बाल विकास विभाग से छिना आंगनबाड़ी में नियुक्ति का अधिकार

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शासन ने महिला और बाल विकास विभाग से कार्यकत्री और सहायिका की नियुक्ति का अधिकार छीन लिया है। नियुक्ति की कमान अब जिलाधिकारी और जिला स्तरीय अधिकारियों के हाथ में होगी। चयन में प्रथम वरीयता सहायिका को दी जाएगी।

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कार्यकत्री और सहायिकाओं की नियुक्ति पर कुछ रोज से रोक चल रही है। पहले सीडीपीओ कार्यालय में आवेदन जमा किये जाते थे, लेकिन अब जिलाधिकारी, मुख्य विकास अधिकारी, जिला कार्यक्रम अधिकारी और विकास खंड अधिकारी के कार्यालयों जमा किये जाएंगे। ऑन लाइन भी आवेदन किया जा सकेगा। आवेदन के लिए दो माह का समय दिया जाएगा। दो महीने आवेदनों की छटनी को निर्धारित किये हैं, जिसके बाद तीन दिन में चयन कमेटी बैठेगी। पहले चयन कमेटी में ब्लॉक स्तरीय अधिकारी होते थे, अध्यक्ष सीडीपीओ रहते थे, लेकिन अब अध्यक्ष डीएम द्वारा नामित अधिकारी होगा। साफ-सुथरी छवि के जिला स्तरीय अधिकारी सदस्य रहेंगे। डीपीओ और सीडीपीओ भी कमेटी के सदस्य रहेंगे।

अब तक चयन में तलाकशुदा और विधवा को प्रथम वरियता दी जाती थी, लेकिन अब पांच साल की सेवा पूरी करने वाले सहायिका को वरीयता दी जाएगी। इसके बाद ही विधवा, तलाकशुदा और बीपीएल परिवार के आवेदक का नंबर आएगा। शैक्षिक योग्यता में बदलाव किया गया है। पहले कार्यकत्री के लिए न्यूनतम योग्यता हाईस्कूल और अधिकतम योग्यता इंटर थी, जिसे अधिकतम योग्यता स्नातक कर दिया गया है। मैरिट में स्नातक के नंबर भी जोड़े जाएंगे। कार्यकत्री और सहायिका अब 62 साल की उम्र तक नौकरी कर सकेंगी, जबकि पहले उम्र निर्धारित नहीं थी।

 

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