रूप सज्जा) गौतम (वस्त्र विन्यास), अंशित, जीतू, संकल्प पांडेय, वशीक अखिलेश, विमल, अवधेश वाजपेयी, छवि, पुरुषोत्तमशुक्ला, चन्द्रकिशोर शुक्ला, शिव ओम, सत्यम दीक्षित (मंच व्यास), पं. शान्ती स्वरूप (आरती पूजन) सुवोध, अशोक मिश्र ने लीलामंचन व व्यवस्था में सहयोग दिया।

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