क्या बाबू सिंह कुशवाहा से मायावती ने किनारा किया?

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लखनऊ। सीबीआई जांच शुरू होने के साथ बाबू सिंह कुशवाहा का रसूख समाप्त हो रहा है। पहले तो मायावती ने उन्हें कैबिनेट से बाहर का रास्ता दिखाया और अब मायावती ने उनके मुख्यमंत्री आवास पर आने पर पाबंदी लगा दी। सूत्रों के अनुसार बाबू सिंह कुशवाहा को पार्टी महासचिव के पद से भी हटा दिया गया है। हर चेनल और मीडिया के अन्दरखानो में दिन भर चर्चा गरम रही मगर देर शाम आते आते बसपा के प्रेस नोट ने इन बातो ख़ारिज कर दिया|

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मायावती जिस प्रकार कुशवाहा से किनारा कर रही है उससे यह पता चला है कि आने वाले दिन उनके लिए बेहद खराब होंगे। मायावाती के अगले शिकार हैं अनन्त कुमार मिश्रा जिन्हें पहले ही उनके पद से हटाया जा चुका है। पूरे दिन इस बात की चर्चा गरम रही| सुबह से देर शाम तक मीडिया दफ्तरों में फोन घनघनाते रहे|

देखें क्या क्या हुई चर्चा-

दो सीमओ व एक डिप्टी सीएमओ की हत्या के मामले की जांच अब सीबीआई कर रही है। सीबीआई माया सरकार के किसी मंत्री पर उंगली उठाया उससे पहले ही मायावती ऐसे आरोपी मंत्रियों को अपने से दूर करने का मन बना चुकी हैं। ऑपरेश क्लीन के तहत अब मायावती ने दोनों मंत्रियों को उनके पद से हटाने के साथ कई अन्य सुविधाएं भी छीन रही है।

मायावती ने उनसे महासचिव पद भी ले लिया। सूत्रों की माने तो बीएसपी सुप्रीमों ने निर्देश दिया कि जो भी सरकारी होर्डिंग लगी हैं और उनमें से बाबू सिंह कुशवाहा की फोटो को हटा दिया जाए। मायावती के ये निर्देश श्री कुशवाहा ही नहीं स्वास्थ्य मंत्री रहे अनन्त कुमार मिश्रा पर भी लागू हो जायेंगे।

यह सब एक दिन में नहीं बदला इसका ताना बाना अक्टूबर माह से बुना जा रहा है जब सीएमओ परिवार कल्याण रहे डा विनोद आर्या की हत्या की गयी थी। एनआरएचएम के 3000 करोड़ के बजट की बंदरबाट होने में जो भी रोड़ा बना उसे रास्ते से हटा दिया गया इस क्रम में दूसरे सीएमओ डा बीपी सिंह की भी हत्या करा दी गयी।

डा सिंह की हत्या का आरोप लगा डिप्टी सीएमओ डा वाईएस सचान पर लेकिन जेल के भीतर डा सचान की हत्या हो गयी। इसके बादतो जैसे राज्य में भूचाल हा गया। मायावती ने अपने मंत्रियों से किनारा कर लिया। संभावना है कि यदि सीबीआई जांच में किसी मंत्री का नाम आ गया तो वह जेल भी जा सकता है।

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