बाल दिवस: कचरे में भविष्य तलाश रहा बचपन

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फर्रुखाबाद:(दीपक शुक्ला) शासन द्वारा सर्व शिक्षा अभियान के तहत करोड़ों रुपया खर्च हो रहा है, लेकिन इसका सकारात्मक असर नहीं दिख रहा। कई बच्चे पढ़ने के समय स्कूल ना जाकर सड़कों से जरूरत का सामान बीनते नजर आते हैं। ऐसे में तमाम कवायदों के बावजूद सबको शिक्षा का सपना व्यर्थ नजर आ रहा है।
पूरे जिले में बाल दिवस मनाया गया| जिसमे लंबे-लंबे भाषण दिये गये| फोटो सेशन हुआ और सब मौज से अपने घर लौट गये | लेकिन आज जब मै सुबह उठा तो घर का मुख्य द्वारा खोलते ही कुछ नौनिहाल मैले-कुचैले कपड़े पहनें घर के आस-पास पड़ा कूड़ा 9(प्लास्टिक) एक पन्नी में भर रहे थे| देखकर लगा क्या क्या शिक्षा पर करोड़ों खर्च होनें के बाद यह हकीकत है| छह से चौदह वर्ष तक के बच्चों को स्कूल भेजने के लिए सर्व शिक्षा अभियान हर वर्ष चलाया जाता है। इसके तहत रैलिया निकाली जाती हैं और लोगों केबीच जनजागरण किया जाता है। जिससे बच्चे स्कूल भेजे जा सके। तमाम कवायदों की औपचारिकता तो होती है, लेकिन कईबच्चे अभी भी पढ़ने की उम्र के स्कूल जाने से वंचित बने हुए हैं। बच्चे या तो होटलों पर काम कर रहे हैं अथवा सड़कों पर कूड़ा बीनते नजर आते हैं। इन बच्चों को कोई प्रेरित करने वाला नहीं। इससे शिक्षा की स्थिति बदतर हाल में हैं। कचरा बीन रहे बच्चों ने अपना नाम न बताते हुए कहा ड्रेस में अन्य बच्चों को स्कूल जाते देख उन्हें भी स्कूल जाने की जिज्ञासा होती है. वह भी चाहते हैं कि पढ़-लिखें|
पीठ पर स्कूली थैला की जगह कचरे का बोरा
सूरज की पहली किरण के साथ ही ये बच्चे पीठ पर प्लास्टिक का बोरा लिए वह कबाड़ चुनने के लिए निकल पड़ते हैं। इस जमात में कई बच्चे शामिल रहते हैं। इन बच्चों के स्वास्थ्य सुरक्षा की कोई गारंटी लेने को तैयार नहीं है। इन नौनिहालों के प्रति सरकारी महकमा बिल्कुल उदासीन है।कबाड़ से चुने गए हैं सामान को ले गए बच्चे कबाड़ी वालों के पास जाते हैं।कबाड़ी वाले इन्हें कुछ पैसे देकर उनका सामान खरीद लेते हैं। यह पैसा न्यूनतम मजदूरी के बराबर भी नहीं होता है।

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